अंबाला कैंट एसडीएम विनेश व किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। आखिर में कैंट एसडीएम ने आश्वासन दिया कि वह शुक्रवार को एक बार रिंग रोड के पास मौके का मुआयना करेंगे। इस आश्वासन के बाद किसान रात 9 बजे हाईवे किनारे से उठने के बाद दोबार सपेहड़ा में धरना स्थल पर जाकर बैठ गए। प्रशासन ने किसानों के धरने पर बैठने से पहले ही रिंग रोड का शुरू हुआ काम रूकवा दिया। बता दें कि अंबाला में किसानों और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी। निर्माणाधीन रिंग रोड व अंबाला-शामली हाईवे से से खेतों में जाने का रास्ता देने की मांग को लेकर किसान 10 दिन से धरने पर बैठे थे। पुलिस ने उनके तंबू उखाड़ दिए थे। साथ ही कई किसानों को हिरासत में ले लिया था। वहीं गुस्से में किसान अंबाला- जगाधरी नेशनल हाईवे जाने करने पहुंच गए। फिलहाल हाईवे पर भी भारी पुलिस बल तैनात है। वहीं, पुलिस ने रिंग रोड के रास्ते से किसानों द्वारा डाली गई चारपाइयां भी उठा ली। धरनास्थल खाली कराकर दोबारा काम चालू करा दिया। खेतों तक जाने का रास्ता नहीं बचेगा उधर, किसानों का कहना है कि NHAI से बात चल रही थी, लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकल सका। यह रिंग रोड बनने से उनके खेतों तक जाने का रास्ता नहीं बचेगा। बरसाती पानी की निकासी में भी दिक्कत होगी, जिससे फसलों नुकसान होगा। मशीनों की घेराबंदी कर रहे थे किसान बता दें कि गुरुवार को 5 गांव के किसान एनएचएआई से कोई आश्वासन ने मिलने के बाद मशीनों की घेराबंदी कर रहे थे। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई। पुलिस और किसानों में झड़प शुरू हो गई। पुलिस ने किसानों को खदेड़ते हुए बसों में बैठाना शुरू कर दिया था। फिलहाल तनावपूर्ण बनी स्थिति फिलहाल, स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरुनाम सिंह चढ़ूनी मौके पर पहुंचे और उनकी अंबाला कैंट डीएसपी और एसडीएम के साथ शाम साढ़े 7 बजे तक भी बातचीत भी हुई थी, लेकिन चढूनी की बैठक बेनतीजा रही। पुलिस किसानों को नेशनल हाइवे से पीछे हटने को मनाने की कोशिश कर रही है। हिरासत में लिए गए किसानों को छोड़ दिया गया था। जानिए….क्या है पूरा विवाद और झड़प की स्थिति क्यों हुई 5 हाईवे को जोड़ने को बन रहा रिंग रोड: अंबाला में 5 नेशनल हाईवे को जोड़ने के लिए रिंग रोड बनाया जा रहा है। इसका आधे से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। रिंग रोड बनने के बाद अंबाला से चंडीगढ़ हाईवे (NH-152), अंबाला से रुड़की हाईवे (NH-344), अंबाला-जगाधरी (NH-444A), दिल्ली-अमृतसर (NH-44) और अंबाला-हिसार हाईवे (NH-65) एक दूसरे से जुड़ जाएंगे। रास्ते के लिए 10 दिन से धरना: गांव सपेड़ा व आसपास के 5 गांव के लोग रिंग रोड से खेतों में जाने का रास्ता मांग रहे हैं। इसी को लेकर गांव सपेड़ा के पास 10 दिन पहले धरना शुरू हुआ था। इस दौरान एनएचएआई के अफसरों से बात भी हुई। हालांकि कोई हल नहीं निकला। मशीनों की घेराबंदी करने लगे किसान: गुरुवार दोपहर किसान कोई आश्वासन न मिलने के बाद एनएचएआई की मशीनों की घेराबंदी करने लगे। इसके बाद अधिकारियों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। कई थानों की पुलिस ने धरनास्थल से किसानों को खदेड़ना शुरू कर दिया। उनके टैंट भी उखाड़ दिए। गुस्से में किसान रिंग रोड के पास ही बैठ गए: पुलिस की कार्रवाई से गुस्साएं किसानों ने रिंग रोड के पास ही बैठकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने कुछ किसानों को हिरासत में ले लिया। आक्रोशित किसान अंबाला-जगाधरी नेशनल हाईवे की ओर कूच करने लगे। इसके बाद धरनास्थल पर गुरनाम चढूनी भी पहुंच गए। हल न होता देख किसानों ने मशीनें घेरी कई दिनों से चल रहे धरने से कोई हल न होता देख गुरुवार को किसानों ने रिंग रोड निर्माण में लगी मशीनों का घेराव शुरू कर दिया। मामला बिगड़ता देख एनएचएआई ने अंबा, महेशनगर और साहा थानों से पुलिस बुला ली गई। इसके बाद पुलिस किसानों को खदेड़ना शुरू कर दिया। कुछ किसानों को बस में बैठा लिया। जिससे मामला और बिगड़ गया। इसके बाद किसान नेशनल हाईवे की ओर कूच करने लगे। NHAI ने काम शुरू करवाया किसानों का धरना उखाड़ने के बाद NHAI ने यहां तेजी से काम शुरू करवा दिया। जनवरी के दूसरे सप्ताह में भी किसानों ने रिंग रोड का काम रुकवा दिया था। अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे थे कि धरना खत्म हो जाए। रिंग रोड को समय पर पूरा करने का दबाव है। गुरनाम चढ़ूनी मौके पर पहुंचे शाम करीब 5 बजे भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी मौके पर पहुंच गए। चढ़ूनी ने कहा कि किसानों के साथ धक्का नहीं होने देंगे। इससे पहले उन्होंने मंगलवार को महापंचायत की घोषणा की थी। सोशल मीडिया पर भी लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पंचायत में पहुंचने की अपील की।


