खगड़िया में बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि से किसानों को नुकसान हुआ है। परबत्ता, गोगरी, बेलदौर, चौथम और अलौली प्रखंडों में अचानक बदले मौसम के कारण खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं। गेहूं, मक्का, सरसों और केले की फसल को विशेष रूप से क्षति पहुंची है। खेतों में पानी भर जाने से किसान परेशान यह आपदा ऐसे समय आई है जब फसल कटाई के करीब थी। तेज आंधी और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलें जमीन पर गिर गईं। कई स्थानों पर गेहूं की बालियां झड़ गईं, मक्का की फसल बिछ गई और सरसों के पौधे पूरी तरह नष्ट हो गए। केले के बागानों को भी भारी क्षति पहुंची है। खेतों में पानी भर जाने से स्थिति और गंभीर हो गई है। किसान नेता धीरेन्द्र सिंह टुडू ने इस प्राकृतिक आपदा पर सरकार और जिला प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हर साल मौसम की मार झेलने वाले किसानों को तत्काल राहत की आवश्यकता है। टुडू ने जिलाधिकारी से जल्द से जल्द क्षति का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। आजीविका पूरी तरह फसल पर निर्भर थी परबत्ता प्रखंड के किसान धीरज कुमार ने बताया कि उनकी लगभग तीन एकड़ में लगी मक्का की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। उन्होंने कहा, “तेज आंधी और ओलावृष्टि ने पूरी फसल को खेत में ही गिरा दिया। हमारी सारी मेहनत बेकार हो गई।” एक अन्य किसान मुरारी कुमार ने जानकारी दी कि उनकी तीन बीघा में लगी मक्का की फसल तेज हवा के कारण पूरी तरह बिछ गई है। उन्होंने बताया कि उनकी आजीविका पूरी तरह से इसी फसल पर निर्भर थी। लेकिन अब किसान पूरी तरह टूट चुका है। सरकार को जल्द हमारी सुध लेनी चाहिए।”
स्थानीय किसानों का कहना है कि इस बार की आपदा ने उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। कई किसानों ने खेती के लिए कर्ज लिया था, लेकिन फसल बर्बाद होने के बाद अब उनके सामने कर्ज चुकाने की भी समस्या खड़ी हो गई है।
प्रशासन से मुआवजा की मांग
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द फसल क्षति का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए ठोस योजना बनाने की भी जरूरत बताई है।
फिलहाल, जिले के विभिन्न इलाकों में तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है—कहीं खेतों में गिरी फसलें, तो कहीं किसानों की आंखों में बेबसी के आंसू। अब सबकी निगाहें सरकार और प्रशासन की राहत पर टिकी हैं। खगड़िया में बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि से किसानों को नुकसान हुआ है। परबत्ता, गोगरी, बेलदौर, चौथम और अलौली प्रखंडों में अचानक बदले मौसम के कारण खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं। गेहूं, मक्का, सरसों और केले की फसल को विशेष रूप से क्षति पहुंची है। खेतों में पानी भर जाने से किसान परेशान यह आपदा ऐसे समय आई है जब फसल कटाई के करीब थी। तेज आंधी और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलें जमीन पर गिर गईं। कई स्थानों पर गेहूं की बालियां झड़ गईं, मक्का की फसल बिछ गई और सरसों के पौधे पूरी तरह नष्ट हो गए। केले के बागानों को भी भारी क्षति पहुंची है। खेतों में पानी भर जाने से स्थिति और गंभीर हो गई है। किसान नेता धीरेन्द्र सिंह टुडू ने इस प्राकृतिक आपदा पर सरकार और जिला प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हर साल मौसम की मार झेलने वाले किसानों को तत्काल राहत की आवश्यकता है। टुडू ने जिलाधिकारी से जल्द से जल्द क्षति का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। आजीविका पूरी तरह फसल पर निर्भर थी परबत्ता प्रखंड के किसान धीरज कुमार ने बताया कि उनकी लगभग तीन एकड़ में लगी मक्का की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। उन्होंने कहा, “तेज आंधी और ओलावृष्टि ने पूरी फसल को खेत में ही गिरा दिया। हमारी सारी मेहनत बेकार हो गई।” एक अन्य किसान मुरारी कुमार ने जानकारी दी कि उनकी तीन बीघा में लगी मक्का की फसल तेज हवा के कारण पूरी तरह बिछ गई है। उन्होंने बताया कि उनकी आजीविका पूरी तरह से इसी फसल पर निर्भर थी। लेकिन अब किसान पूरी तरह टूट चुका है। सरकार को जल्द हमारी सुध लेनी चाहिए।”
स्थानीय किसानों का कहना है कि इस बार की आपदा ने उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। कई किसानों ने खेती के लिए कर्ज लिया था, लेकिन फसल बर्बाद होने के बाद अब उनके सामने कर्ज चुकाने की भी समस्या खड़ी हो गई है।
प्रशासन से मुआवजा की मांग
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द फसल क्षति का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए ठोस योजना बनाने की भी जरूरत बताई है।
फिलहाल, जिले के विभिन्न इलाकों में तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है—कहीं खेतों में गिरी फसलें, तो कहीं किसानों की आंखों में बेबसी के आंसू। अब सबकी निगाहें सरकार और प्रशासन की राहत पर टिकी हैं।


