मधुबनी जिले के मंडल कारा रामपट्टी परिसर में मंगलवार को फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जेल अधीक्षक की पहल पर हुए इस कार्यक्रम में कैदियों को फाइलेरिया रोग से बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डी.एस. सिंह ने कैदियों को फाइलेरिया के लक्षण, कारण और रोकथाम के उपायों से अवगत कराया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जेल परिसर में रह रहे सभी कैदियों को फाइलेरिया संक्रमण से सुरक्षित रखना और सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम को सफल बनाना था। चिकित्सा पदाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलने वाला एक संक्रामक रोग है। इसके लक्षणों में हाथ-पैरों में सूजन, दर्द, बुखार और थकान जैसी समस्याएँ शामिल हैं। टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि दवा खाने से इस रोग के परजीवी शरीर में निष्क्रिय हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का प्रसार रुक जाता है। सभी कैदियों को आगामी 26 फरवरी को डीईसी (Diethylcarbamazine) और एल्बेंडाजोल (Albendazole) दवा का सेवन कराया जाना है। डॉ. सिंह ने बताया कि जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए चल रहा सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए) 28 फरवरी तक जारी रहेगा, जिसके तहत स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाएंगे और जागरूक करेंगे। मंडल कारा के अधीक्षक ने पुष्टि की कि जेल प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर सभी कैदियों को दवा सेवन कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और सभी को इसका सेवन करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में, स्वास्थ्य कर्मियों ने कैदियों से अपील की कि यदि दवा खाने के बाद हल्की उल्टी या चक्कर जैसा महसूस हो तो घबराएँ नहीं, क्योंकि यह फाइलेरिया पर दवा के असर का संकेत है। इस अभियान के सफल संचालन के लिए जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों की सराहना की गई। इस अवसर पर जेल अधीक्षक, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डी.एस. सिंह, वेक्टर नियंत्रण पदाधिकारी पुरुषोत्तम कुमार, अमर कुमार और डिंपू कुमार सहित अन्य कर्मी उपस्थित थे। मधुबनी जिले के मंडल कारा रामपट्टी परिसर में मंगलवार को फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जेल अधीक्षक की पहल पर हुए इस कार्यक्रम में कैदियों को फाइलेरिया रोग से बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डी.एस. सिंह ने कैदियों को फाइलेरिया के लक्षण, कारण और रोकथाम के उपायों से अवगत कराया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जेल परिसर में रह रहे सभी कैदियों को फाइलेरिया संक्रमण से सुरक्षित रखना और सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम को सफल बनाना था। चिकित्सा पदाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलने वाला एक संक्रामक रोग है। इसके लक्षणों में हाथ-पैरों में सूजन, दर्द, बुखार और थकान जैसी समस्याएँ शामिल हैं। टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि दवा खाने से इस रोग के परजीवी शरीर में निष्क्रिय हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का प्रसार रुक जाता है। सभी कैदियों को आगामी 26 फरवरी को डीईसी (Diethylcarbamazine) और एल्बेंडाजोल (Albendazole) दवा का सेवन कराया जाना है। डॉ. सिंह ने बताया कि जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए चल रहा सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए) 28 फरवरी तक जारी रहेगा, जिसके तहत स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाएंगे और जागरूक करेंगे। मंडल कारा के अधीक्षक ने पुष्टि की कि जेल प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर सभी कैदियों को दवा सेवन कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और सभी को इसका सेवन करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में, स्वास्थ्य कर्मियों ने कैदियों से अपील की कि यदि दवा खाने के बाद हल्की उल्टी या चक्कर जैसा महसूस हो तो घबराएँ नहीं, क्योंकि यह फाइलेरिया पर दवा के असर का संकेत है। इस अभियान के सफल संचालन के लिए जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों की सराहना की गई। इस अवसर पर जेल अधीक्षक, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डी.एस. सिंह, वेक्टर नियंत्रण पदाधिकारी पुरुषोत्तम कुमार, अमर कुमार और डिंपू कुमार सहित अन्य कर्मी उपस्थित थे।


