कुछ लोगों ने भारतीय पहलवान बनकर बुडापेस्ट में एक कथित प्रतियोगिता के लिए नयी दिल्ली में हंगरी दूतावास से वीजा मांगा जिससे मानव तस्करी की संदिग्ध कोशिश का मामला सामने आया हालांकि भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने स्पष्ट किया कि आवेदन के साथ लगाए गए उनके दस्तावेज फर्जी है।
दूतावास ने गुरुवार को डब्ल्यूएफआई से पुष्टि मांगी जब उसे 15 से 22 मार्च तक बुडापेस्ट में होने वाले ‘इंटरनेशनल रेसलिंग ट्रेनिंग और टूर्नामेंट कार्यक्रम’ में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रीय महासंघ द्वारा चार मार्च को कथित तौर पर जारी एक सिफारिश पत्र के जसाथ वीजा आवेदन मिला।
डब्ल्यूएफआई ने तुरंत जवाब दिया और कहा कि यह पत्र फर्जी था जिसे महासंघ ने जारी नहीं किया था।
डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने दूतावास को दिए जवाब में कहा, ‘‘यह 12 मार्च के आपके ईमेल के संबंध में है जिसमें दस्तावेजों के असली होने के बारे में सफाई मांगी गई थी। इसमें दिया गया पत्र फर्जी है और भारतीय कुश्ती महासंघ ने जारी नहीं किया है। ’’
महासंघ ने दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ियों की ओर भी इशारा किया जिसमें एक पूर्व अधिकारी का नाम गलत तरीके से इस्तेमाल करना भी शामिल है।
सिंह ने कहा, ‘‘यह भी साफ किया जाता है कि वी एन प्रसूद अब डब्ल्यूएफआई के महासचिव पद पर काबिज नहीं हैं और अभी डब्ल्यूएफआई के उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे हैं। प्रसूद से इस मामले के बारे में जानकारी ली गई है जिन्होंने ऐसा कोई पत्र जारी करने से साफ इनकार किया है। ’’
दूतावास को सौंपे गए जाली पत्र के मुताबिक 11 पहलवान और एक मैनेजर को बुडापेस्ट जाने के लिए वीजा देने की सिफारिश की गई थी जिसमें एक स्थानीय जगह पर ट्रेनिंग और टूर्नामेंट के कार्यक्रम का हवाला दिया गया था।
दस्तावेज में एक ‘रेफरेंस नंबर’ भी था और कहा जा रहा है कि दूतावास से खिलाड़ियों को वीजा देने का अनुरोध किया गया था।
महासंघ के अधिकारियों ने कहा कि दस्तावेज में इस्तेमाल किए गए लेटरहेड में गलत जानकारी थीं जिसमें पुराना पता भी शामिल था और दूसरी गड़बड़ियां भी थीं।
महासंघ ने अपने जवाब में दूतावास से जाली दस्तावेजों के आधार पर किसी भी वीजा आवेदन को मंजूरी नहीं देने की अपील की और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।
डब्ल्यूएफआई ने कहा, ‘‘इसे देखते हुए अनुरोध है कि इस पत्र के आधार पर कोई वीजा प्रक्रिया शुरू नहीं की जाए और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। ’’
महासंघ ने यह भी साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए आधिकारिक भारतीय प्रविष्टि सिर्फ राष्ट्रीय संस्था के जरिए ही भेजी जाती है और भारतीय पहलवानों के लिए अगली कुश्ती प्रतियोगिता बुडापेस्ट में रैंकिंग सीरीज ‘पोलयाक इमरे, वारगा नानोस एवं कोज्मा इस्तवान मेमोरियल’ टूर्नामेंट जुलाई में होना है।
संजय सिंह ने कहा, ‘‘यह घटना शायद मानव तस्करी की कोशिश से जुड़ी हो सकती है जिसमें कुछ लोग कथित तौर पर महासंघ के नकली दस्तावेज का इस्तेमाल करके खिलाड़ी बनकर विदेश जाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों से मामले की आगे जांच करने की उम्मीद है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें पहले दूतावास से फोन आया था। हमने ईमेल से दस्तावेज मांगे थे। जांच करने पर पता चला कि यह सब नकली है। हमने तुरंत दूतावास को जवाब दिया। इसकी जांच होनी चाहिए।
