शहर में आवारा डॉग हिंसक होने के साथ जानलेवा साबित होने लगे हैं। शहर की 48 वर्षीय किरण नामक एक महिला की रैबीज होने के चलते न्यू जेएएच के मेडिसिन विभाग में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस महिला को आवारा कुत्ते ने काटा था जिसके बाद उसे एंटी रैबीज के पूरे इंजेक्शन निर्धारित समय पर नहीं लग पाए। इस कारण उसे रैबीज हो गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी मरीज को रैबीज की बीमारी हो गई तो उसके बचने की कोई संभावना नहीं है। शहर में डॉग बाइट के केस किस रफ्तार से बढ़ रहे हैं इसका पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2025 के 12 माह में कुत्ते काटे के 82,496 मरीज शहर के प्रमुख 3 अस्पतालों न्यू जेएएच, जिला अस्पताल मुरार और सिविल अस्पताल हजीरा में पहुंचे। अगर बात इस वर्ष जनवरी की करें तो इन तीन अस्पतालों में 8,629 मरीज डॉग बाइट के आए। फरवरी के अभी 4 दिन ही निकले हैं लेकिन 1013 मरीज अस्पताल पहुंच गए। इस तरह से 13 माह 4 दिन में 1,00,767 मरीजों को एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए गए। इनमें से किसी मरीज को पहला तो किसी को दूसरा या तीसरा एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया। जीआरएमसी के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ ने बताया कि डॉग बाइट के केस लगातार बढ़ रहे हैं। कई बार यह देखने में आता है कि मरीज को इंजेक्शन किस तारीख को लगना है उसे याद ही नहीं रहता है, जो घातक है। मरीजों के हित को ध्यान रखते हुए जीआरएमसी ने देश का पहला रैबी प्रो ऐप तैयार किया है। इनमें जैसे ही मरीज पहले दिन अस्पताल में अपना नाम दर्ज कराएगा तो उसकी एंट्री सीधे ऐप में हो जाएगी। जब मरीज को दूसरा या तीसरा इंजेक्शन लगना होता तो उसके मोबाइल पर इसका मैसेज आ जाएगा। साथ यह भी सुविधा हो गई है कि मरीज को पूरा डेटा हमारे पास संरक्षित रहेगा। साथ ही सरकार को आगे की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। निगम भले ही कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी करने का अभियान चलाने का दावा करती हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। शहर में सबसे ज्यादा डॉग बाइट के केस जिला अस्पताल मुरार में आए हैं। बीते साल जिला अस्पताल मुरार में सबसे ज्यादा 31,756 डॉग बाइट के मरीज आए। इस साल 1 जनवरी से अब तक सबसे अधिक 3,445 मरीज यहां एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाने आए। वहीं न्यू जेएएच के पीएसएम विभाग में 3,351 मरीज तथा सिविल अस्पताल हजीरा में 2,958 मरीज आए।


