इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता को फुल कोर्ट फेयरवेल में भावभीनी विदाई दी गई। विदाई समारोह मुख्य न्यायाधीश के न्याय कक्ष में अपराह्न 10बजे शुरू हुआ।इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली सहित सभी न्यायमूर्तिगण, महानिबंधक कार्यालय के न्यायिक अधिकारीगण व भारी संख्या में अधिवक्ता शामिल हुए। न्यायमूर्ति गुप्ता के कृतित्व व व्यक्तित्व और उनके न्यायिक योगदान की सराहना की गई साथ ही उनके उज्जवल भविष्य की कामना की गई।
न्याय कक्ष के बाहर समारोह का सर्किट टीवी के जरिए सजीव प्रसारण की भी व्यवस्था की गई थी। इसके बाद सभी न्यायमूर्तियों के साथ ग्रुप फोटो सेसन भी हुआ। न्यायमूर्ति गुप्ता उत्तराखंड हाई कोर्ट नैनीताल में मुख्य न्यायमूर्ति नियुक्त किए गए हैं। उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति ने की है। इस आशय की अधिसूचना संयुक्त सचिव भारत सरकार जगन्नाथ श्रीनिवासन की तरफ से गुरुवार आठ जनवरी 2026 को जारी की गई। उत्तराखंड के मुख्य न्यायमूर्ति गुहानथन नरेंद्र के नौ जनवरी 2026 को सेवा से अवकाश ग्रहण करने के बाद न्यायमूर्ति गुप्ता पद की शपथ लेंगे। न्यायमूर्ति गुप्ता का जन्म नौ अक्टूबर 1964 को हुआ। उन्होंने 1987 में लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की डिग्री हासिल की और छह दिसंबर 1987 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए। इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायमूर्ति के रूप में 12 अप्रैल 2013 को उनकी नियुक्ति हुई और 10 अप्रैल 2015 को स्थायी न्यायमूर्ति के रूप में शपथ ली। उनका कार्यकाल आठ अक्टूबर 2026 तक है। न्यायमूर्ति गुप्ता रेंट कंट्रोल, संवैधानिक व सिविल मामलों के जानकार हैं। न्यायमूर्ति के रूप में इलाहाबाद हाई कोर्ट में कई महत्वपूर्ण फैसले दिए। वह प्रशासनिक समिति के सदस्य होने के साथ ही उत्तर प्रदेश राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। न्यायमूर्ति गुप्ता के उत्तराखंड में नया दायित्व संभालने के लिए कार्यमुक्त होने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की प्रयागराज स्थित प्रधानपीठ में न्यायमूर्तियों का वरिष्ठता क्रम भी परिवर्तित हो जाएगा। कोलेजियम में मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के बाद क्रमश: न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी व न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा होंगे। मुख्य न्यायमूर्ति को छोड़ कर अन्य न्यायमूर्तियों की संख्या भी 81 हो जाएगी। लखनऊ खंडपीठ में यह संख्या 28 रहेगी। कुल स्ट्रेंथ फिर 110 हो जाएगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट में वर्तमान में न्यायमूर्तियों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 160 है।


