मशरूम की खेती के लिए किसानों में रुचि नहीं:वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद भी मशरूम हट का निर्माण अधूरा, विभाग करेगा जागरूक

मशरूम की खेती के लिए किसानों में रुचि नहीं:वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद भी मशरूम हट का निर्माण अधूरा, विभाग करेगा जागरूक

नालंदा जिले में सरकारी योजनाओं और अनुदान के बावजूद मशरूम की खेती को लेकर किसानों का उत्साह कम नजर आ रहा है। बांस की झोपड़ी (मशरूम हट) में खेती की इस अभिनव योजना में अपेक्षित रुचि न मिलने से विभाग चिंतित है। जिले के 15 किसानों को खेती शुरू करने का अवसर दिया गया था। दो माह पहले आवेदन प्रक्रिया पूरा होने और चयनित किसानों को वर्क ऑर्डर (स्वीकृति पत्र) जारी करने के बावजूद अब तक केवल दो किसानों ने ही झोपड़ी का निर्माण पूरा किया है। शेष 13 किसान अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं कर पाए हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार प्रति यूनिट 89 हजार 750 रुपए का अनुदान दे रही है। कुल एक लाख 79 हजार 500 रुपए की लागत में से 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है। सालाना ढाई लाख तक की कमाई का अवसर उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगर फसल की उचित देखभाल और अनुकूल मौसम मिले तो झोपड़ी में मशरूम की खेती से किसान एक वर्ष में ढाई लाख रुपए तक का मुनाफा कमा सकते हैं। इस योजना के तहत 50×30 फीट यानी 1500 वर्ग फीट जमीन पर झोपड़ी का निर्माण किया जाता है, जिसकी ऊंचाई 12 फीट रखी जाती है। झोपड़ी के भीतर मशरूम किट रखने के लिए विशेष रैक बनाए जाते हैं। बटन मशरूम की खेती केवल सर्दियों में संभव है, लेकिन ऑयस्टर मशरूम की खेती साल भर की जा सकती है। किट वितरण की शुरुआत इस बार उद्यान विभाग ने ऑयस्टर के साथ-साथ बटन मशरूम किट भी किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। जिले में 18,000 बटन मशरूम किट बांटने का लक्ष्य रखा गया है। 90 रुपए मूल्य की एक किट पर 90 प्रतिशत अनुदान देते हुए किसानों को मात्र 9 रुपए देने होंगे। इसी प्रकार 11,500 ऑयस्टर मशरूम किट का वितरण किया जाएगा। 75 रुपए मूल्य की इन किट्स पर 90 प्रतिशत अनुदान के बाद किसानों को केवल 7 रुपए 50 पैसे प्रति किट देने होंगे। विभाग करेगा किसानों को प्रेरित जिला उद्यान पदाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि कम जगह में बांस की झोपड़ी बनाकर साल भर मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है। चयनित किसानों को स्वीकृति पत्र जारी कर दिए गए हैं, लेकिन अधिकांश किसानों ने अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं किया है। अब विभाग ऐसे किसानों से मिलकर उन्हें प्रेरित करेगा ताकि वे इस योजना का लाभ उठा सकें और मशरूम की खेती से जुड़कर अच्छी आय अर्जित कर सकें। नालंदा जिले में सरकारी योजनाओं और अनुदान के बावजूद मशरूम की खेती को लेकर किसानों का उत्साह कम नजर आ रहा है। बांस की झोपड़ी (मशरूम हट) में खेती की इस अभिनव योजना में अपेक्षित रुचि न मिलने से विभाग चिंतित है। जिले के 15 किसानों को खेती शुरू करने का अवसर दिया गया था। दो माह पहले आवेदन प्रक्रिया पूरा होने और चयनित किसानों को वर्क ऑर्डर (स्वीकृति पत्र) जारी करने के बावजूद अब तक केवल दो किसानों ने ही झोपड़ी का निर्माण पूरा किया है। शेष 13 किसान अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं कर पाए हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार प्रति यूनिट 89 हजार 750 रुपए का अनुदान दे रही है। कुल एक लाख 79 हजार 500 रुपए की लागत में से 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है। सालाना ढाई लाख तक की कमाई का अवसर उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगर फसल की उचित देखभाल और अनुकूल मौसम मिले तो झोपड़ी में मशरूम की खेती से किसान एक वर्ष में ढाई लाख रुपए तक का मुनाफा कमा सकते हैं। इस योजना के तहत 50×30 फीट यानी 1500 वर्ग फीट जमीन पर झोपड़ी का निर्माण किया जाता है, जिसकी ऊंचाई 12 फीट रखी जाती है। झोपड़ी के भीतर मशरूम किट रखने के लिए विशेष रैक बनाए जाते हैं। बटन मशरूम की खेती केवल सर्दियों में संभव है, लेकिन ऑयस्टर मशरूम की खेती साल भर की जा सकती है। किट वितरण की शुरुआत इस बार उद्यान विभाग ने ऑयस्टर के साथ-साथ बटन मशरूम किट भी किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। जिले में 18,000 बटन मशरूम किट बांटने का लक्ष्य रखा गया है। 90 रुपए मूल्य की एक किट पर 90 प्रतिशत अनुदान देते हुए किसानों को मात्र 9 रुपए देने होंगे। इसी प्रकार 11,500 ऑयस्टर मशरूम किट का वितरण किया जाएगा। 75 रुपए मूल्य की इन किट्स पर 90 प्रतिशत अनुदान के बाद किसानों को केवल 7 रुपए 50 पैसे प्रति किट देने होंगे। विभाग करेगा किसानों को प्रेरित जिला उद्यान पदाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि कम जगह में बांस की झोपड़ी बनाकर साल भर मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है। चयनित किसानों को स्वीकृति पत्र जारी कर दिए गए हैं, लेकिन अधिकांश किसानों ने अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं किया है। अब विभाग ऐसे किसानों से मिलकर उन्हें प्रेरित करेगा ताकि वे इस योजना का लाभ उठा सकें और मशरूम की खेती से जुड़कर अच्छी आय अर्जित कर सकें।  

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