कुछ लोगों ने भारतीय पहलवान बनकर बुडापेस्ट में एक कथित प्रतियोगिता के लिए नयी दिल्ली में हंगरी दूतावास से वीजा मांगा जिससे मानव तस्करी की संदिग्ध कोशिश का मामला सामने आया हालांकि भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने स्पष्ट किया कि आवेदन के साथ लगाए गए उनके दस्तावेज फर्जी है।
दूतावास ने गुरुवार को डब्ल्यूएफआई से पुष्टि मांगी जब उसे 15 से 22 मार्च तक बुडापेस्ट में होने वाले ‘इंटरनेशनल रेसलिंग ट्रेनिंग और टूर्नामेंट कार्यक्रम’ में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रीय महासंघ द्वारा चार मार्च को कथित तौर पर जारी एक सिफारिश पत्र के जसाथ वीजा आवेदन मिला।
डब्ल्यूएफआई ने तुरंत जवाब दिया और कहा कि यह पत्र फर्जी था जिसे महासंघ ने जारी नहीं किया था।
डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने दूतावास को दिए जवाब में कहा, ‘‘यह 12 मार्च के आपके ईमेल के संबंध में है जिसमें दस्तावेजों के असली होने के बारे में सफाई मांगी गई थी। इसमें दिया गया पत्र फर्जी है और भारतीय कुश्ती महासंघ ने जारी नहीं किया है। ’’
महासंघ ने दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ियों की ओर भी इशारा किया जिसमें एक पूर्व अधिकारी का नाम गलत तरीके से इस्तेमाल करना भी शामिल है।
सिंह ने कहा, ‘‘यह भी साफ किया जाता है कि वी एन प्रसूद अब डब्ल्यूएफआई के महासचिव पद पर काबिज नहीं हैं और अभी डब्ल्यूएफआई के उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे हैं। प्रसूद से इस मामले के बारे में जानकारी ली गई है जिन्होंने ऐसा कोई पत्र जारी करने से साफ इनकार किया है। ’’
दूतावास को सौंपे गए जाली पत्र के मुताबिक 11 पहलवान और एक मैनेजर को बुडापेस्ट जाने के लिए वीजा देने की सिफारिश की गई थी जिसमें एक स्थानीय जगह पर ट्रेनिंग और टूर्नामेंट के कार्यक्रम का हवाला दिया गया था।
दस्तावेज में एक ‘रेफरेंस नंबर’ भी था और कहा जा रहा है कि दूतावास से खिलाड़ियों को वीजा देने का अनुरोध किया गया था।
महासंघ के अधिकारियों ने कहा कि दस्तावेज में इस्तेमाल किए गए लेटरहेड में गलत जानकारी थीं जिसमें पुराना पता भी शामिल था और दूसरी गड़बड़ियां भी थीं।
महासंघ ने अपने जवाब में दूतावास से जाली दस्तावेजों के आधार पर किसी भी वीजा आवेदन को मंजूरी नहीं देने की अपील की और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।
डब्ल्यूएफआई ने कहा, ‘‘इसे देखते हुए अनुरोध है कि इस पत्र के आधार पर कोई वीजा प्रक्रिया शुरू नहीं की जाए और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। ’’
महासंघ ने यह भी साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए आधिकारिक भारतीय प्रविष्टि सिर्फ राष्ट्रीय संस्था के जरिए ही भेजी जाती है और भारतीय पहलवानों के लिए अगली कुश्ती प्रतियोगिता बुडापेस्ट में रैंकिंग सीरीज ‘पोलयाक इमरे, वारगा नानोस एवं कोज्मा इस्तवान मेमोरियल’ टूर्नामेंट जुलाई में होना है।
संजय सिंह ने कहा, ‘‘यह घटना शायद मानव तस्करी की कोशिश से जुड़ी हो सकती है जिसमें कुछ लोग कथित तौर पर महासंघ के नकली दस्तावेज का इस्तेमाल करके खिलाड़ी बनकर विदेश जाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों से मामले की आगे जांच करने की उम्मीद है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें पहले दूतावास से फोन आया था। हमने ईमेल से दस्तावेज मांगे थे। जांच करने पर पता चला कि यह सब नकली है। हमने तुरंत दूतावास को जवाब दिया। इसकी जांच होनी चाहिए।
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