हरियाणा के हिसार स्थित अग्रसेन भवन में किन्नर समाज का राष्ट्रीय अधिवेशन चल रहा है। आज बुधवार को अधिवेशन के दौरान किन्नर समाज ने ट्रांसजेंडर बिल का विरोध किया और इसे निजता पर सीधा हमला बताया। किन्नर समाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगे हाथ जोड़ते हुए कहा कि गुहार लगाई कि केंद्र सरकार के नए ट्रांसजेंडर बिल का वापस ले। दिल्ली पहाड़ी धीरज की गद्दीनशीन चांदनी किन्नर ने
प्रधानमंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा कि “आप मेरे भाई हैं, जब आप गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब मेरी अहमदाबाद वाली बहन सोनिया आपको राखी बांधी थी, जिसकी फोटो हमने आपको भेजी है। मैं आपसे बस यही कहूंगी कि बहनों का चीरहरण न करें। हमें इज्जत दें, आप और तरक्की करेंगे।” बता दें कि ट्रासजेंडर बिल के विरोध में देशभर से करीब 1500 किन्नर प्रतिनिधि हिसार में जुटे हैं। सभी ने इस कानून को अपने अस्तित्व पर हमला करार दिया है।
दिल्ली में करेंगे बड़ा प्रदर्शन
चांदनी किन्नर ने बताया कि अगर बिल रद नहीं हुआ तो जंतर-मंतर पर 6 अप्रैल को बड़ा प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे और याचिका लगाएंगे और जरूरत पड़ी तो रामलीला मैदान में आमरण अनशन करेंगे।
चांदनी किन्नर ने बिल में प्रस्तावित मेडिकल जांच की अनिवार्यता को अपमानजनक बताया। उन्होंने तर्क दिया कि जिस देश में स्त्री या पुरुष होने के लिए किसी डॉक्टरी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं पड़ती, वहां किन्नर समाज को अपनी पहचान साबित करने के लिए ‘मेडिकल सर्टिफिकेट’ की जंजीरों में क्यों जकड़ा जा रहा है। हम प्रधानमंत्री को दुआ देती हैं : चांदनी
हिसार में पत्रकार वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे आंदोलन के कड़े रुख पर सवाल किया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सरकार को डरा नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि हम इस देश के नागरिक हैं। हम धमकी नहीं दे रहे, बल्कि हाथ जोड़कर निवेदन कर रहे हैं कि इस बिल को रिजेक्ट किया जाए। चांदनी ने बताया कि वे अक्सर अकबर रोड से गुजरते हुए अमित शाह और प्रधानमंत्री के आवास के पास से निकलती हैं और अपने भाई (प्रधामंत्री मोदी ) को दुआएं देती हैं। परंपरा को कानून से ना जोड़ा जाए
अधिवेशन में वक्ताओं ने कहा कि किन्नर समाज सदियों से अपनी परंपराओं के अनुसार जी रहा है। असली और नकली किन्नरों की पहचान समाज स्वयं कर लेता है, लेकिन सरकार द्वारा थोपे जा रहे नए नियम उनकी खुशहाली और सामाजिक ढांचे को बिगाड़ देंगे। इस महामंथन का संदेश साफ था कि किन्नर समाज अपनी दुआओं के बदले सरकार से केवल सम्मान और अपनी पहचान की सुरक्षा मांग रहा है।


