युद्धत्र का असर: फैक्ट्रियों में बिगड़े हालात, 15 दिन में 50 करोड़ से अधिक का नुकसान, कई प्लांट हो गए बंद

युद्धत्र का असर: फैक्ट्रियों में बिगड़े हालात, 15 दिन में 50 करोड़ से अधिक का नुकसान, कई प्लांट हो गए बंद

भिण्ड-मालनपुर. पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष ने औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर की कमर तोड़ दी है। इंडस्ट्रीज में 50 प्रतिशत कारोबार प्रभावित है। कई बड़ी कंपनियों को एक ही शिफ्ट में चलाया जा रहा है। गोदरेज जैसी फैक्ट्री में कैंटीन बंद होने से वर्कर घर से टिफिन लाने को मजबूर हैं। 20 मार्च से उद्योगों की हालत अधिक खराब है। कंपनियां बंद होने की कगार पर हैं। सुप्रीम कंपनी में तो पंद्रह दिन से फॉम बनाने वाला प्लांट बंद है। जिससे रोजाना 25 लाख रुपए का घाटा हो रहा है। कंपनियों में 15 दिन में करीब 50 करोड़ का नुकसान हुआ है।

सुप्रीम इंडस्ट्रीज के एचआर जनरल मैनेजर योगेश चौहान ने बताया फॉम प्लांट 20 मार्च से बंद है। पुराने स्टॉक से ही माल सेल कर रहे हैं, जिसमें 50 फीसदी की गिरावट आई है। पहले रोजाना 60 लाख रुपए की सेङ्क्षलग थी, जो घटकर 25 से 30 लाख की रह गई है। कंपनी में मुंबई से एलपीजी का टैंकर आता है जो बंद हो गया है।

40 फीसदी घट गया उत्पादन

सूर्या हाईमास्ट में 40 प्रतिशत प्रोडेक्शन घट गया है। कंपनी का जेआई प्लांट पहले 24 घंटे चलता था जो अब 12 घंटे रह ही चलाया जा रहा है। नोवा, गोदरेज में गैस न मिलने से कैंटीन बंद हो गई है। इंडस्ट्रीज की अधिकांश कंपनियां सीधे गैस की किल्लत से प्रभावित हो रही हैं। इनमें से कई तो बंद होने की कगार पर हैं।

बाहर से मजदूरों का पलायन शुरू

गैर की भारी किल्लत के कारण दिहाड़ी मजदूरों का पलायन सबसे अधिक हो रहा है। खुद की रेडी लगाकर चाट, पकौड़ी, नास्ता, चाय, समौसा, जलेवी आदि खानपान का सामान बेचने वालों का रोजगार ठप हो गया है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें गैस नहीं मिल रही है। जिसके कारण धंधा तो दूर पेट भरने के भी लाले पड़ रहे हैं। अनिश्चितता के चलते दिहाड़ी मजदूरों का सबसे अधिक पलायन बढ़ा है।

हजारों मजदूरों से छिन गया रोजगार

औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर में पिछले पंद्रह दिन में 4 हजार मजदूरों को घर बैठना पड़ा है। कुछ लोगों को प्लांट बंद होने से काम नहीं मिल रहा है तो अधिकांश लोगों को फुटकर गैस नहीं मिल रही है। जिससे वे काम छोडऩे को मजबूर हो गए हैं। इंडस्ट्रीज में कई बड़ी कंपनियों में काम करने वाले नियमित वर्कर भी छुट्टी पर चले गए हैं। कंपनियों के आसपास लगने वाले खानपान के ठेले भी बंद हो गई हैं। जिससे बाहर लोगों को खाने पीने का सामान भी ठीक से नहीं मिल पा रहा है। कई कंपनियों ने प्रशासन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है।

कंपनियों ने प्रोडक्शन को घटाया

कंपनियों में गैस की 35 से 50 प्रतिशत तक कटौती की गई है। औद्योगिक क्षेत्र के जानकारों की मानें तो जिले के इंडस्ट्रीज क्षेत्र मालनपुर की 50 कंपनियां प्रभावित हैं। प्रोडेक्शन 30 प्रतिशत तक घट गया है। यही हाल गुजरात, महाराष्ट्र और दिल्ली की कंपनियों के हैं। इनमें सीधे गैस से संचालित होने वाले कारखाने सबसे अधिक प्रभावित हैं। कई कंपनियों में कमर्शियल गैस की आपूर्ति कम होने से कैंटीन बंद होने से संकट खड़ा हो गया है।

मुंबई से सात दिन में एलपीजी का टैंकर आता था। 20 तारीख से गैस नहीं आ रही है। लगातार फिङ्क्षलग कंपनियों से लगातार संपर्क कर रहे हैं, प्रशासन भी मदद नहीं कर रहा है। जिससे बहुत परेशानी आ रही है।
योगेश चौहान, जीएम एचआर सुप्रीम लिमिटेड भिण्ड
&गैस की किल्लत से कंपनियों में काम प्रभावित हुआ है। प्रोडक्शन घटा है। मजदूरों का रोजगार जा रहा है। स्थिति को लेकर शासन व प्रशासन को अवगत कराया है। जल्द ही कोई हल निकलेगा।
अमन कुमार ङ्क्षसह, जीएम डबलपमेंट एमपीआईडीसी ग्वालियर

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