महज 17 साल की उम्र में ओडिशा की एलिश एक्का ने इतिहास रच दिया है। एलिश एक्का के गले में चमकता सिल्वर मेडल सिर्फ एक खेल की जीत नहीं बल्कि उनकी मां के अथाह त्याग और अदम्य साहस का एक सुंदर उदाहरण भी है। ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के एक साधारण से गांव संतोषपुर की एलिश एक्का की कहानी शुरु होती है हॉकी से लेकिन मां प्रमिला एक्का खुद राज्य स्तर की हॉकी खिलाड़ी रह चुकी हैं। प्रमिला को पारिवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक तंगी के कारण अपना खेल छोड़ना पड़ा था। मां की तरह एलिश ने भी बतौर स्ट्राइकर हॉकी में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखा लेकिन टीम स्पोर्ट्स में मिलने वाले सीमित मौकों ने एलिश को अपने खेल सफर पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया। ऐसा विचार आने के बाद एलिश ने गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित बिरसा मुंड एथलेटिक्स स्टेडियम के कोचों से बात की और फिर हॉकी छोड़कर रेस वॉकिंग में करियर बनाने का बेहद साहसिक कदम उठाया। एलिश ने पिछे दो साल में बोर्ड परीक्षा की तैयारी और कड़ी ट्रेनिंग के बीच बेहतरीन संतुलन बनाए रखा अभ्यास के लिए एलिश को अक्सर लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इस अवरत मेहनत का फल तब मिला जब एलिश ने जगदलपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में महिला दस हजार मीटर रेस वॉक में 1:04.59 का समय निकालकर सिल्वर मेडल जीता।
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