हनुमानगढ़ जिले में प्रस्तावित एनएच-954 के भूमि अधिग्रहण को लेकर चक 2 एसटीजी के किसानों ने आपत्ति व्यक्त की है। किसानों और ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपकर हाईवे के प्रस्तावित मार्ग में बदलाव की मांग की। किसानों का तर्क है कि वर्तमान योजना से छोटे किसानों की आजीविका पर संकट आ जाएगा। किसानों ने बताया कि एनएच-954 के किलोमीटर 0 से 68.194 तक भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है। यदि लिंक रोड से जमीन अधिग्रहित की जाती है, तो उनके खेतों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता भी समाप्त हो जाएगा। अधिकांश किसानों के पास केवल 2 से 3 बीघा तक ही जमीन है, जिस पर उनकी पूरी आजीविका निर्भर करती है। उनका कहना है कि सड़क के साथ जमीन जाने से वे भूमिहीन हो जाएंगे। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रस्तावित मार्ग के दायरे में किसानों की ढाणियां और सिंचाई के कुएं भी आ रहे हैं। अधिग्रहण की स्थिति में ये सभी संरचनाएं नष्ट हो जाएंगी, जिससे किसानों को आर्थिक और सामाजिक क्षति होगी। किसानों ने बताया कि यह जमीन उन्हें वर्ष 1962 में आवंटित की गई थी और वर्ष 1977 में उन्हें खातेदारी अधिकार मिले थे, जिसके बाद से वे लगातार इस पर खेती कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में मक्कासर से गोलूवाला तक पहले से एक पक्की सड़क मौजूद है, जिसका उपयोग किया जा रहा है। इसके बावजूद नई सड़क को खेतों और ढाणियों के बीच से निकालना अनुचित है। प्रस्तावित नक्शे के अनुसार, हाईवे मक्कासर की श्मशान भूमि और आबादी क्षेत्र के पास से भी गुजर रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों को भी असुविधा होगी। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए और मार्ग में आवश्यक बदलाव किए जाएं, ताकि उनकी जमीन और आजीविका सुरक्षित रह सके। इस दौरान कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मनीष मक्कासर, उग्रसेन सिहाग, रविन सिहाग, सीताराम, अमरजीत सहारण, बलराम गोदारा, किशन ढाका, हेतराम, रामचंद्र, रायसिंह और धनराज सहित कई किसान मौजूद थे।


