पटना के रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र में नकली दवाओं का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया था। औषधि नियंत्रण प्रशासन ने रविवार को शिवाजी चौक के पास एक निजी परिसर में छापेमारी कर एक अवैध दवा फैक्ट्री का पर्दाफाश किया था। इस दौरान बड़ी मात्रा में टैबलेट और सिरप बरामद किए गए थे। यह फैक्ट्री ‘विभा बायोटेक’ के नाम से चल रही थी। जांच में पता चला कि यहां नामी कंपनियों के ब्रांड लेबल लगाकर नकली दवाएं बनाई जा रही थीं। दवाओं के रैपर पर उज्जैन, मुंबई और दिल्ली की मार्केटिंग कंपनियों के नाम छपे थे, जबकि मैन्युफैक्चरिंग एड्रेस RK-20 दर्ज था। यह अंतरराज्यीय नेटवर्क के माध्यम से देशभर में नकली दवाओं की आपूर्ति का संकेत देता है। सहायक औषधि नियंत्रक (एडीसी) चुनेंद्र महतो ने बताया कि जब्त दवाओं के नमूने केंद्रीय प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं। छापेमारी के दौरान मिले इनपुट के आधार पर आगे की कार्रवाई तेज कर दी गई है। कई मेडिकल स्टोर और थोक दवा कारोबारियों को जांच के दायरे में लिया छापेमारी में लिव-52 कफ सिरप, इबुजेसिक प्लस सिरप और कासग्लो न्यू क्रीम सहित दर्द, बुखार और खांसी से संबंधित कई नकली दवाएं बरामद हुईं। अधिकारियों के अनुसार, फैक्ट्री में दवाएं बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में बनाई जा रही थीं। यहां न कोई अधिकृत केमिस्ट था और न ही तकनीकी मानकों का पालन किया जा रहा था। दवा निर्माण का काम सामान्य मजदूरों से कराया जा रहा था। औषधि निरीक्षण टीम ने तैयार दवाओं के चार और कच्चे माल के 3 नमूने जब्त कर केंद्रीय प्रयोगशाला भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद दवाओं की गुणवत्ता और संरचना पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि पटना के अलावा बिहार के कई जिलों और अन्य राज्यों में भी इन नकली दवाओं की आपूर्ति की गई थी। इस मामले में कई मेडिकल स्टोर और थोक दवा कारोबारियों को जांच के दायरे में लिया गया है। विभाग बिक्री रसीद और स्टॉक रजिस्टर की जांच कर रहा है। अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही खरीदें दवाएं
पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि नकली दवाओं का सेवन लिवर और किडनी पर गंभीर असर डाल सकता है। खासतौर पर लिव-52 जैसी दवाओं का नकली संस्करण मरीज की हालत और ज्यादा बिगाड़ सकता है।
औषधि विभाग ने लोगों से अपील की है कि दवाएं केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही खरीदें और किसी भी संदिग्ध दवा की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें। पटना के रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र में नकली दवाओं का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया था। औषधि नियंत्रण प्रशासन ने रविवार को शिवाजी चौक के पास एक निजी परिसर में छापेमारी कर एक अवैध दवा फैक्ट्री का पर्दाफाश किया था। इस दौरान बड़ी मात्रा में टैबलेट और सिरप बरामद किए गए थे। यह फैक्ट्री ‘विभा बायोटेक’ के नाम से चल रही थी। जांच में पता चला कि यहां नामी कंपनियों के ब्रांड लेबल लगाकर नकली दवाएं बनाई जा रही थीं। दवाओं के रैपर पर उज्जैन, मुंबई और दिल्ली की मार्केटिंग कंपनियों के नाम छपे थे, जबकि मैन्युफैक्चरिंग एड्रेस RK-20 दर्ज था। यह अंतरराज्यीय नेटवर्क के माध्यम से देशभर में नकली दवाओं की आपूर्ति का संकेत देता है। सहायक औषधि नियंत्रक (एडीसी) चुनेंद्र महतो ने बताया कि जब्त दवाओं के नमूने केंद्रीय प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं। छापेमारी के दौरान मिले इनपुट के आधार पर आगे की कार्रवाई तेज कर दी गई है। कई मेडिकल स्टोर और थोक दवा कारोबारियों को जांच के दायरे में लिया छापेमारी में लिव-52 कफ सिरप, इबुजेसिक प्लस सिरप और कासग्लो न्यू क्रीम सहित दर्द, बुखार और खांसी से संबंधित कई नकली दवाएं बरामद हुईं। अधिकारियों के अनुसार, फैक्ट्री में दवाएं बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में बनाई जा रही थीं। यहां न कोई अधिकृत केमिस्ट था और न ही तकनीकी मानकों का पालन किया जा रहा था। दवा निर्माण का काम सामान्य मजदूरों से कराया जा रहा था। औषधि निरीक्षण टीम ने तैयार दवाओं के चार और कच्चे माल के 3 नमूने जब्त कर केंद्रीय प्रयोगशाला भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद दवाओं की गुणवत्ता और संरचना पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि पटना के अलावा बिहार के कई जिलों और अन्य राज्यों में भी इन नकली दवाओं की आपूर्ति की गई थी। इस मामले में कई मेडिकल स्टोर और थोक दवा कारोबारियों को जांच के दायरे में लिया गया है। विभाग बिक्री रसीद और स्टॉक रजिस्टर की जांच कर रहा है। अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही खरीदें दवाएं
पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि नकली दवाओं का सेवन लिवर और किडनी पर गंभीर असर डाल सकता है। खासतौर पर लिव-52 जैसी दवाओं का नकली संस्करण मरीज की हालत और ज्यादा बिगाड़ सकता है।
औषधि विभाग ने लोगों से अपील की है कि दवाएं केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही खरीदें और किसी भी संदिग्ध दवा की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।


