प्रयागराज में माघ मेले के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर संगम नगरी ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष से गूंज उठी। ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का संगम तट पर पहुंचना शुरू हो गया था। भक्तों ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में आस्था की डुबकी लगाई और भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसी पावन अवसर पर संगम नोज के निकट अक्षयवट मार्ग स्थित मठ बाघम्बरी गद्दी शिविर में श्रद्धालुओं के लिए फलाहारी खीर प्रसाद का विशेष वितरण किया गया। व्रत रखने वाले भक्तों को ध्यान में रखते हुए शुद्ध और सात्विक सामग्री से यह खीर तैयार की गई थी। प्रसाद ग्रहण करने के लिए शिविर में लंबी कतारें देखी गईं, जहां स्वयंसेवकों ने व्यवस्था बनाए रखी। बड़े हनुमान मंदिर के महंत बलबीर गिरी महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने कहा कि माघ मेले का यह अंतिम स्नान पर्व आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। संगम स्नान के बाद प्रसाद वितरण की यह सेवा श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और सेवा का संगम बन गई। शिविर परिसर में भजन-कीर्तन और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। मेले के अंतिम स्नान पर्व को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता के व्यापक इंतजाम किए थे। संगम क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया। दिनभर संगम तट पर आस्था, श्रद्धा और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने माघ मेले के समापन को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाया।


