फाइलेरिया रोगियों को रूग्णता प्रबंधन पर मिला प्रशिक्षण:मुख्य चिकित्साधिकारी की अध्यक्षता में कार्यशाला, बचाव और एमएमडीपी किट का उपयोग बताया

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. दीपा सिंह की अध्यक्षता में फाइलेरिया रोगियों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में हुई, जिसका उद्देश्य रूग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता की रोकथाम (एमएमडीपी) विषय पर मरीजों को जागरूक करना था। इस कार्यक्रम में चिकित्सा अधिकारी, बीपीएम, बीसीपीएम, एआरओ, एलटी सहित कई स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण सत्र का संचालन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. राहुल ने किया। डॉ. राहुल ने फाइलेरिया रोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह रोग मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है और मुख्य रूप से पैर, हाथ, वृषण तथा स्तन जैसे अंगों को प्रभावित करता है। संक्रमण के कारण इन अंगों में असामान्य सूजन आ जाती है, जिससे रोगियों को शारीरिक और मानसिक परेशानी होती है। डॉ. राहुल ने मच्छरों से बचाव के उपायों पर जोर दिया, जिसमें मच्छरदानी का नियमित उपयोग और आसपास स्वच्छता बनाए रखना शामिल है। उन्होंने फाइलेरिया से प्रभावित रोगियों को नियमित व्यायाम, प्रभावित अंगों की साफ-सफाई, सूजन नियंत्रण और समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह भी दी। कार्यशाला में एमएमडीपी किट के सही उपयोग का प्रायोगिक प्रदर्शन भी किया गया। इससे उपस्थित रोगियों को किट के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी मिली। कार्यक्रम के समापन पर मुख्य चिकित्साधिकारी ने उपस्थित फाइलेरिया रोगियों को एमएमडीपी किट वितरित की। इस अवसर पर जिला मलेरिया अधिकारी, एपिडेमियोलॉजिस्ट, सहायक मलेरिया अधिकारी, मलेरिया निरीक्षक सहित कई अन्य स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

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