मोतिहारी में जाली नोट तस्कर गिरफ्तार:पूछताछ में सामने आए ठगी के तरीके, केमिकल बरामद

मोतिहारी में जाली नोट तस्कर गिरफ्तार:पूछताछ में सामने आए ठगी के तरीके, केमिकल बरामद

मोतिहारी के हरैया थाना क्षेत्र में जाली नोट तस्करों से पूछताछ के दौरान एक बड़े नेटवर्क और ठगी के शातिर तरीकों का खुलासा हुआ है। थानाध्यक्ष किशन कुमार ने इस गिरोह के सदस्यों को पकड़ा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में राकेश सिंह और असलम जाली नोट गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं। गिरफ्तार तस्कर असलम ने पुलिस को बताया कि वह पहले भी ‘एक का तीन’ करने के मामले में जेल जा चुका है। जेल से रिहा होने के बाद उसने दोबारा यह अवैध धंधा शुरू कर दिया। असलम ने यह भी खुलासा किया कि छापेमारी के दौरान बरामद केमिकल का उपयोग जाली नोट बनाने और उन्हें असली दिखाने के लिए किया जाता था। ग्राहकों को ‘एक का तीन’ करने का देता था झांसा असलम के अनुसार, वह ग्राहकों को ‘एक का तीन’ करने का झांसा देता था। जो लोग जाली नोट खरीदने के लिए संपर्क करते थे, उन्हें वह असली नोट पर केमिकल लगाकर दिखाता था। फिर उस नोट को पानी से धोकर यह साबित करता था कि जाली नोट बिल्कुल असली जैसा दिखता है। इसके बाद वह ग्राहकों से एक लाख रुपए के बदले 3 लाख रुपए के जाली नोट देने का प्रस्ताव रखता था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह ग्राहकों से ठगी के लिए दो मुख्य तरीके अपनाता था। पहले तरीके में, जब सौदा तय हो जाता था और पैसे के लेन-देन का दिन आता था, तो गिरोह का एक सदस्य पुलिस की वर्दी पहनकर अचानक छापेमारी का शोर मचाता था। पुलिस का नाम सुनते ही ग्राहक डरकर पैसे छोड़कर भाग जाते थे। नोटों की गड्डी के ऊपर कुछ असली नोट रखे जाते थे दूसरे तरीके में, यदि ग्राहक मजबूत होता था या रकम बड़ी होती थी, तो नोटों की गड्डी के ऊपर कुछ असली नोट रखे जाते थे। गड्डी के बाकी हिस्से में जाली नोट या कागज की कटिंग रखी जाती थी। गिरफ्तार आरोपी राकेश सिंह ने पूछताछ में यह भी बताया कि नेपाल में होने वाले चुनाव को देखते हुए नेपाली जाली नोट की छपाई की जा रही थी। इसका उद्देश्य मतदाताओं को लुभाने के लिए चुनाव में जाली नोट खपाना था। उसने बताया कि नेपाली जाली नोट छापना अपेक्षाकृत आसान था और यह धंधा पिछले एक साल से चल रहा था। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी इस पूरे मामले पर रक्सौल के एसडीपीओ मनीष आनंद ने बताया कि गिरफ्तार तस्करों से मिली जानकारी के आधार पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि जाली नोट के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है और पुलिस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। मोतिहारी के हरैया थाना क्षेत्र में जाली नोट तस्करों से पूछताछ के दौरान एक बड़े नेटवर्क और ठगी के शातिर तरीकों का खुलासा हुआ है। थानाध्यक्ष किशन कुमार ने इस गिरोह के सदस्यों को पकड़ा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में राकेश सिंह और असलम जाली नोट गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं। गिरफ्तार तस्कर असलम ने पुलिस को बताया कि वह पहले भी ‘एक का तीन’ करने के मामले में जेल जा चुका है। जेल से रिहा होने के बाद उसने दोबारा यह अवैध धंधा शुरू कर दिया। असलम ने यह भी खुलासा किया कि छापेमारी के दौरान बरामद केमिकल का उपयोग जाली नोट बनाने और उन्हें असली दिखाने के लिए किया जाता था। ग्राहकों को ‘एक का तीन’ करने का देता था झांसा असलम के अनुसार, वह ग्राहकों को ‘एक का तीन’ करने का झांसा देता था। जो लोग जाली नोट खरीदने के लिए संपर्क करते थे, उन्हें वह असली नोट पर केमिकल लगाकर दिखाता था। फिर उस नोट को पानी से धोकर यह साबित करता था कि जाली नोट बिल्कुल असली जैसा दिखता है। इसके बाद वह ग्राहकों से एक लाख रुपए के बदले 3 लाख रुपए के जाली नोट देने का प्रस्ताव रखता था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह ग्राहकों से ठगी के लिए दो मुख्य तरीके अपनाता था। पहले तरीके में, जब सौदा तय हो जाता था और पैसे के लेन-देन का दिन आता था, तो गिरोह का एक सदस्य पुलिस की वर्दी पहनकर अचानक छापेमारी का शोर मचाता था। पुलिस का नाम सुनते ही ग्राहक डरकर पैसे छोड़कर भाग जाते थे। नोटों की गड्डी के ऊपर कुछ असली नोट रखे जाते थे दूसरे तरीके में, यदि ग्राहक मजबूत होता था या रकम बड़ी होती थी, तो नोटों की गड्डी के ऊपर कुछ असली नोट रखे जाते थे। गड्डी के बाकी हिस्से में जाली नोट या कागज की कटिंग रखी जाती थी। गिरफ्तार आरोपी राकेश सिंह ने पूछताछ में यह भी बताया कि नेपाल में होने वाले चुनाव को देखते हुए नेपाली जाली नोट की छपाई की जा रही थी। इसका उद्देश्य मतदाताओं को लुभाने के लिए चुनाव में जाली नोट खपाना था। उसने बताया कि नेपाली जाली नोट छापना अपेक्षाकृत आसान था और यह धंधा पिछले एक साल से चल रहा था। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी इस पूरे मामले पर रक्सौल के एसडीपीओ मनीष आनंद ने बताया कि गिरफ्तार तस्करों से मिली जानकारी के आधार पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि जाली नोट के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है और पुलिस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए गंभीरता से कार्रवाई कर रही है।  

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