DVVNL के टेंडर घोटाले में 19 के खिलाफ FIR:आगरा के फतेहाबाद थाना में 6 विभागीय अधिकारी-कर्मचारी और 13 फर्म मालिकों के खिलाफ FIR

DVVNL के टेंडर घोटाले में 19 के खिलाफ FIR:आगरा के फतेहाबाद थाना में 6 विभागीय अधिकारी-कर्मचारी और 13 फर्म मालिकों के खिलाफ FIR

दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (DVVNL) में हुए टेंडर घोटाले में आखिरकार दोषियों के खिलाफ आगरा के थाना फतेहाबाद में FIR हो गई। विभाग के अधीक्षण अभियंता सोमवीर सिंह की ओर से 19 लोगों के खिलाफ टेंडरों में घोटाला कर जालसाजी, विभाग को आर्थिक हानि पहुंचाने का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
इसमें 6 विभागीय अधिकारी और कर्मचारी हैं तथा 13 उन फर्मों के मालिक हैं, जिन्हें टेंडर जारी किए गए। इन सबने मिलकर DVVNL को करोड़ों रुपये का चूना लगाया।
इनके खिलाफ दर्ज कराई गई FIR ये हैं विभागीय अधिकारी-कर्मचारी इनके फर्म के खिलाफ FIR ये है मामला आगरा के फतेहाबाद स्थित विद्युत वितरण मंडल कार्यालय में लगभग 30 करोड़ रुपये के 54 टेंडर नियमों को ताक पर रख दे दिए गए। इसके अलावा 74 अन्य टेंडरों में अनियमितताएं सामने आई हैं। कुल 128 टेंडरों में गड़बड़ी की गई है। इनमें से कई टेंडर तो पोर्टल पर चढ़ाए बिना ही फार्मों को आवंटित कर दिए गए।
मामला संज्ञान में आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। इसका खुलासा विभाग द्वारा कराई इंटरनल जांच में हुआ है। कुछ ऐसे टेंडर भी थे, जिसमें प्रथम निविदादाता ने निविदा की धनराशि 15 लाख रुपये अंकित की गई लेकिन कार्यालय के घोटालेबाज बाबू ने इसको 28 लाख कर दिया। इसके बाद अनुबंध को 28 लाख में ही कर दिया।
कुछ ऐसी भी निविदा प्रकाश में आई हैं, जिसमें टेंडर डाले ही नहीं गए, इसके बाद भी उन्हें अनुबंध कर दिया। प्रबंधन निदेशक नितिश कुमार ने घोर लापरवाही के लिए विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। FIR कराने के आदेश दिए हैं। ऐसे हुआ खुलासा
DVVNL समय-समय पर टेंडरों की की समीक्षा करता है। पिछले दिनों हुई समीक्षा में सामने आया कि फतेहाबाद स्थित कार्यालय में टेंडर तो दिख रहे थे लेकिन उनकी फाइलें DVVNL कार्यालय में अनुमोदन के लिए नहीं आईं। इस पर DVVNL के प्रबंध निदेशक नितिश कुमार के निर्देश पर मुख्य अभियंता कपिल सिंघवानी ने जांच कराई।
इस जांच में टेंडर घोटालों की पोल खुली। इससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। क्योंकि ये टेंडर घोटाला कुछ लाख का नहीं बल्कि 30 करोड़ रुपये का निकला है। नियमों को दरकिनार करते हुए ये टेंडर जारी किए गए। जांच में 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 में हुए टेंडरों में गड़बड़ियां मिलीं। पत्रावलियों में ये मिली थी अनियिमतताएं… इन टेंडरों में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
54 ऐसे टेंडर ई-निविदा पोर्टल पर प्रकाशित नहीं है लेकिन संदर्भित कार्यदायी संस्था द्वारा विभागीय अधिकारी/कर्मचारी से मिलीभगत करके अनुबंध कर विभाग को वित्तीय हानि पहुंचाई गई।

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