दरभंगा में ट्रैफिक रूल तोड़ने पर एक महिला डॉक्टर के साथ बेंता थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार ने गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया था। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। वीडियो सामने आन के बाद थाना अध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है। घटना के 2 दिन बाद सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो आया है, जिसमें वहीं महिला डॉक्टर दिख रहीं हैं, जो पहले वाले वीडियो में थीं। गाड़ी भी वही है जिसका थानध्यक्ष ने चालान काटा था। महिला डॉक्टर की गाड़ी ने फिर से ट्रैफिक नियम तोड़ा है, जिस वजह से सड़क पर जाम लग गया। गाड़ी पर भारत सरकार का बोर्ड लगा ये वीडियो सामने आने से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वायरल वीडियो में वही अर्टिगा गाड़ी और वही महिला डॉक्टर दिखाई दे रही हैं, जबकि एक आम नागरिक उनका वीडियो बनाता नजर आ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गाड़ी पर भारत सरकार का बोर्ड लगा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, संबंधित महिला डॉक्टर भारतीय रेल के एक वरिष्ठ अधिकारी की बेटी बताई जा रही हैं। हालांकि, इस संबंध में पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। संबंधित गाड़ी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी मामले में नया मोड़ आने के बाद SSP जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर राजीव कुमार को गंभीरता से जांच करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि जांच में कोई भी तथ्य गलत या नियमों के खिलाफ पाया गया, तो महिला डॉक्टर, गाड़ी ड्राइवर और संबंधित गाड़ी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कानूनी जानकारों के अनुसार, बिना वैधानिक अधिकार के निजी वाहन पर “भारत सरकार” का बोर्ड लगाना भारतीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। मामला सरकारी कर्मचारी का प्रतिरूपण, धोखाधड़ी और मोटर वाहन अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में नए आपराधिक कानून (BNS/BNSS) और मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालक और महिला के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने बताया कि मामले से जुड़ा एक नया वीडियो सामने आया है, जिसकी जांच के लिए सदर एसडीपीओ को निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि घटनाक्रम की शुरुआत से लेकर अंत तक की पूरी जांच की जा रही है। इसमें प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, घटनास्थल से जुड़े लोगों के बयान और सीसीटीवी फुटेज की गहन समीक्षा शामिल है। एसएसपी ने बताया कि वीडियो की सत्यता और घटनाक्रम की पुष्टि के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूरी घटना बेहद दुखद है एसएसपी ने कहा कि पूरी घटना बेहद दुखद है। उन्होंने बताया कि जिस थानेदार की भूमिका संदिग्ध पाई गई, उन्हें निलंबित कर दिया गया है। साथ ही, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने घटना का विवरण देते हुए बताया कि जिस दिन यह घटना हुई, उसके अगले दिन मुख्यमंत्री का दरभंगा दौरा प्रस्तावित था और उसके लिए रिहर्सल चल रहा था। शहर में वन-वे व्यवस्था लागू है, लेकिन एक गाड़ी उल्टी दिशा से जा रही थी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने वाहन को रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक ने गाड़ी नहीं रोकी और तेज गति से आगे बढ़ गया। लगभग 50 मीटर आगे जाकर अन्य पुलिसकर्मियों ने गाड़ी को रोका, जिसके बाद विवाद की स्थिति हुई। दरभंगा में ट्रैफिक रूल तोड़ने पर एक महिला डॉक्टर के साथ बेंता थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार ने गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया था। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। वीडियो सामने आन के बाद थाना अध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है। घटना के 2 दिन बाद सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो आया है, जिसमें वहीं महिला डॉक्टर दिख रहीं हैं, जो पहले वाले वीडियो में थीं। गाड़ी भी वही है जिसका थानध्यक्ष ने चालान काटा था। महिला डॉक्टर की गाड़ी ने फिर से ट्रैफिक नियम तोड़ा है, जिस वजह से सड़क पर जाम लग गया। गाड़ी पर भारत सरकार का बोर्ड लगा ये वीडियो सामने आने से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वायरल वीडियो में वही अर्टिगा गाड़ी और वही महिला डॉक्टर दिखाई दे रही हैं, जबकि एक आम नागरिक उनका वीडियो बनाता नजर आ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गाड़ी पर भारत सरकार का बोर्ड लगा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, संबंधित महिला डॉक्टर भारतीय रेल के एक वरिष्ठ अधिकारी की बेटी बताई जा रही हैं। हालांकि, इस संबंध में पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। संबंधित गाड़ी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी मामले में नया मोड़ आने के बाद SSP जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर राजीव कुमार को गंभीरता से जांच करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि जांच में कोई भी तथ्य गलत या नियमों के खिलाफ पाया गया, तो महिला डॉक्टर, गाड़ी ड्राइवर और संबंधित गाड़ी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कानूनी जानकारों के अनुसार, बिना वैधानिक अधिकार के निजी वाहन पर “भारत सरकार” का बोर्ड लगाना भारतीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। मामला सरकारी कर्मचारी का प्रतिरूपण, धोखाधड़ी और मोटर वाहन अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में नए आपराधिक कानून (BNS/BNSS) और मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालक और महिला के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने बताया कि मामले से जुड़ा एक नया वीडियो सामने आया है, जिसकी जांच के लिए सदर एसडीपीओ को निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि घटनाक्रम की शुरुआत से लेकर अंत तक की पूरी जांच की जा रही है। इसमें प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, घटनास्थल से जुड़े लोगों के बयान और सीसीटीवी फुटेज की गहन समीक्षा शामिल है। एसएसपी ने बताया कि वीडियो की सत्यता और घटनाक्रम की पुष्टि के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूरी घटना बेहद दुखद है एसएसपी ने कहा कि पूरी घटना बेहद दुखद है। उन्होंने बताया कि जिस थानेदार की भूमिका संदिग्ध पाई गई, उन्हें निलंबित कर दिया गया है। साथ ही, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने घटना का विवरण देते हुए बताया कि जिस दिन यह घटना हुई, उसके अगले दिन मुख्यमंत्री का दरभंगा दौरा प्रस्तावित था और उसके लिए रिहर्सल चल रहा था। शहर में वन-वे व्यवस्था लागू है, लेकिन एक गाड़ी उल्टी दिशा से जा रही थी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने वाहन को रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक ने गाड़ी नहीं रोकी और तेज गति से आगे बढ़ गया। लगभग 50 मीटर आगे जाकर अन्य पुलिसकर्मियों ने गाड़ी को रोका, जिसके बाद विवाद की स्थिति हुई।


