नालंदा जिला शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितता का खुलासा:जांच रिपोर्ट में पूर्व डीपीओ दोषी करार, बेंच-डेस्क खरीद में बड़ा घोटाला

नालंदा जिला शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहे वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब खुलकर सामने आ गया है। शिक्षा विभाग के निदेशक मनोरंजन कुमार की ओर से जारी जांच रिपोर्ट में पूर्व स्थापना जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) सुजीत कुमार राउत को सभी आरोपों में दोषी पाए गए हैं। बेंच-डेस्क खरीद में बड़ा घोटाला जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि जिले के विद्यालयों के लिए बेंच-डेस्क की खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की गई। हालांकि कई एजेंसियों ने जिले में बेंच-डेस्क की आपूर्ति की थी, लेकिन प्रो. इंडमेट प्रेस मेटल प्राइवेट लिमिटेड नागपुर की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री के बकाया भुगतान के लिए पूर्व डीपीओ ने 35 फीसदी कमीशन की मांग की, जो सरकारी नियमों के पूरी तरह विपरीत है। जांच टीम ने पाया कि बिना किसी शिकायत के ही पूर्व डीपीओ ने विभाग की ओर से निर्धारित मानकों से अतिरिक्त बिंदुओं पर जांच करवाई, जो उनकी गलत मंशा को साबित करता है। संस्कृत शिक्षकों से 15 फीसदी कमीशन की मांग संस्कृत विद्यालयों में रिटायर्ड शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों की भविष्य निधि और बकाया राशि के भुगतान में भी बड़ी अनियमितता सामने आई है। जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि पूर्व डीपीओ ने इन शिक्षकों से उनकी बकाया राशि दिलवाने के एवज में 15 फीसदी कमीशन की मांग की। जिन शिक्षकों ने कमीशन देने से इनकार किया, उन्हें उनकी वैध राशि से वंचित रखा गया। जान-बूझकर किया गया विलंब जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि अगर पूर्व डीपीओ 27 मार्च 2024 से पहले पे-आईडी बनाकर रखते तो 31 मार्च 2024 से पहले ही सभी शिक्षकों को राशि का भुगतान हो जाता। लेकिन जान-बूझकर विलंब किया गया। 31 मार्च 2024 को ऑनलाइन माध्यम से बिल कोषागार को भेजा गया, जो सर्वर फेल होने के कारण प्रोसेस नहीं हो सका। जांच टीम का मानना है कि संस्कृत शिक्षकों को भुगतान होने वाली राशि से संबंधित दस्तावेज निजी स्वार्थ और गलत मंशा से प्रेरित होकर जान-बूझकर विलंब से भेजे गए। संदिग्ध आचरण और लापरवाही विशेष सचिव सह निदेशक अनिल कुमार के नेतृत्व में गठित जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में साफ शब्दों में कहा है कि पूर्व डीपीओ का आचरण न केवल लापरवाही और शिथिलता से भरा हुआ है, बल्कि अत्यंत संदिग्ध भी है। उनकी गलत मंशा और साजिश के तहत अधिकतर शिक्षकों को उनकी वैध राशि का भुगतान नहीं हो सका। कार्रवाई की गई और आगे भी होगी शिक्षा विभाग के निदेशक मनोरंजन कुमार ने पूर्व स्थापना डीपीओ सुजीत कुमार राउत को दोषी मानते हुए उन्हें कार्रवाई से मुक्त नहीं करने का स्पष्ट आदेश दिया है। आरोप प्रमाणित होने के बाद उनकी दो वेतन वृद्धि को संचयी प्रभाव के बिना रोक दिया गया है। जांच दल ने आरोपी पदाधिकारी को अपना पक्ष रखने का भी मौका दिया था, लेकिन उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। नालंदा जिला शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहे वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब खुलकर सामने आ गया है। शिक्षा विभाग के निदेशक मनोरंजन कुमार की ओर से जारी जांच रिपोर्ट में पूर्व स्थापना जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) सुजीत कुमार राउत को सभी आरोपों में दोषी पाए गए हैं। बेंच-डेस्क खरीद में बड़ा घोटाला जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि जिले के विद्यालयों के लिए बेंच-डेस्क की खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की गई। हालांकि कई एजेंसियों ने जिले में बेंच-डेस्क की आपूर्ति की थी, लेकिन प्रो. इंडमेट प्रेस मेटल प्राइवेट लिमिटेड नागपुर की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री के बकाया भुगतान के लिए पूर्व डीपीओ ने 35 फीसदी कमीशन की मांग की, जो सरकारी नियमों के पूरी तरह विपरीत है। जांच टीम ने पाया कि बिना किसी शिकायत के ही पूर्व डीपीओ ने विभाग की ओर से निर्धारित मानकों से अतिरिक्त बिंदुओं पर जांच करवाई, जो उनकी गलत मंशा को साबित करता है। संस्कृत शिक्षकों से 15 फीसदी कमीशन की मांग संस्कृत विद्यालयों में रिटायर्ड शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों की भविष्य निधि और बकाया राशि के भुगतान में भी बड़ी अनियमितता सामने आई है। जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि पूर्व डीपीओ ने इन शिक्षकों से उनकी बकाया राशि दिलवाने के एवज में 15 फीसदी कमीशन की मांग की। जिन शिक्षकों ने कमीशन देने से इनकार किया, उन्हें उनकी वैध राशि से वंचित रखा गया। जान-बूझकर किया गया विलंब जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि अगर पूर्व डीपीओ 27 मार्च 2024 से पहले पे-आईडी बनाकर रखते तो 31 मार्च 2024 से पहले ही सभी शिक्षकों को राशि का भुगतान हो जाता। लेकिन जान-बूझकर विलंब किया गया। 31 मार्च 2024 को ऑनलाइन माध्यम से बिल कोषागार को भेजा गया, जो सर्वर फेल होने के कारण प्रोसेस नहीं हो सका। जांच टीम का मानना है कि संस्कृत शिक्षकों को भुगतान होने वाली राशि से संबंधित दस्तावेज निजी स्वार्थ और गलत मंशा से प्रेरित होकर जान-बूझकर विलंब से भेजे गए। संदिग्ध आचरण और लापरवाही विशेष सचिव सह निदेशक अनिल कुमार के नेतृत्व में गठित जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में साफ शब्दों में कहा है कि पूर्व डीपीओ का आचरण न केवल लापरवाही और शिथिलता से भरा हुआ है, बल्कि अत्यंत संदिग्ध भी है। उनकी गलत मंशा और साजिश के तहत अधिकतर शिक्षकों को उनकी वैध राशि का भुगतान नहीं हो सका। कार्रवाई की गई और आगे भी होगी शिक्षा विभाग के निदेशक मनोरंजन कुमार ने पूर्व स्थापना डीपीओ सुजीत कुमार राउत को दोषी मानते हुए उन्हें कार्रवाई से मुक्त नहीं करने का स्पष्ट आदेश दिया है। आरोप प्रमाणित होने के बाद उनकी दो वेतन वृद्धि को संचयी प्रभाव के बिना रोक दिया गया है। जांच दल ने आरोपी पदाधिकारी को अपना पक्ष रखने का भी मौका दिया था, लेकिन उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।  

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