गयाजी में मगध मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन डॉक्टर सत्येंद्र कुमार 1 करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि रंगदारी का यह पूरा खेल किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि खुद डॉक्टर ने शातिर तरीके से रचा था। इस साजिश में डॉक्टर की पत्नी विभा कुमारी, नर्सिंग होम का मुख्य कंपाउंडर और एक निजी अस्पताल संचालक भी शामिल है। डॉक्टर समेत 4 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। मगध मेडिकल थाने की पुलिस ने चारों को रडार पर ले लिया है। सभी से थाने में अलग-अलग बैठाकर गहन पूछताछ की जा रही है। शुक्रवार देर रात मेडिकल थानाध्यक्ष कृष्ण सिंह ने पुष्टि की है। चार लोगों से पूछताछ चल रही है। पुलिस का दावा है कि रंगदारी केस के पीछे की परतें अब एक-एक कर खुल रही हैं। डॉक्टर ने खुद रचा रंगदारी का नाटक पुलिस सूत्रों के अनुसार, डॉ. सत्येंद्र कुमार मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। उनकी पत्नी विभा कुमारी हैं। कुछ समय पहले डॉ. सत्येंद्र ने नौशाद नामक युवक के साथ मिलकर एसएसपी कोठी के पास डायमंड नर्सिंग होम खोला था। नर्सिंग होम की बिल्डिंग तीन लाख रुपए प्रतिमाह किराए पर ली गई थी। इसमें डॉक्टर और नौशाद बराबर के पार्टनर थे। नर्सिंग होम की स्थापना, मेडिकल उपकरण, स्टाफ और अन्य व्यवस्थाओं में ज्यादातर खर्च नौशाद की ओर से किया गया था। इसमें मुंबई में रहने वाले उसके भाई का पैसा भी लगा था। यह बात डॉ. सत्येंद्र भी अच्छी तरह जानते थे। शुरुआत में नर्सिंग होम ठीक-ठाक चल रहा था और मुनाफा भी आ रहा था। लेकिन एक साल से डॉ. सत्येंद्र न तो नर्सिंग होम जा रहे थे और न ही अपने हिस्से का खर्च दे रहे थे। हालात यह हो गए कि 12 महीने से नर्सिंग होम का किराया तक बकाया हो गया। इसको लेकर नौशाद लगातार डॉक्टर पर दबाव बना रहा था। बार-बार फोन कर पैसे की मांग की जा रही थी। पैसे न देने पड़े इससे बचने के लिए रची साजिश पुलिस का कहना है कि इसी दबाव से बचने के लिए डॉ. सत्येंद्र ने रंगदारी की साजिश रची। एक दिन जब नौशाद की ओर से पैसे को लेकर फोन आया तो उसी कॉल को रंगदारी बताकर केस दर्ज करा दिया। केस दर्ज होते ही नौशाद को पूरे खेल की भनक लग गई। वह तुरंत मुंबई भाग गया और अपने भाई के पास पहुंच गया। इधर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और कॉल डिटेल के आधार पर मुंबई पहुंच गई। वहां नौशाद से पूछताछ की गई। उसने पूरे नर्सिंग होम के लेन-देन, साझेदारी और बकाया किराए की सच्चाई पुलिस के सामने रख दी। इसके बाद पुलिस नौशाद को हिरासत में लेकर गया आ गई। साथ ही नर्सिंग होम के मुख्य कम्पाउंडर को भी पूछताछ के लिए उठा लिया गया। वीडियो ने खोल दिया राज इस पूरे मामले में पुलिस का शक एक वीडियो से गहराया। डॉक्टर ने खुद पुलिस को एक वीडियो उपलब्ध कराया था जिसमें फोन पर रंगदारी मांगे जाने की बातचीत रिकॉर्ड थी। जांच में पता चला कि यह वीडियो डॉक्टर की पत्नी बना रही थी। पुलिस को यहीं से शक हुआ कि जब किसी को रंगदारी की धमकी मिलती है, तो उस वक्त उसकी पत्नी वीडियो क्यों बनाएगी। आमतौर पर ऐसी स्थिति में कोई भी घबरा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, जिस कॉल को रंगदारी बताया गया, वह कॉल नौशाद के मुंबई में रहने वाले भाई की ओर से था। हालांकि पुलिस फिलहाल कंपाउंडर और नौशाद के भाई के नाम सार्वजनिक नहीं कर रही है। देर रात थाने पहुंचे डॉक्टर दंपति गुरुवार की रात करीब आठ बजे पुलिस ने डॉक्टर और उनकी पत्नी को थाने बुलाया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। बहाने बनाए गए। इसके बाद जब पुलिस ने सख्ती दिखाई, तो शुक्रवार की रात दोनों खुद थाने पहुंचे। अब चारों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में डॉक्टर का झूठ एक-एक कर उजागर हो चुका है। बता दें, मगध मेडिकल कॉलेज के सीनियर डॉक्टर डॉ. सत्येंद्र कुमार ने एक करोड़ रुपए की रंगदारी और पत्नी को जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाते हुए थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। डॉक्टर ने बताया था कि 27 और 31 दिसंबर 2025 को फोन कर एक करोड़ मांगा गया है। रकम नहीं देने पर पत्नी की हत्या की धमकी दी गई। पुलिस ने उस समय केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस को उस समय भी शक हुआ था लेकिन मामला डॉक्टर से जुड़ा होने की बात का समझ कर बड़े ही चालाकी से अनदेखी कर दी थी। अब उसी केस में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रंगदारी की यह कहानी खुद डॉक्टर ने ही रची