Fake Medicines: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने दिसंबर महीने की अपनी मासिक ड्रग अलर्ट रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बड़ी संख्या में दवाओं को मानक गुणवत्ता पर खरा न उतरने वाला (NSQ-Not of Standard Quality) बताया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर में जांच की गई दवाओं में से कुल 167 सैंपल गुणवत्ता के मानकों पर फेल पाए गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्रीय ड्रग्स लैबोरेट्री ने 74 दवाओं को NSQ घोषित किया, जबकि राज्य ड्रग्स टेस्टिंग लैबोरेट्री ने 93 दवाओं को मानक से कम पाया। यह पूरी प्रक्रिया नियमित निगरानी (रूटीन सर्विलांस) के तहत की जाती है और हर महीने ऐसी सूची CDSCO की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाती है।
NSQ दवाएं क्या होती हैं?
किसी दवा को NSQ तब माना जाता है जब वह तय किए गए एक या उससे ज्यादा क्वालिटी पैरामीटर पर खरी नहीं उतरती। इसका मतलब यह नहीं होता कि वह दवा हर हाल में खतरनाक है, लेकिन वह सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार सही नहीं पाई जाती। CDSCO ने साफ किया है कि यह समस्या सिर्फ उसी बैच तक सीमित होती है, जिसकी जांच की गई है। इसका मतलब यह है कि बाजार में मौजूद उसी दवा के दूसरे बैच जरूरी नहीं कि खराब हों। इसलिए आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
नकली (स्प्यूरियस) दवाओं पर भी कार्रवाई
दिसंबर महीने में जांच के दौरान कुछ नकली दवाएं (Spurious Drugs) भी पकड़ी गईं। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर क्षेत्र, गाजियाबाद से 4 दवाएं, एफडीए अहमदाबाद से 1 दवा, बिहार से 1 दवा, महाराष्ट्र से 1 दवा को नकली पाया गया। बताया गया कि इन्हें बिना अनुमति वाले निर्माताओं ने बनाया था और इन पर दूसरी कंपनियों के ब्रांड नाम लगाए गए थे। CDSCO ने कहा है कि इस मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
जनता की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी
CDSCO ने यह भी बताया कि NSQ और नकली दवाओं की पहचान राज्य ड्रग नियामकों के साथ मिलकर नियमित रूप से की जाती है। इसका मकसद ऐसी दवाओं को समय रहते बाजार से हटाना और आम जनता की सेहत की रक्षा करना है। यह प्रक्रिया दिखाती है कि देश में ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम एक्टिव और मजबूत है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
रिपोर्ट के एक अन्य हिस्से में बताया गया कि एक और महीने में 205 दवाओं को NSQ घोषित किया गया था। उस दौरान केंद्रीय लैबोरेट्री ने 64 सैंपल, राज्य लैबोरेट्री ने 141 सैंपल को गुणवत्ता में फेल पाया था।
आम लोगों के लिए क्या जरूरी है?
आम लोगों को सलाह दी जाती है कि वे दवाएं हमेशा पंजीकृत मेडिकल स्टोर से ही खरीदें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें। दवा के पैकेट पर बैच नंबर और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें। सरकार की यह कार्रवाई बताती है कि खराब और नकली दवाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि लोगों की सेहत से कोई समझौता न हो।


