नालंदा जिले के नगरनौसा प्रखंड के रहने वाले किसान राजीव हर महीने 60 से 70 हजार रुपए की कमाई कर रहे हैं। राजीव बताते हैं कि पहले वे पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन अब उन्होंने समेकित कृषि प्रणाली यानी इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम के जरिए हर महीने बेहतर कमाई कर रहे हैं। वे बताते हैं कि पहले वे धान और गेहूं की खेती करते थे, लेकिन अब पपीता की बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं। साथ में मछली पालन भी कर रहे हैं। फजिलपुर गांव के रहने वाले राजीव कुमार बताते हैं कि पहले मैं सामान्य किसानों की तरह पारंपरिक फसलों की खेती करता था। इस तरह की खेती में मेहनत ज्यादा और आमदनी कम होती थी। मैं पारंपरिक खेती से होने वाली कमाई से संतुष्ट नहीं था। वे बताते हैं कि कुछ नया करने का जुनून था, लेकिन जोखिम लेने में हिचक भी थी। बावजूद इसके उन्होंने करीब 5 साल पहले बड़ा फैसला लिया और खेती के तरीके में बदलाव की राह चुनी। ‘किसानी कारोबार है, कमाई के लिए जोखिम उठाना जरूरी’ राजीव का मानना है कि कृषि भी एक व्यवसाय है और व्यवसाय में कमाई के साथ जोखिम उठाना भी जरूरी है। राजीव ने शुरुआत 5 एकड़ में प्याज की खेती से की। हालांकि इसमें लागत और मेहनत दोनों ही ज्यादा थी। मौसम की मार से कई बार नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कृषि विशेषज्ञों से सलाह ली और पपीता की खेती की ओर रुख किया। राजीव बताते हैं कि पहले साल न ज्यादा कमाई हुई और न ज्यादा नुकसान। दूसरे साल बीज खराब निकलने से घाटा हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। तीसरे साल ऑनलाइन बीज मंगाए और फसल बेहतर हुई। यहीं से उनकी किस्मत ने करवट ली। एक एकड़ से अधिक एरिया में पपीता की खेती कर रहे राजीव फिलहाल राजीव एक एकड़ से अधिक क्षेत्र में पपीता की खेती कर रहे हैं। सिंचाई के लिए ड्रिप एरिगेशन प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं, जिससे पानी की काफी बचत हो रही है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है। पपीता की खेती एक साल में तैयार हो जाती है, इसलिए वे हर साल नए खेत की तैयारी भी करते हैं। पपीता की खेती के साथ-साथ राजीव ने समेकित कृषि प्रणाली अपनाई है। राजीव के पास करीब डेढ़ एकड़ का तालाब है, जिसमें वे मछली पालन कर रहे हैं। तालाब के मेढ़ पर भी पपीते के पौधे लगाए गए हैं, जिससे जमीन का पूरा उपयोग हो रहा है। इस दोहरे मॉडल से उनकी आमदनी में लगातार इजाफा हो रहा है। पपीता प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना, अन्य लोगों को भी देंगे रोजगार राजीव कुमार बताते हैं कि पपीता की खेती और मछली पालन से उन्हें सालाना करीब 7 से 8 लाख रुपए की आमदनी हो रही है। यही नहीं, आगे वे पपीता प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की भी योजना बना रहे हैं, ताकि आसपास के लोगों को रोजगार से जोड़ा जा सके। राजीव यहीं रुकने वाले नहीं हैं। वे जल्द ही ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करने की योजना पर काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि खेती को एक सफल एग्रीकल्चर बिजनेस के रूप में विकसित किया जाए और दूसरे किसानों के लिए भी मिसाल पेश की जाए। ——————– इन प्रगतिशील किसान से और जानें 8051897808 ——————— ये खबर दूसरों से भी शेयर करें ——————— आप भी किसान हैं और कोई अनोखा नवाचार किया है तो पूरी जानकारी, फोटो-वीडियो अपने नाम-पते के साथ हमें 8770590566 पर वॉट्सऐप करें। ध्यान रहे, आपका किया काम किसी भी मीडिया या सोशल मीडिया में जारी न हुआ हो। नालंदा जिले के नगरनौसा प्रखंड के रहने वाले किसान राजीव हर महीने 60 से 70 हजार रुपए की कमाई कर रहे हैं। राजीव बताते हैं कि पहले वे पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन अब उन्होंने समेकित कृषि प्रणाली यानी इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम के जरिए हर महीने बेहतर कमाई कर रहे हैं। वे बताते हैं कि पहले वे धान और गेहूं की खेती करते थे, लेकिन अब पपीता की बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं। साथ में मछली पालन भी कर रहे हैं। फजिलपुर गांव के रहने वाले राजीव कुमार बताते हैं कि पहले मैं सामान्य किसानों की तरह पारंपरिक फसलों की खेती करता था। इस तरह की खेती में मेहनत ज्यादा और आमदनी कम होती थी। मैं पारंपरिक खेती से होने वाली कमाई से संतुष्ट नहीं था। वे बताते हैं कि कुछ नया करने का जुनून था, लेकिन जोखिम लेने में हिचक भी थी। बावजूद इसके उन्होंने करीब 5 साल पहले बड़ा फैसला लिया और खेती के तरीके में बदलाव की राह चुनी। ‘किसानी कारोबार है, कमाई के लिए जोखिम उठाना जरूरी’ राजीव का मानना है कि कृषि भी एक व्यवसाय है और व्यवसाय में कमाई के साथ जोखिम उठाना भी जरूरी है। राजीव ने शुरुआत 5 एकड़ में प्याज की खेती से की। हालांकि इसमें लागत और मेहनत दोनों ही ज्यादा थी। मौसम की मार से कई बार नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कृषि विशेषज्ञों से सलाह ली और पपीता की खेती की ओर रुख किया। राजीव बताते हैं कि पहले साल न ज्यादा कमाई हुई और न ज्यादा नुकसान। दूसरे साल बीज खराब निकलने से घाटा हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। तीसरे साल ऑनलाइन बीज मंगाए और फसल बेहतर हुई। यहीं से उनकी किस्मत ने करवट ली। एक एकड़ से अधिक एरिया में पपीता की खेती कर रहे राजीव फिलहाल राजीव एक एकड़ से अधिक क्षेत्र में पपीता की खेती कर रहे हैं। सिंचाई के लिए ड्रिप एरिगेशन प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं, जिससे पानी की काफी बचत हो रही है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है। पपीता की खेती एक साल में तैयार हो जाती है, इसलिए वे हर साल नए खेत की तैयारी भी करते हैं। पपीता की खेती के साथ-साथ राजीव ने समेकित कृषि प्रणाली अपनाई है। राजीव के पास करीब डेढ़ एकड़ का तालाब है, जिसमें वे मछली पालन कर रहे हैं। तालाब के मेढ़ पर भी पपीते के पौधे लगाए गए हैं, जिससे जमीन का पूरा उपयोग हो रहा है। इस दोहरे मॉडल से उनकी आमदनी में लगातार इजाफा हो रहा है। पपीता प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना, अन्य लोगों को भी देंगे रोजगार राजीव कुमार बताते हैं कि पपीता की खेती और मछली पालन से उन्हें सालाना करीब 7 से 8 लाख रुपए की आमदनी हो रही है। यही नहीं, आगे वे पपीता प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की भी योजना बना रहे हैं, ताकि आसपास के लोगों को रोजगार से जोड़ा जा सके। राजीव यहीं रुकने वाले नहीं हैं। वे जल्द ही ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करने की योजना पर काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि खेती को एक सफल एग्रीकल्चर बिजनेस के रूप में विकसित किया जाए और दूसरे किसानों के लिए भी मिसाल पेश की जाए। ——————– इन प्रगतिशील किसान से और जानें 8051897808 ——————— ये खबर दूसरों से भी शेयर करें ——————— आप भी किसान हैं और कोई अनोखा नवाचार किया है तो पूरी जानकारी, फोटो-वीडियो अपने नाम-पते के साथ हमें 8770590566 पर वॉट्सऐप करें। ध्यान रहे, आपका किया काम किसी भी मीडिया या सोशल मीडिया में जारी न हुआ हो।


