गैस नहीं, भट्टियों पर बनेगा 20 हजार श्रद्धालुओं का खाना:पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा में विशेष भोजनशाला, 1 घंटे में 2800 रोटियां बनेंगी

गैस नहीं, भट्टियों पर बनेगा 20 हजार श्रद्धालुओं का खाना:पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा में विशेष भोजनशाला, 1 घंटे में 2800 रोटियां बनेंगी

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की लपटें अब धार्मिक आयोजनों की रसोई तक पहुंचे लगी हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण देश में LPG की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर भीलवाड़ा में 8 अप्रैल से होने वाली प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की ‘श्री शिव महापुराण कथा’ पर पड़ा है। गैस सिलेंडरों की किल्लत को देखते हुए आयोजन समिति ने बड़ा फैसला लिया है। यह संभवतः पहला मौका है, जब पंडित मिश्रा की इतनी बड़ी कथा में कमर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग नहीं किया जाएगा। मिट्‌टी की भटि्टयां तैयार की गई हैं, जिस पर 20 हजार श्रद्धालुओं के लिए सात्विक भोजन तैयार होगा। उधर, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने भी अपनी ताकत झोंक दी है। सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए 1500 जवान दूसरे जिलों से बुलाए गए हैं। 8 से 14 अप्रैल तक बहेगी शिव पुराण की गंगा
भीलवाड़ा में मेडिसिटी ग्राउंड पर 8 से 14 अप्रैल तक चलने वाली इस कथा को लेकर शहरवासियों में भारी उत्साह है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और पेयजल की व्यवस्था भी अंतिम चरण में है। प्रशासन और पुलिस की टीमें भी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रही हैं, क्योंकि भारी भीड़ के चलते यातायात प्रबंधन एक बड़ी चुनौती रहने वाला है। रसोई का मैनेजमेंट- 700 सिलेंडरों का काम संभालेंगी 12 भट्टियां
भोजन व्यवस्था प्रभारी राजेश कुदाल बताते हैं- कथा के लिए तैयारियां अंतिम दौर में हैं। श्रद्धालुओं के भोजन के लिए पन्नाधाय सर्किल के पास विशाल भोजनशाला बनाई गई है। गैस की किल्लत को देखते हुए जो 12 पारंपरिक भट्टियां बनाई गई हैं, वे करीब 700 कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी को पूरा करेंगी। भोजन पकाने में पूरी तरह लकड़ी का उपयोग किया जाएगा। आयोजन समिति ने लकड़ियों का भारी स्टॉक पहले ही जमा कर लिया है, ताकि सप्लाई की चिंता न रहे। भोजन बनाने के लिए एक साथ 70 से अधिक मुख्य हलवाई मोर्चा संभालेंगे। भोजन बनाने से लेकर वितरण तक 250 से अधिक कार्यकर्ताओं की टीम तैनात रहेगी। प्रतिदिन एक समय के भोजन वितरण की जिम्मेदारी विशेष रूप से महिला कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है। रोटी मशीन और जायकेदार मेन्यू
श्रद्धालुओं को समय पर भोजन मिल सके, इसके लिए जयपुर से एक स्पेशल रोटी मेकिंग मशीन मंगवाई गई है। यह मशीन 1 घंटे में 2800 चपातियां तैयार करने की क्षमता रखती है। सात दिनों तक भक्तों को लापसी, बूंदी, मीठे चावल, सूजी का हलवा, दाल-पूड़ी, मिक्स सब्जी, दाना मेथी की सब्जी, चावल और चपाती परोसी जाएगी। 3 राज्यों से आएंगे श्रद्धालु, 20 हजार से ज्यादा की भीड़ का अनुमान
भोजन व्यवस्था प्रभारी राजेश कुदाल बताते हैं- कथा में केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश और गुजरात से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भीलवाड़ा आएंगे। रोजाना 20 हजार से ज्यादा लोगों के लिए सुबह-शाम का भोजन तैयार किया जाना है। कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत और अनिश्चितता को देखते हुए हमने पारंपरिक तरीके से भोजन बनाने का निर्णय लिया है। इससे न केवल व्यवस्था सुचारू रहेगी, बल्कि भोजन में शुद्धता और सादगी भी बनी रहेगी। 4.50 लाख वर्ग फीट में वाटरप्रूफ डोम
भीषण गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा का खास ख्याल रखा गया है। 11.50 लाख वर्ग फीट के कुल क्षेत्र में से 4.50 लाख वर्ग फीट पर तीन विशाल वाटरप्रूफ डोम और पाइप पांडाल बनाए गए हैं। पांडाल के भीतर उमस और गर्मी से बचाने के लिए सैकड़ों कूलर और पंखे लगाए जा रहे हैं। शुद्ध पेयजल के लिए भी जगह-जगह पॉइंट बनाए गए हैं। 1500 बाहरी जवान संभालेंगे सुरक्षा, CCTV से निगरानी
भीड़ प्रबंधन को लेकर एसपी धर्मेंद्र सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था का खाका तैयार किया है। भीलवाड़ा जिले के अलावा बाहरी जिलों से 1500 अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। पूरे आयोजन स्थल की मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जाएगी, जहां चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों की नजर होगी। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस को एक्टिव किया गया है ताकि जाम की स्थिति न बने। एसपी धर्मेंद्र सिंह ने कहा- हमारा मुख्य फोकस क्राउड कंट्रोल और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर है। स्टेशन से लेकर कथा स्थल तक जवानों की तैनाती की गई है।

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