तीन बार मिली नाकामी, फिर भी नहीं मानी हार, चौथे बारी में मेरठ की प्राची ने गाड़ा झंडा, इतने घंटे करती थीं पढ़ाई

तीन बार मिली नाकामी, फिर भी नहीं मानी हार, चौथे बारी में मेरठ की प्राची ने गाड़ा झंडा, इतने घंटे करती थीं पढ़ाई

Prachi Panwar Secured 59th rank in UPSC 2025 Success Story: मेरठ की प्राची पंवार ने कड़ी मेहनत और लगातार प्रयासों से UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 59वीं रैंक हासिल की है। इस सफलता से उन्होंने न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे मेरठ शहर और हस्तिनापुर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। प्राची मूल रूप से मेरठ जिले के रानी नगला गांव की रहने वाली हैं और उन्होंने भारतीय विदेश सेवा (IFS) के लिए चयन पाया है।

परिवार और शुरुआती जीवन

प्राची पंवार के पिता राकेश पंवार हैं। वे एक साधारण परिवार से हैं, लेकिन परिवार ने हमेशा उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी। प्राची ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय माता-पिता के सहयोग और प्रोत्साहन को दिया है। गांव के छोटे से माहौल में रहकर भी उन्होंने बड़े सपनों को पूरा किया। उनकी यह उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के लिए बड़ी प्रेरणा है।

UPSC की तैयारी की चुनौतीपूर्ण राह

प्राची की UPSC की राह आसान नहीं थी। उन्होंने पहले प्रयास में बिना ज्यादा तैयारी के परीक्षा दी, लेकिन प्रीलिम्स क्लियर नहीं हो पाया। दूसरे प्रयास में भी प्रीलिम्स नहीं निकला, जिससे उन्हें काफी मायूसी हुई। माता-पिता ने उन्हें हिम्मत दी और समझाया कि हार मत मानो। तीसरे प्रयास में उन्होंने मेहनत की और इंटरव्यू तक पहुंच गईं, लेकिन फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आया। फिर भी उनका विश्वास नहीं डगमगाया। उन्होंने सोचा कि इंटरव्यू तक पहुंच गई हूं, तो अगले प्रयास में जरूर सफलता मिलेगी। चौथे प्रयास में उन्होंने पूरी लगन से तैयारी की और सभी चरण क्लियर कर 59वीं रैंक हासिल की।

तैयारी का तरीका और रोजाना रूटीन

प्राची ने सेल्फ स्टडी पर पूरा फोकस रखा। वे रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करती थीं। उन्होंने कोचिंग के साथ-साथ अपनी कमजोरियों को पहचाना और उन पर काम किया। निरंतर अभ्यास, पिछले साल के पेपर सॉल्व करना और नियमित रिवीजन उनकी सफलता की कुंजी बने। उन्होंने कहा कि असफलताएं आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और हर बार बेहतर होने की कोशिश की।

प्राची का संदेश युवाओं के लिए

सफलता पर प्राची ने कहा कि UPSC जैसी परीक्षा में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। नियमित अभ्यास और लगन से काम करें। परिवार का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर आप ईमानदारी से मेहनत करेंगे, तो ग्रामीण पृष्ठभूमि भी बाधा नहीं बनेगी, बल्कि ताकत बनेगी।

गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल

प्राची की रैंक की खबर मिलते ही रानी नगला गांव और हस्तिनापुर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और कह रहे हैं कि प्राची ने साबित कर दिया कि मेहनत से कोई भी बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है। मेरठ के विधायकों और समाज के लोगों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। यह सफलता पूरे उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है।

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