लोहरदगा|लोहरदगा, झारखंड राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ, जिला शाखा लोहरदगा द्वारा समाहरणालय के समक्ष इक्युलिप्टस मैदान में आयोजित आम बैठक में नवनिर्वाचित नगर अध्यक्ष एवं सभी विजयी पार्षदों को बधाई दी गई। बैठक में कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि नई स्थानीय निकाय सरकार आम जनता और कर्मियों के प्रति संवेदनशील होकर “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के साथ विकास के मार्ग पर आगे बढ़ेगी। कर्मचारियों ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के बाद पदाधिकारियों और आउटसोर्सिंग कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी। आरोप लगाया गया कि राशि उपलब्ध रहने के बावजूद 2 से 4 माह तक वेतन भुगतान नहीं किया जाता, ड्राइवरों को लेबर के बराबर वेतन दिया जाता है तथा विभिन्न मदों में कटौती कर शोषण किया जाता है। बैठक में कर्मचारियों ने झारखंड के नगर विकास मंत्री द्वारा प्रश्नकाल में दिए गए बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वेतन की पूरी राशि कमीशन सहित जारी होने के बावजूद आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को कम भुगतान किया जाना सरासर अन्याय है और इस पर रोक लगाई जाएगी। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों के साथ बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार लोकतंत्र के लिए कलंक है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए। लोहरदगा|लोहरदगा, झारखंड राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ, जिला शाखा लोहरदगा द्वारा समाहरणालय के समक्ष इक्युलिप्टस मैदान में आयोजित आम बैठक में नवनिर्वाचित नगर अध्यक्ष एवं सभी विजयी पार्षदों को बधाई दी गई। बैठक में कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि नई स्थानीय निकाय सरकार आम जनता और कर्मियों के प्रति संवेदनशील होकर “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के साथ विकास के मार्ग पर आगे बढ़ेगी। कर्मचारियों ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के बाद पदाधिकारियों और आउटसोर्सिंग कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी। आरोप लगाया गया कि राशि उपलब्ध रहने के बावजूद 2 से 4 माह तक वेतन भुगतान नहीं किया जाता, ड्राइवरों को लेबर के बराबर वेतन दिया जाता है तथा विभिन्न मदों में कटौती कर शोषण किया जाता है। बैठक में कर्मचारियों ने झारखंड के नगर विकास मंत्री द्वारा प्रश्नकाल में दिए गए बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वेतन की पूरी राशि कमीशन सहित जारी होने के बावजूद आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को कम भुगतान किया जाना सरासर अन्याय है और इस पर रोक लगाई जाएगी। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों के साथ बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार लोकतंत्र के लिए कलंक है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए।


