बरेली के चौबारी स्थित सेंट एंड्रूज स्कूल की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यह स्कूल बिना किसी वैध मान्यता के इंटरमीडिएट तक की कक्षाएं संचालित कर रहा था। मामला तब गरमाया जब स्कूल प्रबंधन ने फीस जमा न होने के कारण तीन छात्रों- पंकज यादव, आर्यन यादव और आदित्य यादव को एडमिट कार्ड देने से मना कर दिया, जिससे वे सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा में नहीं बैठ सके। आर्थिक तंगी की वजह से छात्रों का पूरा साल बर्बाद होने की खबर जैसे ही फैली, हड़कंप मच गया। एबीवीपी का उग्र प्रदर्शन और प्रशासनिक जांच
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने इस मामले को लेकर स्कूल परिसर में जमकर हंगामा किया। विवाद इतना बढ़ा कि मामला थाने तक जा पहुंचा। गुरुवार को घंटों चली पंचायत के बाद एबीवीपी ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। एसडीएम सदर प्रमोद कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि स्कूल की चौबारी वाली शाखा कई वर्षों से बिना किसी कागजी मान्यता के अवैध रूप से चल रही थी। दो शाखाओं का मायाजाल और पुलिस की कार्यवाही
जांच में सामने आया कि सेंट एंड्रूज स्कूल की दो शाखाएं हैं। पहली शाखा बदायूं रोड (सुभाषनगर) पर 5वीं तक चलती है, जबकि दूसरी शाखा रामगंगा के पास चौबारी में 6वीं से 12वीं तक संचालित हो रही थी। बीएसए के आदेश और जांच रिपोर्ट के आधार पर सुभाषनगर पुलिस ने स्कूल प्रबंधक और प्रधानाचार्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार के अनुसार, देर रात रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी शिकंजा कस दिया गया है। पीड़ित छात्रों की जुबानी: “हमारा भविष्य बर्बाद कर दिया”
पंकज यादव ने बताया, “हमने साल भर पढ़ाई की, लेकिन अंतिम समय पर स्कूल ने सिर्फ इसलिए एडमिट कार्ड नहीं दिया क्योंकि हमारे पास फीस के पैसे कम पड़ रहे थे। हमने हाथ-पैर जोड़े, पर हमारी एक न सुनी गई और हमारा पूरा साल खराब कर दिया।”
आर्यन यादव का कहना है, “हमें यह भी नहीं पता था कि स्कूल की मान्यता ही नहीं है। हम तो सीबीएसई बोर्ड की तैयारी कर रहे थे, लेकिन जब परीक्षा का समय आया तो हमें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। स्कूल प्रशासन ने हमारे सपनों के साथ खिलवाड़ किया है।”
आदित्य यादव ने आरोप लगाया, “आर्थिक तंगी की वजह से हम वक्त पर पूरी फीस नहीं दे पाए, लेकिन क्या इसकी सजा इतनी बड़ी होनी चाहिए कि हमें परीक्षा ही न देने दी जाए? स्कूल का रवैया बेहद तानाशाही वाला था, जब एबीवीपी ने साथ दिया तब जाकर हमारी बात सुनी गई।”


