बिल्डर बिल लेकर फरार, 600 परिवारों का बिजली-पानी बंद:मोहाली में सोसायटी निवासियों ने किया भुगतान पर जमा नहीं हुआ. तीन दिन पहले कटा कनेक्शन

बिल्डर बिल लेकर फरार, 600 परिवारों का बिजली-पानी बंद:मोहाली में सोसायटी निवासियों ने किया भुगतान पर जमा नहीं हुआ. तीन दिन पहले कटा कनेक्शन

जीरकपुर की सुषमा जॉइनेस्ट सोसायटी में बुनियादी सुविधाओं का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बिल्डर द्वारा बिजली बिल का भुगतान न करने के कारण 31 मार्च की देर रात सोसायटी का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। इससे करीब 600 परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। सोसायटी निवासियों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से नियमित रूप से बिजली बिल जमा कर रहे थे। हालांकि, बिल्डर ने यह राशि पावरकॉम को जमा नहीं करवाई। अब इसका खामियाजा सीधे तौर पर निवासियों को भुगतना पड़ रहा है। निवासी सिंह बाजवा ने बताया कि बिल्डर के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद वह परिवार सहित फरार हो गया है। आधी रात को अचानकर काटी बिजली एडवोकेट बाजवा के अनुसार, 31 मार्च की रात बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। अब पावरकॉम अधिकारी निवासियों पर बकाया राशि जमा करने का दबाव बना रहे हैं, जबकि लोग पहले ही बिल्डर को भुगतान कर चुके हैं। निवासियों ने प्रशासन से जल्द राहत दिलाने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। जानिए निवासियों की मुसीबत के बारे में पानी लिफ्ट बंद, पानी की सप्लाई भी नहीं: बिजली न होने से सोसायटी की लिफ्टें पूरी तरह बंद हो गई हैं, जिससे ऊंची मंजिलों पर रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों और बच्चों को हो रही है। खरीद कर पी रहे पानी, लेकिन ऊपर चढ़ाएं कैसे: पानी की सप्लाई भी पूरी तरह प्रभावित है। निवासियों को बाजार से पानी खरीदने या टैंकरों के सहारे गुजारा करना पड़ रहा है। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत ऊपरी मंजिल वालों को है। उनके लिए पानी लेकर सीढि़यों से चढ़ना मुश्किल है। कारनामे और भी है, लोग भुगतान के करने के बाद भी झेल रहे मुसीबत जनरेटर खराब, किराए वाले का 22 लाख बकाया सोसायटी में लगे जनरेटर लंबे समय से खराब पड़े हैं। किराए पर लिए गए जनरेटर का बिल 22 लाख रुपये से अधिक हो जाने के कारण सप्लायर ने भी सेवा देने से इनकार कर दिया है। निवासियों का कहना है कि पहले रोजाना करीब 50 हजार रुपये डीजल पर खर्च कर किसी तरह बिजली का इंतजाम किया जा रहा था, लेकिन अब वह भी संभव नहीं है। प्रीपेड मीटर के नाम पर गड़बड़ी सोसायटी वासियों ने आरोप लगाया है कि बिल्डर द्वारा प्रीपेड मीटर के नाम पर आर्थिक गड़बड़ी की गई है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर स्थिति में तुरंत हस्तक्षेप कर बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं बहाल करवाई जाएं।

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