महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। खास बात यह है कि राज्य सरकार में साथ सत्ता चला रहे दल ही कई जगहों पर एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर चुके हैं। इसका असर पुणे महानगरपालिका चुनाव (PMC Election) में साफ नजर आ रहा है, जहां उपमुख्यमंत्री अजित पवार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।
पुणे में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। हाल ही में अजित पवार द्वारा भाजपा पर की गई टिप्पणी के बाद अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ा जवाब दिया है। पुणे में एक इंटरव्यू के दौरान फडणवीस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अपराध के खिलाफ बोलने वाले ही अगर अपराधियों को टिकट देंगे, तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता।
फडणवीस का तीखा बयान
सीएम फडणवीस ने कहा कि जो लोग सार्वजनिक मंचों से यह कहते हैं कि राजनीति से अपराध खत्म होना चाहिए, वही अगर चुनाव में अपराधियों या उनसे जुड़े लोगों को उम्मीदवार बनाते हैं, तो यह दोहरा चरित्र है। फडणवीस ने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई अपराधी चुनाव जीत भी जाता है, तो उसकी जगह महानगरपालिका में नहीं, बल्कि जेल में होगी।
किन उम्मीदवारों को लेकर विवाद
पुणे महानगरपालिका चुनाव में अजित पवार की एनसीपी ने कथित आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े परिवारों की तीन महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। इनमें गजानन मारणे की पत्नी जयश्री मारणे, बंडू आंदेकर की बहू सोनाली आंदेकर और भावजयी लक्ष्मी उदयकांत आंदेकर शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सोनाली और लक्ष्मी जेल से ही चुनाव लड़ रही हैं। इसी को लेकर अजित पवार पर विपक्ष ही नहीं, बल्कि सहयोगी दलों की ओर से भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
अजित पवार ने दी सफाई
इस पूरे विवाद पर अजित पवार ने पहले ही सफाई देते हुए कहा था कि अगर कोई व्यक्ति अपराधी है, तो इसमें उसकी पत्नी या परिवार के अन्य सदस्यों का दोष कैसे माना जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनसीपी की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (सचिन खरात गुट) के साथ चुनावी समझौता है और कुछ सीटें उसी के तहत दी गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सीधे तौर पर किसी अपराधी को टिकट नहीं दिया है।
पीएमसी सहित महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव के लिए मतदान 15 जनवरी को होगा, जबकि मतों की गिनती 16 जनवरी को की जाएगी।


