किसान की बेटी अनुपा ने किया कमाल:बिहार मैट्रिक में तीसरा स्थान, 489 अंक हासिल कर जिले में टॉप, इंजीनियर बनने का सपना

किसान की बेटी अनुपा ने किया कमाल:बिहार मैट्रिक में तीसरा स्थान, 489 अंक हासिल कर जिले में टॉप, इंजीनियर बनने का सपना

बक्सर में राजपुर प्रखंड के खरहना गांव की अनुपा कुमारी ने बिहार विद्यालय माध्यमिक परीक्षा (मैट्रिक) में राज्य भर में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। किसान नित्यानंद यादव और गृहणी निर्मला देवी की पुत्री अनुपा ने 489 अंक (97.6%) हासिल किए। वह अपने जिले में प्रथम स्थान पर रही हैं। अनुपा उच्च माध्यमिक विद्यालय खरहना की छात्रा हैं और अपने चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहीं अनुपा ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनके माता-पिता ने आर्थिक रूप से सक्षम न होते हुए भी उनकी शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। इंजीनियर बनना चाहती हैं अनुपा
अपनी सफलता का श्रेय अनुपा ने अपने माता-पिता, दादा भरत सिंह और गुरुजनों को दिया है। उन्होंने बताया कि परिवार के मार्गदर्शन और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनुपा के अनुसार, नियमित पढ़ाई, अनुशासन और आत्मविश्वास ही उनकी सफलता का मूल मंत्र रहा है। भविष्य की योजनाओं के बारे में अनुपा ने बताया कि वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहती हैं। उनका सपना देश के प्रतिष्ठित संस्थान से तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर एक सफल इंजीनियर बनना है। उनका लक्ष्य अपने ज्ञान और कौशल के माध्यम से समाज और देश के विकास में योगदान देना है। पिता बोले- प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती
अनुपा की बड़ी बहन स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं, जबकि एक भाई आठवीं कक्षा में और दूसरा प्रथम वर्ग में पढ़ रहा है। अनुपा की इस उपलब्धि से उनके भाई-बहनों में भी उत्साह है और वे भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। उनकी सफलता पर पूरे गांव में खुशी का माहौल है और ग्रामीण तथा शुभचिंतक उनके घर बधाई देने पहुंच रहे हैं। हर कोई इस होनहार बेटी की तारीफ कर रहा है। स्थानीय निवासी निवासी विकास पाण्डेय ने कहा कि अनुपा ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। उन्होंने कहा कि एक साधारण परिवार से निकलकर इतनी बड़ी सफलता हासिल करना पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है। अनुपा की यह उपलब्धि उन तमाम छात्रों के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी बाधा सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकती। बक्सर में राजपुर प्रखंड के खरहना गांव की अनुपा कुमारी ने बिहार विद्यालय माध्यमिक परीक्षा (मैट्रिक) में राज्य भर में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। किसान नित्यानंद यादव और गृहणी निर्मला देवी की पुत्री अनुपा ने 489 अंक (97.6%) हासिल किए। वह अपने जिले में प्रथम स्थान पर रही हैं। अनुपा उच्च माध्यमिक विद्यालय खरहना की छात्रा हैं और अपने चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहीं अनुपा ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनके माता-पिता ने आर्थिक रूप से सक्षम न होते हुए भी उनकी शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। इंजीनियर बनना चाहती हैं अनुपा
अपनी सफलता का श्रेय अनुपा ने अपने माता-पिता, दादा भरत सिंह और गुरुजनों को दिया है। उन्होंने बताया कि परिवार के मार्गदर्शन और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनुपा के अनुसार, नियमित पढ़ाई, अनुशासन और आत्मविश्वास ही उनकी सफलता का मूल मंत्र रहा है। भविष्य की योजनाओं के बारे में अनुपा ने बताया कि वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहती हैं। उनका सपना देश के प्रतिष्ठित संस्थान से तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर एक सफल इंजीनियर बनना है। उनका लक्ष्य अपने ज्ञान और कौशल के माध्यम से समाज और देश के विकास में योगदान देना है। पिता बोले- प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती
अनुपा की बड़ी बहन स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं, जबकि एक भाई आठवीं कक्षा में और दूसरा प्रथम वर्ग में पढ़ रहा है। अनुपा की इस उपलब्धि से उनके भाई-बहनों में भी उत्साह है और वे भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। उनकी सफलता पर पूरे गांव में खुशी का माहौल है और ग्रामीण तथा शुभचिंतक उनके घर बधाई देने पहुंच रहे हैं। हर कोई इस होनहार बेटी की तारीफ कर रहा है। स्थानीय निवासी निवासी विकास पाण्डेय ने कहा कि अनुपा ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। उन्होंने कहा कि एक साधारण परिवार से निकलकर इतनी बड़ी सफलता हासिल करना पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है। अनुपा की यह उपलब्धि उन तमाम छात्रों के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी बाधा सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकती।  

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