प्रवर्तन निदेशालय (EOU) ने कार्यपालक अभियंता मनोज रजक के ठिकानों पर छापेमारी कर आय से अधिक संपत्ति का खुलासा किया है। उनके खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से 62.66 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच में बिहार के कई जिलों के साथ-साथ नेपाल और पश्चिम बंगाल में भी उनकी संपत्ति के प्रमाण मिले हैं। ईओयू को मनोज कुमार और उनके परिजनों के नाम पर सिलीगुड़ी, दरभंगा, सुपौल के करजाईन और अररिया में कुल 17 भूखंडों की जानकारी मिली है, जिनकी कीमत लगभग तीन करोड़ रुपये है। छापेमारी के दौरान यह भी पता चला कि मनोज कुमार के भाई संजय रजक के नाम पर सुपौल में एक गैस एजेंसी (इंजीनियर एचपी गैस ग्रामीण वितरक एजेंसी) चलाई जा रही है। इस एजेंसी के लिए खरीदा गया भूखंड बाद में मनोज के नाम पर स्थानांतरित कर दिया गया था, जिसके कारण संजय को भी मामले में सह-अभियुक्त बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, उनकी पत्नी वीणा श्री के नाम पर दरभंगा-बिरौल पथ पर एक पेट्रोल पंप के लिए भूखंड लीज पर लेने के कागजात भी मिले हैं। दार्जिलिंग में एक चाय बगान में भी उनकी साझेदारी के दस्तावेज मिले हैं। जांच अधिकारियों को यह भी जानकारी मिली है कि कार्यपालक अभियंता ने नेपाल के सुनसरी जिले में अपनी एक महिला मित्र के लिए मकान का निर्माण कराया है। यह जानकारी उनकी पत्नी के माध्यम से मिली थी, जिसका सत्यापन किया गया है। इस मकान के निर्माण के लिए अभियंता ने अपने पैतृक गांव से मजदूर भेजे थे। मनोज रजक ने वर्ष 2009 में बिजली कंपनी में सहायक अभियंता के रूप में योगदान दिया था। वह पिछले दो सालों से मधुबनी जिले के जयनगर में कार्यरत थे। प्रवर्तन निदेशालय (EOU) ने कार्यपालक अभियंता मनोज रजक के ठिकानों पर छापेमारी कर आय से अधिक संपत्ति का खुलासा किया है। उनके खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से 62.66 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच में बिहार के कई जिलों के साथ-साथ नेपाल और पश्चिम बंगाल में भी उनकी संपत्ति के प्रमाण मिले हैं। ईओयू को मनोज कुमार और उनके परिजनों के नाम पर सिलीगुड़ी, दरभंगा, सुपौल के करजाईन और अररिया में कुल 17 भूखंडों की जानकारी मिली है, जिनकी कीमत लगभग तीन करोड़ रुपये है। छापेमारी के दौरान यह भी पता चला कि मनोज कुमार के भाई संजय रजक के नाम पर सुपौल में एक गैस एजेंसी (इंजीनियर एचपी गैस ग्रामीण वितरक एजेंसी) चलाई जा रही है। इस एजेंसी के लिए खरीदा गया भूखंड बाद में मनोज के नाम पर स्थानांतरित कर दिया गया था, जिसके कारण संजय को भी मामले में सह-अभियुक्त बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, उनकी पत्नी वीणा श्री के नाम पर दरभंगा-बिरौल पथ पर एक पेट्रोल पंप के लिए भूखंड लीज पर लेने के कागजात भी मिले हैं। दार्जिलिंग में एक चाय बगान में भी उनकी साझेदारी के दस्तावेज मिले हैं। जांच अधिकारियों को यह भी जानकारी मिली है कि कार्यपालक अभियंता ने नेपाल के सुनसरी जिले में अपनी एक महिला मित्र के लिए मकान का निर्माण कराया है। यह जानकारी उनकी पत्नी के माध्यम से मिली थी, जिसका सत्यापन किया गया है। इस मकान के निर्माण के लिए अभियंता ने अपने पैतृक गांव से मजदूर भेजे थे। मनोज रजक ने वर्ष 2009 में बिजली कंपनी में सहायक अभियंता के रूप में योगदान दिया था। वह पिछले दो सालों से मधुबनी जिले के जयनगर में कार्यरत थे।


