शेखपुरा के जिला अस्पताल में गुरुवार को मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एफसीएम (फेरिस कार्बॉक्सी मालटोज) थेरेपी का शुभारंभ किया गया। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने पटना स्थित ऊर्जा स्टेडियम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसका उद्घाटन किया। इस राज्य स्तरीय आयोजन में बिहार के सभी 38 जिलों की सहभागिता रही। शेखपुरा जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में अधीक्षक डॉ. अशोक सिंह, अस्पताल प्रबंधक धीरज कुमार, पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि कुंदन और राहुल सहित अन्य चिकित्सा पदाधिकारी व स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भी स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि मौजूद थे। सदर अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में त्वरित और प्रभावी सुधार सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि एफसीएम इंजेक्शन एक आधुनिक और प्रभावशाली उपचार पद्धति है, जिससे कम समय में हीमोग्लोबिन के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। कार्यक्रम के पहले चरण में प्रत्येक जिले में 20 चिन्हित गर्भवती महिलाओं को यह इंजेक्शन दिया गया। चिकित्सकीय आंकड़ों के अनुसार, इस इंजेक्शन की एक खुराक से औसतन 2.5 ग्राम तक हीमोग्लोबिन में वृद्धि देखी जा रही है, जो इसे एनीमिया प्रबंधन के लिए अत्यंत कारगर बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं में भी कमी आएगी। यह राज्य में मातृ मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित यह कार्यक्रम सुरक्षित मातृत्व और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक सशक्त कदम है, जो स्वस्थ मां, स्वस्थ शिशु के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। शेखपुरा के जिला अस्पताल में गुरुवार को मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एफसीएम (फेरिस कार्बॉक्सी मालटोज) थेरेपी का शुभारंभ किया गया। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने पटना स्थित ऊर्जा स्टेडियम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसका उद्घाटन किया। इस राज्य स्तरीय आयोजन में बिहार के सभी 38 जिलों की सहभागिता रही। शेखपुरा जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में अधीक्षक डॉ. अशोक सिंह, अस्पताल प्रबंधक धीरज कुमार, पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि कुंदन और राहुल सहित अन्य चिकित्सा पदाधिकारी व स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भी स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि मौजूद थे। सदर अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में त्वरित और प्रभावी सुधार सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि एफसीएम इंजेक्शन एक आधुनिक और प्रभावशाली उपचार पद्धति है, जिससे कम समय में हीमोग्लोबिन के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। कार्यक्रम के पहले चरण में प्रत्येक जिले में 20 चिन्हित गर्भवती महिलाओं को यह इंजेक्शन दिया गया। चिकित्सकीय आंकड़ों के अनुसार, इस इंजेक्शन की एक खुराक से औसतन 2.5 ग्राम तक हीमोग्लोबिन में वृद्धि देखी जा रही है, जो इसे एनीमिया प्रबंधन के लिए अत्यंत कारगर बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं में भी कमी आएगी। यह राज्य में मातृ मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित यह कार्यक्रम सुरक्षित मातृत्व और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक सशक्त कदम है, जो स्वस्थ मां, स्वस्थ शिशु के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।


