मुरादाबाद में उदीषा 2026 चौपाल साहित्योत्सव का पांचवां दिन साहित्य, कला, रंगकर्म और भारतीय संस्कृति के विविध आयामों को समर्पित रहा। इस दौरान विभिन्न विषयों पर गहन संवाद और प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। दिन की शुरुआत जॉन एलिया ज़ोन में मल्टीमीडिया वर्कशॉप से हुई, जिसमें रचनात्मक अभिव्यक्ति के आधुनिक माध्यमों पर चर्चा की गई। इसके बाद रामगंगा लॉन्स में दास्तानगोई का आयोजन हुआ, जिसने श्रोताओं को कथाओं की पारंपरिक और जीवंत शैली से परिचित कराया। दोपहर करीब 1 बजे भारतीय ज्ञान परंपरा, स्त्री स्वर: संघर्ष और संवेदना, तथा मुरादाबाद की धरा में स्वरों का ओजस जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इसी क्रम में उर्दू, मुरादाबाद और सूफीवाद पर केंद्रित एक सत्र ने सांस्कृतिक विरासत और साझा तहजीब को रेखांकित किया। दोपहर बाद दुष्यंत मंच पर ‘रंगकर्म का भविष्य: ओटीटी और माइक्रो फिल्म के दौर में’ विषय पर सत्र आयोजित किया गया। इसमें बदलते माध्यमों और थिएटर के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ विषयक प्रस्तुति ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। शाम के सत्रों में ‘पुस्तकें: कितनी पास, कितनी दूर’, ‘कहानी, किरदार और सिनेमा’, तथा ‘पारसी थियेटर: आधा हश्र कश्मीरी का’ जैसे विषयों पर संवाद हुए। देर शाम रामगंगा लॉन्स में ‘सीता वनवास’ की मंचीय प्रस्तुति हुई। इस प्रस्तुति ने शास्त्रीय और समकालीन दृष्टि का संगम प्रस्तुत किया। उदीषा 2026 चौपाल साहित्योत्सव का पांचवां दिन साहित्य, कला और संस्कृति के बहुआयामी स्वरूप को समर्पित रहा, जिसमें विचार, संवेदना और रचनात्मकता का सशक्त संगम देखने को मिला।