थी। गयाजी में मगध मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन डॉक्टर सत्येंद्र कुमार 1 करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि रंगदारी का यह पूरा खेल किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि खुद डॉक्टर ने शातिर तरीके से रचा था। इस साजिश में डॉक्टर की पत्नी विभा कुमारी, नर्सिंग होम का मुख्य कंपाउंडर और एक निजी अस्पताल संचालक भी शामिल है। डॉक्टर समेत 4 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। मगध मेडिकल थाने की पुलिस ने चारों को रडार पर ले लिया है। सभी से थाने में अलग-अलग बैठाकर गहन पूछताछ की जा रही है। शुक्रवार देर रात मेडिकल थानाध्यक्ष कृष्ण सिंह ने पुष्टि की है। चार लोगों से पूछताछ चल रही है। पुलिस का दावा है कि रंगदारी केस के पीछे की परतें अब एक-एक कर खुल रही हैं। डॉक्टर ने खुद रचा रंगदारी का नाटक पुलिस सूत्रों के अनुसार, डॉ. सत्येंद्र कुमार मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। उनकी पत्नी विभा कुमारी हैं। कुछ समय पहले डॉ. सत्येंद्र ने नौशाद नामक युवक के साथ मिलकर एसएसपी कोठी के पास डायमंड नर्सिंग होम खोला था। नर्सिंग होम की बिल्डिंग तीन लाख रुपए प्रतिमाह किराए पर ली गई थी। इसमें डॉक्टर और नौशाद बराबर के पार्टनर थे। नर्सिंग होम की स्थापना, मेडिकल उपकरण, स्टाफ और अन्य व्यवस्थाओं में ज्यादातर खर्च नौशाद की ओर से किया गया था। इसमें मुंबई में रहने वाले उसके भाई का पैसा भी लगा था। यह बात डॉ. सत्येंद्र भी अच्छी तरह जानते थे। शुरुआत में नर्सिंग होम ठीक-ठाक चल रहा था और मुनाफा भी आ रहा था। लेकिन एक साल से डॉ. सत्येंद्र न तो नर्सिंग होम जा रहे थे और न ही अपने हिस्से का खर्च दे रहे थे। हालात यह हो गए कि 12 महीने से नर्सिंग होम का किराया तक बकाया हो गया। इसको लेकर नौशाद लगातार डॉक्टर पर दबाव बना रहा था। बार-बार फोन कर पैसे की मांग की जा रही थी। पैसे न देने पड़े इससे बचने के लिए रची साजिश पुलिस का कहना है कि इसी दबाव से बचने के लिए डॉ. सत्येंद्र ने रंगदारी की साजिश रची। एक दिन जब नौशाद की ओर से पैसे को लेकर फोन आया तो उसी कॉल को रंगदारी बताकर केस दर्ज करा दिया। केस दर्ज होते ही नौशाद को पूरे खेल की भनक लग गई। वह तुरंत मुंबई भाग गया और अपने भाई के पास पहुंच गया। इधर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और कॉल डिटेल के आधार पर मुंबई पहुंच गई। वहां नौशाद से पूछताछ की गई। उसने पूरे नर्सिंग होम के लेन-देन, साझेदारी और बकाया किराए की सच्चाई पुलिस के सामने रख दी। इसके बाद पुलिस नौशाद को हिरासत में लेकर गया आ गई। साथ ही नर्सिंग होम के मुख्य कम्पाउंडर को भी पूछताछ के लिए उठा लिया गया। वीडियो ने खोल दिया राज इस पूरे मामले में पुलिस का शक एक वीडियो से गहराया। डॉक्टर ने खुद पुलिस को एक वीडियो उपलब्ध कराया था जिसमें फोन पर रंगदारी मांगे जाने की बातचीत रिकॉर्ड थी। जांच में पता चला कि यह वीडियो डॉक्टर की पत्नी बना रही थी। पुलिस को यहीं से शक हुआ कि जब किसी को रंगदारी की धमकी मिलती है, तो उस वक्त उसकी पत्नी वीडियो क्यों बनाएगी। आमतौर पर ऐसी स्थिति में कोई भी घबरा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, जिस कॉल को रंगदारी बताया गया, वह कॉल नौशाद के मुंबई में रहने वाले भाई की ओर से था। हालांकि पुलिस फिलहाल कंपाउंडर और नौशाद के भाई के नाम सार्वजनिक नहीं कर रही है। देर रात थाने पहुंचे डॉक्टर दंपति गुरुवार की रात करीब आठ बजे पुलिस ने डॉक्टर और उनकी पत्नी को थाने बुलाया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। बहाने बनाए गए। इसके बाद जब पुलिस ने सख्ती दिखाई, तो शुक्रवार की रात दोनों खुद थाने पहुंचे। अब चारों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में डॉक्टर का झूठ एक-एक कर उजागर हो चुका है। बता दें, मगध मेडिकल कॉलेज के सीनियर डॉक्टर डॉ. सत्येंद्र कुमार ने एक करोड़ रुपए की रंगदारी और पत्नी को जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाते हुए थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। डॉक्टर ने बताया था कि 27 और 31 दिसंबर 2025 को फोन कर एक करोड़ मांगा गया है। रकम नहीं देने पर पत्नी की हत्या की धमकी दी गई। पुलिस ने उस समय केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस को उस समय भी शक हुआ था लेकिन मामला डॉक्टर से जुड़ा होने की बात का समझ कर बड़े ही चालाकी से अनदेखी कर दी थी। अब उसी केस में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रंगदारी की यह कहानी खुद डॉक्टर ने ही रची थी।


