हरदोई में पैगंबर मोहम्मद साहब के दामाद और इस्लाम के चौथे खलीफा हजरत अली का जन्मदिवस (13 रजब) मनाया गया। इस अवसर पर कस्बे में ‘जश्ने मौलाए कायनात’ का आयोजन किया गया, जिसमें अकीदतमंदों ने शिरकत कर मौला अली को नजराना-ए-अकीदत पेश किया। यह महफिल मोहल्ला बन्दगी मियां में जुलूस मोहम्मदी कमेटी के अध्यक्ष मंज़ूर साग़री के आवास पर आयोजित हुई। कार्यक्रम की शुरुआत हाफिज मुक़ीम ने कुरान की तिलावत से की। इस अवसर पर दरगाह हज़रत साग़र मियां के सज्जादा नशीन मुईज़उद्दीन अहमद साग़री चिश्ती ने हज़रत अली के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। सज्जादा नशीन मुईज़उद्दीन अहमद साग़री चिश्ती ने बताया कि हजरत अली दुनिया की एकमात्र शख्सियत हैं जिनका जन्म विश्व प्रसिद्ध खान-ए-काअबा के भीतर हुआ था। उन्होंने हजरत अली की बहादुरी, वफादारी और न्यायप्रिय शासन के उदाहरण भी दिए। महफिल में हाफ़िज ज़ीशान और हाफ़िज़ शाह आलम ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हज़रत अली का जीवन और उनके आदर्श आज भी पूरी इंसानियत को समानता और सच्चाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते हैं। इस दौरान फ़ैयाज़ उद्दीन, हाफ़िज़ मुक़ीम, हाफ़िज़ फ़रीद और सद्दाम समेत अन्य शायरों और हाफिजों ने मौला अली की शान में मनकबत और नअत के नजराने पेश किए। कार्यक्रम का समापन दुरूद-ओ-सलाम के साथ हुआ, जिसके बाद देश में अमन, चैन और खुशहाली के लिए विशेष दुआ मांगी गई। इस अवसर पर सलीम सागरी, शकील मुल्ला, राशिद खां, यासीन और हिकमत सहित कस्बे के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


