गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर देर रात उस समय हड़कंप मच गया, जब सायरन और लाल बत्ती लगी एक तेज रफ्तार कार दौड़ती हुई दिखाई दी। यातायात नियमों के उल्लंघन की आशंका पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर अजय यादव ने तुरंत कार का पीछा करना शुरू किया। कुछ किलोमीटर तक पीछा करने के बाद पुलिस ने चेकिंग के दौरान कार को रोक लिया। जांच में सामने आया कि कार में कोई भी सरकारी अधिकारी मौजूद नहीं था, जबकि उस पर लाल बत्ती और सायरन लगे हुए थे। कार चला रहे युवक ने अपनी पहचान अब्दुल खालिद के रूप में बताई। उसने पुलिस को जानकारी दी कि यह कार आम्रपाली पैलेटियम सोसाइटी निवासी ऋचा चौधरी की है, जो गौतमबुद्धनगर के विकास भवन में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं। पूछताछ में पता चला कि खालिद देर रात विकास भवन में मत्स्य विभाग में तैनात ऋचा चौधरी की कार को खड़ी करने के बहाने ले आया था। इसके बाद उसके कुछ दोस्त भी कार में सवार हो गए। आरोप है कि सभी युवक नशे की हालत में थे। उन्होंने गौतमबुद्धनगर से लाल बत्ती खरीदी और उसे कार पर लगाकर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सायरन बजाते हुए गाड़ी दौड़ाने लगे। ट्रैफिक इंस्पेक्टर अजय यादव ने बताया कि कार पर काली फिल्म भी लगी हुई थी, जो नियमों का उल्लंघन है। जब कार को रोका गया और अंदर देखा गया, तो कोई भी अधिकारी या अधिकृत व्यक्ति मौजूद नहीं था। नियमों के गंभीर उल्लंघन को देखते हुए पुलिस ने कार का 19,500 रुपये का चालान किया और गाड़ी को जब्त कर लिया। कार में सवार सभी आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए विजयनगर थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी पहचान और अधिकारों का गलत इस्तेमाल करना एक गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।


