अल्लापुजा एक्सप्रेस में ड्यूटी के दौरान राज इन्फॉर्मेटिक्स कंस्ट्रक्शन कंपनी के एक आउटसोर्स कर्मचारी की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। शव धनबाद लाए जाने के बाद परिजनों ने कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और मुआवजे की मांग की। मृतक की पहचान पिंटू कच्छी उर्फ भारती के रूप में हुई है, जो एसी कोच अटेंडेंट के तौर पर कार्यरत थे। वे धनबाद जंक्शन से अल्लापुजा जाने वाली ट्रेन में ड्यूटी पर थे। ट्रेन खुलने के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई और उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। अल्लापुजा जंक्शन पहुंचने तक उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के बाद शव को वापस धनबाद लाया गया, जिससे परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने कंपनी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मृतक के बेटे ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि उनके पिता पिछले तीन वर्षों से कंपनी में कार्यरत थे, लेकिन कंपनी के मैनेजर ने उन्हें केवल दो दिनों का कर्मचारी बताया। परिजनों ने इसे कंपनी की घोर लापरवाही बताते हुए उचित मुआवजे की मांग की। मृतक के बेटे ऋतिक कुमार भारती ने कहा, “मेरे पिताजी पिछले 3 साल से काम कर रहे थे, लेकिन कंपनी गलत जानकारी दे रही है। हमें न्याय और उचित मुआवजा चाहिए।” मामले की गंभीरता को देखते हुए मेयर प्रतिनिधि अमित गुप्ता ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कंपनी के साथ वार्ता कर परिजनों को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया। अमित गुप्ता ने बताया, “मेयर के निर्देश पर परिवार को हर संभव सहायता दिलाने और कंपनी से बात कर उचित मुआवजा सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। जिस पर परिजन सहमत हो गए हैं।” काफी देर तक चली बातचीत के बाद कंपनी और परिजनों के बीच सहमति बन गई। कंपनी की ओर से 2 लाख रुपए का मुआवजा, शव लाने के लिए 65 हजार रुपए, अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रुपये और मृतक के बेटे को अस्थायी नौकरी देने पर सहमति बनी। अल्लापुजा एक्सप्रेस में ड्यूटी के दौरान राज इन्फॉर्मेटिक्स कंस्ट्रक्शन कंपनी के एक आउटसोर्स कर्मचारी की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। शव धनबाद लाए जाने के बाद परिजनों ने कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और मुआवजे की मांग की। मृतक की पहचान पिंटू कच्छी उर्फ भारती के रूप में हुई है, जो एसी कोच अटेंडेंट के तौर पर कार्यरत थे। वे धनबाद जंक्शन से अल्लापुजा जाने वाली ट्रेन में ड्यूटी पर थे। ट्रेन खुलने के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई और उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। अल्लापुजा जंक्शन पहुंचने तक उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के बाद शव को वापस धनबाद लाया गया, जिससे परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने कंपनी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मृतक के बेटे ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि उनके पिता पिछले तीन वर्षों से कंपनी में कार्यरत थे, लेकिन कंपनी के मैनेजर ने उन्हें केवल दो दिनों का कर्मचारी बताया। परिजनों ने इसे कंपनी की घोर लापरवाही बताते हुए उचित मुआवजे की मांग की। मृतक के बेटे ऋतिक कुमार भारती ने कहा, “मेरे पिताजी पिछले 3 साल से काम कर रहे थे, लेकिन कंपनी गलत जानकारी दे रही है। हमें न्याय और उचित मुआवजा चाहिए।” मामले की गंभीरता को देखते हुए मेयर प्रतिनिधि अमित गुप्ता ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कंपनी के साथ वार्ता कर परिजनों को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया। अमित गुप्ता ने बताया, “मेयर के निर्देश पर परिवार को हर संभव सहायता दिलाने और कंपनी से बात कर उचित मुआवजा सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। जिस पर परिजन सहमत हो गए हैं।” काफी देर तक चली बातचीत के बाद कंपनी और परिजनों के बीच सहमति बन गई। कंपनी की ओर से 2 लाख रुपए का मुआवजा, शव लाने के लिए 65 हजार रुपए, अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रुपये और मृतक के बेटे को अस्थायी नौकरी देने पर सहमति बनी।


