महाराष्ट्र के सातारा जिला परिषद चुनाव (Satara Zilla Parishad Election) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सत्ताधारी महायुति के भीतर ही अब खुलकर मतभेद सामने आ गए हैं, जहां शिवसेना और भाजपा आमने-सामने नजर आ रही हैं। अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा द्वारा अपने ही सहयोगी दलों शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को मात देने के बाद मामला और गरमा गया है। उपमुख्यमंत्री व शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने भाजपा (BJP) के स्थानीय नेताओं और पुलिस प्रशासन पर लोकतंत्र का गला घोंटने का गंभीर आरोप लगाया।
मतदान से रोकने का आरोप, शिंदे हुए आक्रामक
उपमुख्यमंत्री व शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सातारा में पुलिस प्रशासन ने लोकतंत्र का गला घोंटने का काम किया है। शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब निर्वाचित सदस्यों को मतदान करने से रोका गया। इस दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी सदन में मौजूद थे। शिंदे की भारी नाराजगी और आरोपों के बाद खुद फडणवीस ने सदन में मोर्चा संभाला।
शिंदे ने दावा किया कि चुनाव से पहले दो सदस्यों के खिलाफ पुराने मामले में अचानक केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की गई, ताकि वे मतदान न कर सकें। उन्होंने कहा कि खुद उन्होंने सातारा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से बात कर यह सुनिश्चित करने को कहा था कि किसी भी सदस्य को वोटिंग से वंचित न किया जाए।
‘लोकतंत्र की हत्या हुई’
सदन की कार्यवाही के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का बेहद आक्रामक अवतार देखने को मिला। शिंदे ने आरोप लगाया कि तमाम निर्देशों के बावजूद मतदान के दिन पुलिस ने दोनों सदस्यों को हिरासत में ले लिया और उन्हें वोट डालने से रोक दिया गया।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने न मंत्री देखा, न विधायक और न ही पदाधिकारी, बल्कि आरोपियों की तरह जबरन दो सदस्यों को उठाकर ले जाया गया। शिंदे ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए कड़ी नाराजगी जताई।
भाजपा पर भी साधा निशाना
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सियासी साजिश होने का भी आरोप लगाया गया। शिंदे ने कहा कि बहुमत शंभुराज देसाई और मकरंद पाटिल के पास था, लेकिन उसे कम करने के लिए यह पूरा घटनाक्रम रचा गया। उनके गुट के दो सदस्यों के खिलाफ 5-10 साल पुराने मामले में केस दर्ज किया गया।
शिंदे ने कहा, “मैंने खुद सातारा एसपी तुषार दोषी और महाराष्ट्र के डीजीपी सदानंद दाते से फोन पर बात की थी कि किसी भी सदस्य को वोट देने से वंचित न रखा जाए। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया था कि मतदान के बाद ही कार्रवाई होगी, लेकिन हकीकत में सदस्यों को अपराधियों की तरह उठाकर ले जाया गया और उन्हें वोट नहीं डालने दिया गया।”
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
उपमुख्यमंत्री के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। फडणवीस ने कहा कि शिंदे द्वारा बताए गए तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
महायुति में बढ़ी खटास
सातारा जिला परिषद चुनाव का यह विवाद अब महायुति के अंदर गहराते मतभेदों की ओर इशारा कर रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है। महायुति में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी शामिल है।
भाजपा को रोकने के लिए शिवसेना-एनसीपी ने मिलकर चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति बनाई थी। एनसीपी की ओर से मनीषा फडतरे (अध्यक्ष पद) और शिवसेना की ओर से अशोक पाटिल (उपाध्यक्ष पद) ने दावेदारी पेश की, लेकिन दोनों को महज एक वोट से हार का सामना करना पड़ा। इस कांटे की टक्कर में भाजपा की ओर से प्रिया शिंदे को अध्यक्ष चुना गया, जबकि राजू भोसले ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।


