FD Interest Rate, Repo Rate: यह सुनने में अजीब लगता है लेकिन सच है। मिडिल ईस्ट में गिरने वाले बम आपकी फिक्स्ड डिपॉज़िट की ब्याज दरों को भी हिला सकते हैं। तेल महंगा हुआ, खाद महंगी हुई, रोजमर्रा की चीज़ें महंगी हुईं और महंगाई बढ़ी। महंगाई बढ़ी तो RBI पर दबाव आएगा। RBI का एक फैसला बैंकों की FD दरें हिला देगा। तीन दिन की बैठक के बाद 8 अप्रैल को RBI की मौद्रिक नीति समिति का फैसला आएगा।
अभी रेपो रेट क्या है और आगे क्या होगा?
जनवरी 2025 से अब तक RBI कुल 125 बेसिस पॉइंट रेपो रेट घटा चुका है। दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 की बैठकों में रेट 5.25 फीसदी पर रोका गया। इसी से बैंकों को FD दरें स्थिर रखने या बढ़ाने का मौका मिला।
BankBazaar के CEO आदिल शेट्टी कहते हैं कि RBI इस बार भी रेट नहीं बदलेगा। महंगाई पर काम हो रहा है, लेकिन खाने-पीने की चीज़ों और वैश्विक अनिश्चितता के कारण खतरा बना हुआ है। Centricity WealthTech के विनायक मागोत्रा भी यही मानते हैं। उनका कहना है कि तेल और खाने की वजह से महंगाई आने वाले समय में बढ़ेगी, लेकिन यह सप्लाई साइड की समस्या है। जियोपॉलिटिकल हालात का पूरा असर अभी आंकड़ों में नहीं दिखा है, इसलिए अभी कोई बड़ा फैसला जल्दबाज़ी होगी।
FD की दरें सिर्फ रेपो रेट से नहीं चलतीं
यह बात कम लोग जानते हैं। बैंकों की FD दरें रेपो रेट के साथ-साथ कई और चीज़ों से तय होती हैं। बैंकिंग सिस्टम में नकदी कितनी है, 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड कितनी है, छोटी बचत योजनाओं की दरें क्या हैं और बैंकों को कर्ज़ देने के लिए जमा कितनी चाहिए।
अभी 10 साल के G-Sec की यील्ड 1 जनवरी के 6.58 फीसदी से बढ़कर 7.14 फीसदी हो चुकी है। महंगाई दिसंबर 2025 में 1.33 फीसदी थी जो फरवरी 2026 में 3.21 फीसदी हो गई। छोटी बचत योजनाएं भी अच्छा रिटर्न दे रही हैं। SCSS और SSA पर 8.2 फीसदी, NSC पर 7.7 फीसदी और MIS पर 7.4 फीसदी रिटर्न मिल रहा है। जब ये योजनाएं इतना दे रही हों तो बैंक FD दरें कम नहीं कर सकते।
शेट्टी कहते हैं कि जमा से ज़्यादा कर्ज़ बांटे जा रहे हैं, इसलिए बैंकों को FD पर अच्छी दरें देनी ही पड़ेंगी। नज़दीकी भविष्य में FD दरें स्थिर या ऊंची रहेंगी।
FD में पैसा लगाने वाले क्या करें?
InCred Money के CEO विजय कुप्पा और NPV Associates के प्रभाकर कुलकर्णी दोनों ने साफ सलाह दी है। अगर FD दरें घटें तो सतर्क निवेशक अलग-अलग समय पर FD बनाएं और पूंजी बचाने पर ध्यान दें। घबराकर पैसा निकालकर किसी अनरेगुलेटेड योजना में मत लगाएं। RBI की निगरानी वाले बैंक या NBFC ही सही हैं। अगर FD दरें बढ़ें तो लंबे समय के लिए FD लॉक करें। निवेश से पहले बैंक की साख और वित्तीय स्थिति ज़रूर जांचें।


