गोरखपुर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा है कि एक फरवरी को पेश होने वाले आम बजट को लेकर पूरे देश के बिजली कर्मी सतर्क हैं। समिति ने आशंका जताई है कि बजट या बजट सत्र के दौरान बिजली के निजीकरण अथवा इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल से जुड़ी कोई घोषणा की जा सकती है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि संसद में बिजली के निजीकरण या इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल को पारित कराने का कोई भी एकतरफा प्रयास हुआ, तो देशभर के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के लाइटनिंग एक्शन के तहत कार्यस्थलों से बाहर आकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस संबंध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स और संघर्ष समिति पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुकी हैं। लोकसभा में बिल का विवरण आने से बढ़ी चिंता समिति ने बताया कि 30 जनवरी को केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री द्वारा लोकसभा में ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का विवरण रखे जाने से बिजली कर्मियों की आशंकाएं और गहरी हो गई हैं। इससे संकेत मिल रहा है कि बजट या बजट सत्र के दौरान इस विधेयक को पेश कर पारित कराने का प्रयास किया जा सकता है। संघर्ष समिति के अनुसार, सूत्रों से जानकारी मिली है कि केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच बिजली के निजीकरण को लेकर बैठक हुई है। समिति का कहना है कि इससे आम बजट में बिजली क्षेत्र के निजीकरण से जुड़ी किसी घोषणा की संभावना और प्रबल हो गई है। डिस्कॉम की इक्विटी और वित्तीय पैकेज पर सवाल समिति ने याद दिलाया कि 10 अक्टूबर 2025 को हुई ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि केंद्र सरकार राज्यों को वित्तीय पैकेज तभी देगी, जब राज्य अपने डिस्कॉम की 51 प्रतिशत इक्विटी बंधक रखें, या 26 प्रतिशत इक्विटी बेचकर प्रबंधन निजी हाथों में सौंपें, अथवा डिस्कॉम को डिसइनवेस्टमेंट के लिए स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जाए। बजट से पहले इस मुद्दे पर मंत्रालयों के बीच विचार-विमर्श को समिति ने गंभीर चिंता का विषय बताया। सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली बनाए रखने की मांग
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों को उम्मीद है कि आम बजट में बिजली क्षेत्र को व्यापक जनहित में सार्वजनिक क्षेत्र में ही रखा जाएगा। हालांकि, यदि बजट में निजीकरण या इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल से जुड़ा कोई भी प्रस्ताव सामने आता है, तो संघर्ष समिति लाइटनिंग एक्शन के लिए पूरी तरह तैयार है।
समिति ने बताया कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलन के 430वें दिन भी प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया।


