कवि संजीव मुकेश को ‘प्रथम अंतरराष्ट्रीय बिहार गौरव सम्मान’:सिडनी पर बिहार दिवस पर भव्य कार्यक्रम, दिल्ली इग्नू मुख्यालय में है पोस्टिंग

कवि संजीव मुकेश को ‘प्रथम अंतरराष्ट्रीय बिहार गौरव सम्मान’:सिडनी पर बिहार दिवस पर भव्य कार्यक्रम, दिल्ली इग्नू मुख्यालय में है पोस्टिंग

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित भारतीय वाणिज्यिक दूतावास में आयोजित ‘बिहार दिवस’ उत्सव के दौरान बिहारी अस्मिता और गौरव का स्वर वैश्विक पटल पर पूरी प्रखरता के साथ गूंजा। इस गरिमामय समारोह में भारत से बतौर विशेष अतिथि आमंत्रित प्रसिद्ध कवि संजीव मुकेश को ‘प्रथम अंतरराष्ट्रीय बिहार गौरव सम्मान 2026’ से नवाजा गया। सम्मान स्वरूप उन्हें सिडनी का प्रसिद्ध अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह और 2.51 लाख रुपए की सम्मान राशि भेंट की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कॉन्सुल जनरल डॉ. एस. जानकीरमण ने बिहार की मेधा और मेहनत की सराहना करते हुए इसे अद्वितीय बताया। नियाड ग्रुप के चेयरमैन प्रवीन कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए दूतावास में बिहार केंद्रित कार्यक्रमों की बढ़ती संख्या को सुखद बताया। अस्तित्व और आत्म-गौरव पर जोर देते हुए कहा कि वास्तविक विकास स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से ही संभव है। बिहार की कृषि शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने वैश्विक स्तर पर ‘5 बिहारी -1 स्टार्टअप’ का मंत्र दिया। इस मौके पर पूरबी इंटरनेशनल की संस्थापक नीता कुमारी ने प्रवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का आह्वान करते हुए NRI परिवारों के लिए एक ‘ग्लोबल हेल्पलाइन’ की घोषणा भी की। इग्नू मुख्यालय में है पोस्टिंग इस मौके पर कवि संजीव मुकेश ने अपनी ओजस्वी कविताओं से सिडनी में बिहार की खुशबू बिखेर दी। उन्होंने ‘श्रम-मेधा की फुलवारी हैं, चाणक्य चेतनाधारी हैं, पर्वत का सीना चीर दिया हम भैया एक बिहारी हैं’ जैसी पंक्तियों से प्रवासी समुदाय में जोश भर दिया। नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड के मूल निवासी संजीव मुकेश वर्तमान में इग्नू मुख्यालय, दिल्ली में कार्यरत हैं। अपनी मगही और हिंदी रचनाओं के माध्यम से निरंतर सांस्कृतिक जागृति फैला रहे हैं। उनके गीत ‘यही तो मेरा देश है और चलें! हम प्रेरित करें बिहार’ देश-दुनिया में काफी चर्चित रहे हैं। ‘विश्व हिंदी सेवा सम्मान’ से हो चुके हैं सम्मानित समारोह में डिप्टी कॉन्सुल जनरल नीरव सुतरिया, श्वेता और प्रवीण कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने संजीव मुकेश को सम्मानित किया। मुकेश को इससे पूर्व भी दर्जनों प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें भारत मंडपम में मिला ‘बिहार गौरव सम्मान 2024’ और ‘विश्व हिंदी सेवा सम्मान’ प्रमुख हैं। इस आयोजन ने न केवल बिहार की सांस्कृतिक विरासत को सात समंदर पार गौरवान्वित किया, बल्कि प्रवासी समुदाय को अपनी मिट्टी के प्रति कर्तव्यों का बोध भी कराया। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित भारतीय वाणिज्यिक दूतावास में आयोजित ‘बिहार दिवस’ उत्सव के दौरान बिहारी अस्मिता और गौरव का स्वर वैश्विक पटल पर पूरी प्रखरता के साथ गूंजा। इस गरिमामय समारोह में भारत से बतौर विशेष अतिथि आमंत्रित प्रसिद्ध कवि संजीव मुकेश को ‘प्रथम अंतरराष्ट्रीय बिहार गौरव सम्मान 2026’ से नवाजा गया। सम्मान स्वरूप उन्हें सिडनी का प्रसिद्ध अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह और 2.51 लाख रुपए की सम्मान राशि भेंट की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कॉन्सुल जनरल डॉ. एस. जानकीरमण ने बिहार की मेधा और मेहनत की सराहना करते हुए इसे अद्वितीय बताया। नियाड ग्रुप के चेयरमैन प्रवीन कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए दूतावास में बिहार केंद्रित कार्यक्रमों की बढ़ती संख्या को सुखद बताया। अस्तित्व और आत्म-गौरव पर जोर देते हुए कहा कि वास्तविक विकास स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से ही संभव है। बिहार की कृषि शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने वैश्विक स्तर पर ‘5 बिहारी -1 स्टार्टअप’ का मंत्र दिया। इस मौके पर पूरबी इंटरनेशनल की संस्थापक नीता कुमारी ने प्रवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का आह्वान करते हुए NRI परिवारों के लिए एक ‘ग्लोबल हेल्पलाइन’ की घोषणा भी की। इग्नू मुख्यालय में है पोस्टिंग इस मौके पर कवि संजीव मुकेश ने अपनी ओजस्वी कविताओं से सिडनी में बिहार की खुशबू बिखेर दी। उन्होंने ‘श्रम-मेधा की फुलवारी हैं, चाणक्य चेतनाधारी हैं, पर्वत का सीना चीर दिया हम भैया एक बिहारी हैं’ जैसी पंक्तियों से प्रवासी समुदाय में जोश भर दिया। नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड के मूल निवासी संजीव मुकेश वर्तमान में इग्नू मुख्यालय, दिल्ली में कार्यरत हैं। अपनी मगही और हिंदी रचनाओं के माध्यम से निरंतर सांस्कृतिक जागृति फैला रहे हैं। उनके गीत ‘यही तो मेरा देश है और चलें! हम प्रेरित करें बिहार’ देश-दुनिया में काफी चर्चित रहे हैं। ‘विश्व हिंदी सेवा सम्मान’ से हो चुके हैं सम्मानित समारोह में डिप्टी कॉन्सुल जनरल नीरव सुतरिया, श्वेता और प्रवीण कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने संजीव मुकेश को सम्मानित किया। मुकेश को इससे पूर्व भी दर्जनों प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें भारत मंडपम में मिला ‘बिहार गौरव सम्मान 2024’ और ‘विश्व हिंदी सेवा सम्मान’ प्रमुख हैं। इस आयोजन ने न केवल बिहार की सांस्कृतिक विरासत को सात समंदर पार गौरवान्वित किया, बल्कि प्रवासी समुदाय को अपनी मिट्टी के प्रति कर्तव्यों का बोध भी कराया।  

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