नर्मदापुरम के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के कॉलर आईडी लगे बाघ का शिकार किसान ने किया था। खेत में बाघ के बार-बार पहुंचने और मवेशियों को खाने की नाराजगी के चलते किसान ने बाघ को यूरिया खिलाकर मारने की योजना बनाई थी। उसने खेत में पड़े मृत बैल के शव पर यूरिया डाला था। बैल के मांस को खाने से यूरिया बाघ शरीर में पहुंच गया, जिससे उसकी मौत हो गई। शिकार को छिपाने के लिए किसान ने 200 मीटर दूर गहरे गड्ढे में बाघ के शव को डाल दफन कर दिया। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद बाघ के शिकार का खुलासा हुआ। गिरफ्तार पांच आरोपियों में मुख्य आरोपी खेत मालिक उदय सिंह और उसका बेटा मनकसिंह है। शनिवार को आरोपियों को जुन्नारदेव के कोर्ट में पेश किया। बाघ के शिकार के अंधे केस को 2 घंटे में सुलझाने में एसटीआर डॉग अपोलो और छिंदवाड़ा के स्कूबी की भी अहम भूमिका है। जो घटना स्थल से सूंघते हुए शिकारी के घर पहुंचे और गड्ढे में छिपे बाघ तक पहुंच गए। जिसके चलते एसटीआर और छिंदवाड़ा पश्चिम वन मंडल के अमले ने पांचों आरोपियों को अरेस्ट किया। कॉलर आईडी ढूंढने पर मृत मिला बैल, बढ़ा शक फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कॉलर आईडी लगे बाघ को डेढ़ साल पहल छोड़ा गया था। जिसकी कॉलर आईडी निकालने की अनुमति कुछ दिन पहले ही मिली। 26 मार्च को जब देनवा बफर का स्टॉफ कॉलर आईडी की लोकेशन के आधार पर गांव छाती आम के खेत में पहुंचे तो बैल मृत अवस्था में मिला। जिससे शक बढ़ा। टीम ने हमें सूचना दी। फिर एसटीआर और छिंदवाड़ा से फॉरेस्ट डॉग को बुलाया। घटना स्थल से डॉग सूंघते हुए एक झोपड़ी के पास जा रुका। जो खेत मालिक उदय सिंह की थी। किसान उदय सिंह से पूछताछ की तो उसने शिकार करना स्वीकार किया। पश्चिम छिंदवाड़ा डीएफओ साहिल गर्ग ने बताया पांचों आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। पांचों को कोर्ट पेश किया। बाघ का पोस्टमार्टम कराया, जिसमें जहर से मौत की पुष्टि हुई।


