गोरखपुर महोत्सव के अंतर्गत योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित ‘वाइल्डलाइफ, एनवायरमेंट एवं इको-टूरिज्म फिल्म फेस्टिबल-2026’ के तीसरे दिन महापौर डा. मंगलेश श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के बिना पर्यावरण संतुलन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। जब किसी एक भी प्रजाति पर संकट आता है, तो उसका प्रभाव पूरी पारिस्थितिकी श्रृंखला पर पड़ता है। फिल्मों के माध्यम से प्रदर्शित दृश्य हमें यह बोध कराते हैं कि इस धरती पर मौजूद प्रत्येक जीव का अपना विशेष महत्व है।
गोरखपुर वन प्रभाग, हेरिटेज फाउंडेशन, शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान और गोरखपुर नगर निगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित फिल्मोत्सव में उन्होंने कहा कि प्रकृति हमारी सबसे बड़ी धरोहर है। हरे-भरे जंगल, स्वच्छ नदियां, विविध वन्यजीव और संतुलित पर्यावरण, ये सभी मिलकर हमारे जीवन को सुरक्षित, स्वस्थ और सुंदर बनाते हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विकास की अंधी दौड़ में हम अनजाने में इस अमूल्य धरोहर को क्षति पहुंचा रहे हैं। ऐसे में समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर बच्चों और युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वही आने वाले कल के निर्माता हैं। महापौर ने स्वच्छ वायु, पर्यावरण संरक्षण एवं जल संरक्षण की दिशा में गोरखपुर नगर निगम द्वारा किए जा रहे प्रयासों, योजनाओं और नवाचारों की भी जानकारी दी। आमजन से इन अभियानों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। हेरिटेज फाउंडेशन की संरक्षिका डा. अनिता अग्रवाल ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में गोरखपुर वन प्रभाग के रेंजर दिनेश चौरसिया, एसओ रामगढ़ताल थाना नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव, हेरिटेज की संरक्षिका डॉ अनिता अग्रवाल, ट्रस्टी अनिल कुमार तिवारी, मनीष चौबे, आशीष कुमार, गौरव पाण्डेय को स्मृति चिन्ह प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन अमृता मल्होत्रा ने किया। अतिथियों ने क्विज प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। सभी पर्यावरण के सच्चे प्रहरी बनें
फिल्मोत्सव के समापन सत्र में गोरखपुर के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) विकास यादव ने कहा कि यह फिल्मोत्सव स्पष्ट संदेश देता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास जैसे पौधरोपण, जल और बिजली की बचत, प्लास्टिक के उपयोग में कमी और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार बड़े सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। डीएफओ ने उपस्थित बच्चों और युवाओं से कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि वे सभी पर्यावरण के सच्चे प्रहरी बनेंगे। वे अपने घर, विद्यालय और समाज में हरियाली, स्वच्छता और संरक्षण का संदेश फैलाएंगे। आज लिया गया यही संकल्प आने वाले वर्षों में एक सुरक्षित, सुंदर और समृद्ध भारत की मजबूत नींव बनेगा। वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ डा. आरके सिंह ने कहा कि आज का जागरूक बच्चा ही कल का जिम्मेदार नागरिक बनेगा। छोटे हाथ भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने बच्चों से सीधा संवाद कर उन्हें प्रहरी बनने के कई टिप्स भी दिए। शहीद अशफाक उल्ला खॉ प्राणि उद्यान के उप निदेशक डा. योगेश कुमार श्रीवास्तव ने भी बच्चों को प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपड़े या जूट के बैग, कचरा के उचित निस्तारण, जल संरक्षण के लिए सुझाव दिए। कहा कि बच्चे यदि चाह लें तो पर्यावरण के सच्चे प्रहरी बन सकते हैं।


