प्रथम गुरु मां हमें सिखाती हैं संस्कार, पिता आगे बढ़ने देते हैं प्रेरणा: आशुतोष चैतन्य

प्रथम गुरु मां हमें सिखाती हैं संस्कार, पिता आगे बढ़ने देते हैं प्रेरणा: आशुतोष चैतन्य

ठेल्काबोड़ में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक आशुतोष चैतन्य महाराज ने कहा कि मनुष्य को जीवन में पग पग पर गुरू की आवश्यकता होती है। सबसे पहली गुरु होती है, मां जो अपने ममता के छांव में पालकर संस्कार और प्रेम का पाठ सिखाती है। दूसरे गुरु हमारे जीवन में पिता होते हैं, क्योंकि अगर पिता नहीं होंगे तो मां कहां से होगी। पिता ही हमें जीवन में आगे बढ़ने और संघर्ष करने की प्रेरणा देते हैं। इसके बाद हमारे जीवन में आते हैं शिक्षा रूपी गुरु हमें ज्ञान देते हैं। इसके बाद दीक्षा रूपी गुरु होते हैं, जो हमारी आत्मा को सीधे परमात्मा से जोड़ देते हैं। आशुतोष चैतन्य महाराज ने कथा के तीसरे दिन अवतार कथा, प्रहलाद चरित्र दशावतार वर्णन किया। एक प्रसंग सुनाते कहा गुरु के बिना जीवन बैरंग डाक की तरह होता है। जीवन में दीक्षा रूपी गुरु मिल जाए, तो मन रूपी डाक सीधे ईश्वर से जुड़ जाती है। कथावाचक ने कहा कि सबसे जरूरी है जीभ पर नियंत्रण करना। क्योंकि जैसा हम पीते हैं पानी वैसी होती है हमारी वाणी जबकि जैसा हम खाते हैं अन्न वैसा हो जाता है हमारा मन। इसलिए पानी को हमेशा शुद्ध करके और भोजन हमेशा सादा व सीमित मात्रा में खाना चाहिए। जीवन में अति हमेशा खराब होती है। प्राणायाम से इंसान बढ़ा सकता है अपनी आयु: कथा में आयु बढ़ाने की विधि बताते कहा की इसका एकमात्र उपाय है प्राणायाम करना। प्राणायाम करने के लिए सांस को रोक कर रखना पड़ता है। जितनी देर हम सांस रोक कर रखते हैं उतनी हम सांस कम लेते है। रोजाना अगर दो घंटे प्राणायाम करें तो लगभग डेढ़ घंटे सांस रोक कर रखते हैं। यानी हम प्राणायाम करके रोजाना डेढ़ घंटे अपनी आयु बढ़ा सकते हैं। रोजाना डेढ़ घंटे के अनुपात से हम साल में 25 दिन अपनी आयु बढ़ा सकते हैं। ऋषि मुनि अपने जीवन में रोजाना घंटों प्राणायाम करते थे जिससे उनकी आयु बहुत अधिक होती थी।

आज कथा में राम जन्मोत्सव व नंदोत्सव: 6 फरवरी को कथा में राम जन्मोत्सव प्रसंग का वर्णन किया जाएगा। साथ ही श्री कृष्ण प्राकट्य नंदोत्सव का भी आयोजन किया जाएगा। नंदोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा तथा सजीव झांकी भी प्रस्तुत की जाएगी। कथा सुनने रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरूष पहुंच रहे हैं। कथा के अंतिम दिन भंडारा का भी आयोजन होगा। प्राणायाम करने की बताई विधि और उसके फायदे भी कथा के दौरान कहा कि मनुष्य को योग भी गुरु के मार्गदर्शन में करना चाहिए क्योंकि वही हमें प्राणायाम करने की सही विधि बताएंगे। गलत विधि से प्राणायाम करने से फायदे की जगह उल्टे नुकसान होगा। प्राणायाम करते समय हमेशा पहली बार सांस को उदर यानी पेट में रोकना चाहिए। दूसरी बार सांस को सीने में और तीसरे बार सांस को मस्तिष्क में रोकना चाहिए। इसी क्रम को दोहराते रहना चाहिए।

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