एक ही बाइक से कई नकली एक्सीडेंट, बीमा क्लेम के नाम पर लाखों की ठगी, बरेली में गिरोह के नौ आरोपियों पर एफआईआर

एक ही बाइक से कई नकली एक्सीडेंट, बीमा क्लेम के नाम पर लाखों की ठगी, बरेली में गिरोह के नौ आरोपियों पर एफआईआर

बरेली। सड़क हादसों के नाम पर बीमा कंपनियों से फर्जी क्लेम लेकर लाखों रुपये हड़पने वाले एक संगठित गिरोह का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी की शिकायत पर बरेली में नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देश पर थाना इज्जतनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।

कंपनी के अधिकारी अंकुर सक्सेना ने एसएसपी को दी शिकायत में बताया कि केंद्रीय मोटर यान (पंचम संशोधन) नियम 2022 के तहत सड़क दुर्घटना से जुड़े बीमा दावों की सत्यता की जांच कराई जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान बरेली में सक्रिय एक ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ जो योजनाबद्ध तरीके से फर्जी दुर्घटनाएं दिखाकर बीमा कंपनी से क्लेम हासिल करने की कोशिश करता था।

अज्ञात वाहन वाली दुर्घटनाओं को बनाते थे निशाना

जांच में सामने आया कि गिरोह उन मामलों को निशाना बनाता था जिनमें दुर्घटना किसी अज्ञात वाहन से हुई हो, वाहन का बीमा न हो या चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस न हो। इसके बाद गिरोह के सदस्य आपसी मिलीभगत से अपने वाहन या चालक को झूठा दुर्घटना में शामिल दिखाकर बीमा कंपनी के सामने दावा पेश कर देते थे। पुलिस जांच में कई ऐसे मामले सामने आए जिनमें कुछ लोगों के नाम बार-बार सामने आए। इनमें जगदीश पुत्र शेर सिंह, रामसरन पुत्र बृजपाल, रोहित गुप्ता पुत्र हरी बाबू गुप्ता, मोहित मिश्रा पुत्र सतीश चंद्र, सूर्य प्रताप पुत्र दीनदयाल और जगजीत पुत्र महेश बाबू समेत कई अन्य लोग शामिल बताए गए हैं। अलग-अलग थानों में दर्ज कई सड़क दुर्घटना मामलों में इन्हीं लोगों के वाहन या चालक के रूप में नाम दर्ज कराया गया, जिससे संदेह गहराता गया।

एक ही वाहन कई मामलों में दिखाया गया

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ वाहन नंबर कई मुकदमों में बार-बार इस्तेमाल किए गए। उदाहरण के तौर पर मोटरसाइकिल नंबर UP 25 DN 9344 और UP 25 DP 6595 को अलग-अलग दुर्घटना मामलों में आरोपी वाहन के रूप में दर्शाया गया। इससे पूरे मामले में संगठित धोखाधड़ी की आशंका और मजबूत हो गई। कंपनी अधिकारी अंकुर सक्सेना ने एसएसपी से पूरे मामले में विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि फोन कॉल, सीडीआर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए गिरोह की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सकती है।

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