आलू, टमाटर, बैंगन और मिर्च की फसलों में नमी बनाए रखें किसान

गढ़वा | कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि ला नीना के कारण खरीफ में जिस तरह से अति वृष्टि हुई। उसी तरह से रबी में कड़ाके की सर्दी पड़ने वाली है। उत्तरी ध्रुव पर पोलर वोर्टेक्स सक्रिय होने के कारण वहां की ठंडी हवाएं यूरोप व मध्य एशिया होते हुए भारत तक पहुंच रही है। जिससे सामान्य से अधिक ठंड पड़ रही है। मौसम पूर्वानुमान अनुसार इस सप्ताह दिन का अधिकतम तापमान 25- 26 और रात का न्यूनतम तापमान 8-10 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इस सप्ताह के मध्य में कश्मीर व हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से बर्फबारी के असर नजर आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में अगले सप्ताह पारा और नीचे जाएगा और शीतलहरी चलेगी। शीतलहरी के दिनों में आधी रात के समय आसमान साफ रहने और हवा के धीमे होने पर पाला पड़ने का संयोग बनता है, जो गेहूं को छोड़कर सभी रबी फसलों को नुकसान पहुंचता है। ऐसी स्थिति में सभी फसलों में नमी की कमी न होने दें। सब्जी नर्सरी के पौधों को रात में पॉलिथीन से ढकें। वहीं दिन में हटा कर रखें। पाला पड़ने की स्थिति होने पर झुलसा से प्रभावित होने वाली फसलों जैसे आलू, टमाटर, बैंगन, मिर्च, सरसों, चना के खेतों के उत्तर- पश्चिम मेंड़ पर आधी रात में अलाव जलाना अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होता है। झुलसा रोग का आक्रमण होने पर अनुशंसित फफूंदनाशक जैसे रिडोमिल एम जेड 78 का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर एक सप्ताह के अंतराल पर दो छिड़काव करें। रबी दलहन- तेलहन की बुवाई का समय समाप्त हो चुका है। अतः इन फसलों की बुवाई अति शीघ्र समाप्त करें। देर से बोई जाने वाली गेहूं की बुवाई भी 15 दिसंबर तक समाप्त कर लें! अब गेहूं में एचआई 1563, एचआई 1544, डीबीडब्ल्यू 107, एचडी 3118, एमएसीएस 6222, डीबीडब्ल्यू 314, डीबीडब्ल्यू 373 जैसे प्रभेदों का चयन करें। बुवाई के समय यूरिया 1.5 किलोग्राम, डीएपी 2 किलोग्राम, एमओपी (पोटाश खाद) 1.5 किलोग्राम प्रति कट्ठा की दर से उपयोग करें। साथ ही खरपतवार प्रबंधन हेतु पेंडीमेथिलीन 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर बुवाई के दूसरे तीसरे दिन छिड़काव करें। गढ़वा | कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि ला नीना के कारण खरीफ में जिस तरह से अति वृष्टि हुई। उसी तरह से रबी में कड़ाके की सर्दी पड़ने वाली है। उत्तरी ध्रुव पर पोलर वोर्टेक्स सक्रिय होने के कारण वहां की ठंडी हवाएं यूरोप व मध्य एशिया होते हुए भारत तक पहुंच रही है। जिससे सामान्य से अधिक ठंड पड़ रही है। मौसम पूर्वानुमान अनुसार इस सप्ताह दिन का अधिकतम तापमान 25- 26 और रात का न्यूनतम तापमान 8-10 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इस सप्ताह के मध्य में कश्मीर व हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से बर्फबारी के असर नजर आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में अगले सप्ताह पारा और नीचे जाएगा और शीतलहरी चलेगी। शीतलहरी के दिनों में आधी रात के समय आसमान साफ रहने और हवा के धीमे होने पर पाला पड़ने का संयोग बनता है, जो गेहूं को छोड़कर सभी रबी फसलों को नुकसान पहुंचता है। ऐसी स्थिति में सभी फसलों में नमी की कमी न होने दें। सब्जी नर्सरी के पौधों को रात में पॉलिथीन से ढकें। वहीं दिन में हटा कर रखें। पाला पड़ने की स्थिति होने पर झुलसा से प्रभावित होने वाली फसलों जैसे आलू, टमाटर, बैंगन, मिर्च, सरसों, चना के खेतों के उत्तर- पश्चिम मेंड़ पर आधी रात में अलाव जलाना अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होता है। झुलसा रोग का आक्रमण होने पर अनुशंसित फफूंदनाशक जैसे रिडोमिल एम जेड 78 का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर एक सप्ताह के अंतराल पर दो छिड़काव करें। रबी दलहन- तेलहन की बुवाई का समय समाप्त हो चुका है। अतः इन फसलों की बुवाई अति शीघ्र समाप्त करें। देर से बोई जाने वाली गेहूं की बुवाई भी 15 दिसंबर तक समाप्त कर लें! अब गेहूं में एचआई 1563, एचआई 1544, डीबीडब्ल्यू 107, एचडी 3118, एमएसीएस 6222, डीबीडब्ल्यू 314, डीबीडब्ल्यू 373 जैसे प्रभेदों का चयन करें। बुवाई के समय यूरिया 1.5 किलोग्राम, डीएपी 2 किलोग्राम, एमओपी (पोटाश खाद) 1.5 किलोग्राम प्रति कट्ठा की दर से उपयोग करें। साथ ही खरपतवार प्रबंधन हेतु पेंडीमेथिलीन 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर बुवाई के दूसरे तीसरे दिन छिड़काव करें।  

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