पटना | मार्च में बढ़ती गर्मी आैर गैस संकट का असर राजधानी पटना की बिजली पर दिखने लगा है। शहर में पिछले साल के मुकाबले इस साल 112 मेगावाट बिजली की खपत अधिक हुई है। पिछले साल 18 मार्च को 405 मेगावाट बिजली खपत हुई थी, जो इस साल यह बढ़कर 517 मेगावाट तक पहुंच गई है। पेसू के इंजीनियरों के मुताबिक, पिछले साल मार्च के अंत तक 500 मेगावाट से कम बिजली खपत थी। इस साल यह बढ़कर 500 मेगावाट को पार कर गई है। गर्मी के कारण बिजली खपत तेजी से बढ़ रही है। सभी घरों में पंखा, कूलर आैर एसी का उपयोग होने लगा है। साथ ही गैस संकट को लेकर लोग इंडक्शन सहित अन्य उपकरण का उपयोग कर रहे हैं। इससे भी बिजली की खपत बढ़ी है। पटना शहर में पिछले साल अधिकतम 883 मेगावाट बिजली की खपत हुई थी। इस साल यह बढ़कर 1000 मेगावाट तक पहुंच सकती है। इसको लेकर बिजली कंपनियां तैयारी कर रही हैं। 31 मार्च तक मेंटेनेंस कार्य पूरा करने का निर्देश : बिजली कंपनी मुख्यालय ने पटना समेत राज्य के सभी जिलों में तैनात इंजीनियरों को 31 मार्च तक मेंटेनेंस कार्य पूरा करने का टास्क दिया है। पिछले दिनों ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने इंजीनियरों को किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा या विद्युत आपूर्ति में अवरोध पर तत्काल कार्रवाई करने, अनावश्यक ट्रिपिंग और फॉल्ट पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। साथ ही बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों का नियमित निरीक्षण, ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने, वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार का भी निर्देश दिया था। राज्य में खपत की स्थित : राज्य में वर्तमान में 4900 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। इसमें सबसे अधिक 600 से 650 मेगावाट पटना जिले में खपत है। मुजफ्फरपुर में 210 मेगावाट, गया में 243 मेगावाट, भागलपुर में 80 मेगावाट, पूर्णिया में 128 मेगावाट बिजली की औसत खपत है।
बिजली खपत की स्थिति
(खपत मेगावाट में) पटना | मार्च में बढ़ती गर्मी आैर गैस संकट का असर राजधानी पटना की बिजली पर दिखने लगा है। शहर में पिछले साल के मुकाबले इस साल 112 मेगावाट बिजली की खपत अधिक हुई है। पिछले साल 18 मार्च को 405 मेगावाट बिजली खपत हुई थी, जो इस साल यह बढ़कर 517 मेगावाट तक पहुंच गई है। पेसू के इंजीनियरों के मुताबिक, पिछले साल मार्च के अंत तक 500 मेगावाट से कम बिजली खपत थी। इस साल यह बढ़कर 500 मेगावाट को पार कर गई है। गर्मी के कारण बिजली खपत तेजी से बढ़ रही है। सभी घरों में पंखा, कूलर आैर एसी का उपयोग होने लगा है। साथ ही गैस संकट को लेकर लोग इंडक्शन सहित अन्य उपकरण का उपयोग कर रहे हैं। इससे भी बिजली की खपत बढ़ी है। पटना शहर में पिछले साल अधिकतम 883 मेगावाट बिजली की खपत हुई थी। इस साल यह बढ़कर 1000 मेगावाट तक पहुंच सकती है। इसको लेकर बिजली कंपनियां तैयारी कर रही हैं। 31 मार्च तक मेंटेनेंस कार्य पूरा करने का निर्देश : बिजली कंपनी मुख्यालय ने पटना समेत राज्य के सभी जिलों में तैनात इंजीनियरों को 31 मार्च तक मेंटेनेंस कार्य पूरा करने का टास्क दिया है। पिछले दिनों ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने इंजीनियरों को किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा या विद्युत आपूर्ति में अवरोध पर तत्काल कार्रवाई करने, अनावश्यक ट्रिपिंग और फॉल्ट पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। साथ ही बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों का नियमित निरीक्षण, ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने, वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार का भी निर्देश दिया था। राज्य में खपत की स्थित : राज्य में वर्तमान में 4900 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। इसमें सबसे अधिक 600 से 650 मेगावाट पटना जिले में खपत है। मुजफ्फरपुर में 210 मेगावाट, गया में 243 मेगावाट, भागलपुर में 80 मेगावाट, पूर्णिया में 128 मेगावाट बिजली की औसत खपत है।
बिजली खपत की स्थिति
(खपत मेगावाट में)


