Electric Vehicles Silver Demand: चांदी अब सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रह गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और हाईटेक कारों के बढ़ते चलन ने इस धातु की भूमिका पूरी तरह बदल दी है। यही वजह है कि बीते एक साल में चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे सबसे बड़ी वजह इंडस्ट्रियल डिमांड का लगातार बढ़ना है, जिसमें ऑटोमोबाइल सेक्टर की हिस्सेदारी अहम होती जा रही है।
हाल के दिनों में चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव बना हुआ है। घरेलू बाजार में चांदी ने हाल ही में रिकॉर्ड के आसपास के स्तर देखे हैं, हालांकि इसके बाद मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के चलते कीमतों में कुछ नरमी भी दर्ज की गई है। इसके बावजूद बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि लंबी अवधि में चांदी की इंडस्ट्रियल मांग मजबूत बनी रह सकती है, खासकर ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर से मिल रहे समर्थन के चलते।
ज्वेलरी से आगे बढ़कर इंडस्ट्री की रीढ़ बनी चांदी
कारों में चांदी का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। करीब एक सदी पहले भी वाहनों में इसका उपयोग लाइट और रिफ्लेक्टर जैसे हिस्सों में किया जाता था। लेकिन बीते दो दशकों में जैसे-जैसे कारें ज्यादा तकनीकी होती गईं, वैसे-वैसे चांदी का इस्तेमाल भी बढ़ता गया।
खासतौर पर 2010 के बाद इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के आने से चांदी की मांग में तेजी आई है। आधुनिक कारें अब सिर्फ मैकेनिकल मशीन नहीं रहीं, बल्कि कंप्यूटर जैसी बन चुकी हैं, जिनमें दर्जनों इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम काम करते हैं।
एक कार में कितनी चांदी लगती है?
ब्रोकरेज और इंडस्ट्री से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, लगभग हर कार में चांदी का इस्तेमाल होता है।
- पेट्रोल या डीजल कार में औसतन 15 से 20 ग्राम चांदी।
- हाइब्रिड कार में करीब 18 से 34 ग्राम।
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV) में 25 से 50 ग्राम तक चांदी लग सकती है।
इस तरह देखा जाए तो इलेक्ट्रिक वाहनों में पारंपरिक गाड़ियों की तुलना में करीब 70 प्रतिशत तक ज्यादा चांदी का उपयोग होता है। यही अंतर आने वाले वर्षों में मांग को और तेज कर सकता है।
कारों में कहां-कहां होती है चांदी की जरूरत?
चांदी का इस्तेमाल कारों के कई अहम सिस्टम में होता है।
- इंफोटेनमेंट सिस्टम
- ABS और एयरबैग सिस्टम
- ECU (इंजन कंट्रोल यूनिट)
- पावर विंडो और सेंट्रल लॉकिंग
- बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम
- पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और चार्जिंग सिस्टम
- हाई-वोल्टेज कनेक्शन
इन सभी सिस्टम्स में तेज और भरोसेमंद इलेक्ट्रिकल कनेक्शन जरूरी होता है, जहां चांदी की भूमिका अहम हो जाती है।
चांदी क्यों है इतनी जरूरी?
चांदी बिजली का सबसे अच्छा कंडक्टर मानी जाती है। यह करंट को तेजी से और न्यूनतम नुकसान के साथ प्रवाहित करती है। इसी वजह से इलेक्ट्रिक कॉन्टैक्ट्स, स्विच, सर्किट और सेंसर में इसका इस्तेमाल किया जाता है। आधुनिक कारों में लगे ECU, सेंसर और सेफ्टी सिस्टम्स को तुरंत और सटीक सिग्नल चाहिए होता है, जो चांदी आधारित कॉन्टैक्ट्स के जरिए संभव हो पाता है।
ऑटो इंडस्ट्री में बढ़ती खपत
वैश्विक स्तर पर ऑटोमोबाइल सेक्टर में चांदी की खपत पहले ही बड़े स्तर पर पहुंच चुकी है। अलग-अलग अनुमानों के अनुसार, फिलहाल दुनिया भर की ऑटो इंडस्ट्री हर साल करीब 1,700 से 2,500 टन चांदी का इस्तेमाल करती है।
आर्थिक शोध एजेंसियों का मानना है कि 2025 से 2031 के बीच ऑटो सेक्टर में चांदी की मांग हर साल औसतन 3 से 4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। अनुमान है कि 2031 तक यह खपत करीब 3,000 टन प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन सबसे बड़ा योगदान देंगे।
आगे क्या संकेत देती है तस्वीर?
ऑटोमोबाइल सेक्टर में तकनीक का बढ़ता दखल और EV की ओर शिफ्ट यह साफ संकेत देता है कि चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है। इसका असर कीमतों पर भी दिख सकता है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अब चांदी को सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि एक रणनीतिक इंडस्ट्रियल मेटल के रूप में देखा जा रहा है।
लब्बोलुआब यह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों और हाईटेक कारों ने चांदी के इस्तेमाल की दिशा बदल दी है, और यही बदलाव इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह बनता जा रहा है।


