बिहार की एनडीए सरकार राज्य के सभी जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा बेहतर करने के प्रयास में जुटी हुई है। सरकार की ओर से सबसे पहले राज्य के मॉडल अस्पतालों में कई महत्वपूर्ण जांच की सुविधा देने की पहल की जा रही है। उसी पहल के अंतर्गत अब सदर अस्पताल में इलेक्ट्रोलाइट और थायरॉयड की जांच की सुविधा शुरू की जाएगी, लेकिन सबसे पहले इलेक्ट्रोलाइट की जांच की सुविधा शुरू की जाएगी। इसको लेकर अस्पताल प्रबंधक प्रफुल्ल कांत निराला ने सोमवार को सेंट्रल पैथोलॉजी लैब का निरीक्षण किया और इस संदर्भ में लैब इंचार्ज केएन शुक्ला से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रोलाइट की जांच में शरीर में सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड की कमी की जांच की जाती है। इनकी कमी की जांच की व्यवस्था सदर अस्पताल में नहीं होने के कारण मरीजों को निजी लैब जाना पड़ता था। जिससे उन्हें हजारों रुपए खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब इस जांच की व्यवस्था हो जाने से उन्हें अपने इलाज के लिए हजारों रुपए खर्च नहीं करने पड़ेंगे। सदर अस्पताल में 92 प्रकार की जांच की व्यवस्था सदर अस्पताल में वर्तमान में 92 प्रकार की जांच की व्यवस्था है। सदर अस्पताल की चिकित्सक डॉ. देवाश्री सिंह ने बताया कि इलेक्ट्रोलाइट की कमी एक ऐसी स्थिति है जब हमारे शरीर में सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि की मात्रा कम हो जाती है। इलेक्ट्रोलाइट्स हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे हमारे शरीर की कोशिकाओं, नसों, और मांसपेशियों को काम करने में मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि इसकी कमी के महत्वपूर्ण कारणों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), पसीना आना, उल्टी या डायरिया, कुछ दवाओं का सेवन, कुछ बीमारियों के कारण (जैसे कि किडनी की बीमारी) आदि प्रमुख है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रोलाइट की कमी के लक्षण मांसपेशियों में दर्द या कमजोरी, थकान या कमजोरी, सिरदर्द, उल्टी या डायरिया तथा हृदय की समस्याएं आदि शामिल हैं। बिहार की एनडीए सरकार राज्य के सभी जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा बेहतर करने के प्रयास में जुटी हुई है। सरकार की ओर से सबसे पहले राज्य के मॉडल अस्पतालों में कई महत्वपूर्ण जांच की सुविधा देने की पहल की जा रही है। उसी पहल के अंतर्गत अब सदर अस्पताल में इलेक्ट्रोलाइट और थायरॉयड की जांच की सुविधा शुरू की जाएगी, लेकिन सबसे पहले इलेक्ट्रोलाइट की जांच की सुविधा शुरू की जाएगी। इसको लेकर अस्पताल प्रबंधक प्रफुल्ल कांत निराला ने सोमवार को सेंट्रल पैथोलॉजी लैब का निरीक्षण किया और इस संदर्भ में लैब इंचार्ज केएन शुक्ला से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रोलाइट की जांच में शरीर में सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड की कमी की जांच की जाती है। इनकी कमी की जांच की व्यवस्था सदर अस्पताल में नहीं होने के कारण मरीजों को निजी लैब जाना पड़ता था। जिससे उन्हें हजारों रुपए खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब इस जांच की व्यवस्था हो जाने से उन्हें अपने इलाज के लिए हजारों रुपए खर्च नहीं करने पड़ेंगे। सदर अस्पताल में 92 प्रकार की जांच की व्यवस्था सदर अस्पताल में वर्तमान में 92 प्रकार की जांच की व्यवस्था है। सदर अस्पताल की चिकित्सक डॉ. देवाश्री सिंह ने बताया कि इलेक्ट्रोलाइट की कमी एक ऐसी स्थिति है जब हमारे शरीर में सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि की मात्रा कम हो जाती है। इलेक्ट्रोलाइट्स हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे हमारे शरीर की कोशिकाओं, नसों, और मांसपेशियों को काम करने में मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि इसकी कमी के महत्वपूर्ण कारणों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), पसीना आना, उल्टी या डायरिया, कुछ दवाओं का सेवन, कुछ बीमारियों के कारण (जैसे कि किडनी की बीमारी) आदि प्रमुख है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रोलाइट की कमी के लक्षण मांसपेशियों में दर्द या कमजोरी, थकान या कमजोरी, सिरदर्द, उल्टी या डायरिया तथा हृदय की समस्याएं आदि शामिल हैं।


