Fast track Cancer Vaccine : चीन में ‘फास्ट ट्रैक’ कैंसर वैक्सीन हो रही तैयार, इन दो कैंसर को खत्म करने का दावा

Fast track Cancer Vaccine : चीन में ‘फास्ट ट्रैक’ कैंसर वैक्सीन हो रही तैयार, इन दो कैंसर को खत्म करने का दावा

Fast track Cancer Vaccine : कैंसर को मात देने के लिए वैक्सीन बेहतर विकल्प हो सकता है। इसलिए, कई देश कैंसर का टीका तैयार करने में जुटे हैं। कैंसर वैक्सीन को लेकर लेटेस्ट अपडेट ये है कि चीन में ली का-शिंग के निवेश वाले सीके ग्रुप (CK Group) की ओर से ‘फास्ट ट्रैक’ कैंसर वैक्सीन की योजना है। इसके लिए तैयारी चल रही है।

चीन में ‘फास्ट ट्रैक’ कैंसर वैक्सीन

साउथ चाइन मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सीके लाइफ साइंसेज (CK Life Sciences), बीजिंग द्वारा शुरुआती चरण के दवा बनाने के विकास में तेजी लाने के कदमों का लाभ उठा रही है। वो अपने कैंसर वैक्सीन को मुख्य भूमि चीन में “फास्ट ट्रैक” चैनल के माध्यम से लाने की योजना बना रही है।

सीके लाइफ साइंसेज के वाइस प्रेसीडेंट और मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. मेल्विन तोह कियान-मेंग ने एक हालिया इंटरवूय में कहा, “हम अगले साल तक ‘इन्वेस्टिगेटर-इनिशियेटेड ट्रायल्स’ (IITs) शुरू करने की योजना बना रहे हैं।”

कैंसर को लक्षित करने वाले प्रीक्लिनिकल वैक्सीन प्रोजेक्ट

बता दें, सीके लाइफ साइंसेज ने 10 मार्च को हांगकांग में अपनी सहायक कंपनी सिक्वेंसियो थेराप्यूटिक्स (Sequencio Therapeutics) की स्थापना की, ताकि कैंसर वैक्सीन पाइपलाइन को आगे बढ़ाया जा सके। सिक्वेंसियो के पास विभिन्न कैंसर को लक्षित करने वाले लगभग 20 प्रीक्लिनिकल वैक्सीन प्रोजेक्ट हैं।

ब्रेस्ट और कोलोरेक्टल कैंसर के लिए वैक्सीन

ट्यूमर के विकास को रोकने वाली दवाओं के विपरीत, सिक्वेंसियो की वैक्सीन मरीज की इम्यून सिस्टम को मौजूदा कैंसर से लड़ने या उसे दोबारा होने से रोकने के लिए उत्तेजित करती है। यह मुख्य रूप से ब्रेस्ट और कोलोरेक्टल कैंसर जैसे को रोकने में कारगर होगी।

कब आएगी कैंसर की वैक्सीन?

अगर पाइपलाइन के अनुसार कार्य होता है तो 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक क्लिनिकल परीक्षणों में प्रवेश करने की उम्मीद है। कंपनी का दावा है कि किसी भी दवा या वैक्सीन को बाजार में लगाने का ये सबसे तेज तरीका है।

चीन में IITs का महत्व और रणनीति

डॉ. तोह के अनुसार, चीन में IITs दवा निर्माताओं को पारंपरिक नियामक प्रक्रिया की तुलना में तेजी से मानव क्लिनिकल डेटा उत्पन्न करने की अनुमति देते हैं। पारंपरिक प्रक्रिया में आमतौर पर एक मरीज को खुराक देने से पहले डेढ़ से दो साल का समय लग जाता है।

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