नवादा सदर अस्पताल से लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां शॉर्ट सर्किट से आग लगने के बाद एक महिला मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आग लगने के बाद डॉक्टरों ने मरीज को नहीं देखा, जिससे ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो गई और उनकी मौत हो गई। मृतक की पहचान आसमा गांव निवासी राजेश सिंह की लगभग पत्नी ममता कुमारी (45) के रूप में हुई है। ममता कुमारी को खांसी और हल्की तबीयत खराब होने पर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। मृतक के भतीजे मौसम सिंह ने अस्पताल पर सीधे आरोप लगाए हैं। ”अस्पताल की व्यवस्था बहुत खराब” मौसम सिंह के अनुसार, “अस्पताल की व्यवस्था बहुत खराब है। मेरी चाची को खांसी और हल्की तबीयत खराब होने पर इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था। इसी दौरान शॉर्ट सर्किट से आग लगी। एक बार डॉक्टर ने देखा, उसके बाद कोई नहीं आया। ऑक्सीजन लेवल बंद हो गया और अचानक मेरी चाची की मौत हो गई।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बात सुनने के लिए कोई तैयार नहीं था। परिजनों ने अस्पताल की अव्यवस्था और जनप्रतिनिधियों पर भी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि अस्पताल अंधेरे में तब्दील हो गया था और आग लगने के बावजूद कोई व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि केवल वोट लेने की चाहत रखते हैं, लेकिन व्यवस्था दुरुस्त नहीं करते। सदर अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल यह घटना सदर अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिस पर अक्सर लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी? क्या मरीजों की सुरक्षा के लिए पहले से कोई इंतजाम थे? और क्या आग लगने के बाद मरीजों की स्थिति पर किसी ने ध्यान दिया? नवादा सदर अस्पताल से लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां शॉर्ट सर्किट से आग लगने के बाद एक महिला मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आग लगने के बाद डॉक्टरों ने मरीज को नहीं देखा, जिससे ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो गई और उनकी मौत हो गई। मृतक की पहचान आसमा गांव निवासी राजेश सिंह की लगभग पत्नी ममता कुमारी (45) के रूप में हुई है। ममता कुमारी को खांसी और हल्की तबीयत खराब होने पर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। मृतक के भतीजे मौसम सिंह ने अस्पताल पर सीधे आरोप लगाए हैं। ”अस्पताल की व्यवस्था बहुत खराब” मौसम सिंह के अनुसार, “अस्पताल की व्यवस्था बहुत खराब है। मेरी चाची को खांसी और हल्की तबीयत खराब होने पर इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था। इसी दौरान शॉर्ट सर्किट से आग लगी। एक बार डॉक्टर ने देखा, उसके बाद कोई नहीं आया। ऑक्सीजन लेवल बंद हो गया और अचानक मेरी चाची की मौत हो गई।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बात सुनने के लिए कोई तैयार नहीं था। परिजनों ने अस्पताल की अव्यवस्था और जनप्रतिनिधियों पर भी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि अस्पताल अंधेरे में तब्दील हो गया था और आग लगने के बावजूद कोई व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि केवल वोट लेने की चाहत रखते हैं, लेकिन व्यवस्था दुरुस्त नहीं करते। सदर अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल यह घटना सदर अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिस पर अक्सर लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी? क्या मरीजों की सुरक्षा के लिए पहले से कोई इंतजाम थे? और क्या आग लगने के बाद मरीजों की स्थिति पर किसी ने ध्यान दिया?


