किशनगंज में ईरान-इजराइल युद्ध का असर अब स्थानीय रसोई पर दिखने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज की खाड़ी में एलपीजी आयात बाधित हुआ है, जिससे कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत हो गई है। जिले में 50 से अधिक छोटे-बड़े होटल और रेस्टोरेंट या तो पूरी तरह बंद हो गए हैं या आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। बचे हुए प्रतिष्ठानों में भी खाना बनाने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। कमर्शियल LPG सिलेंडर उपलब्ध नहीं स्थानीय होटल मालिकों के अनुसार, बाजार में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं। यदि वे काला बाजार में मिलते भी हैं, तो उनकी कीमतें बहुत अधिक हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए कई होटलों ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं अपनाई हैं। लगभग 20 से अधिक होटल-रेस्टोरेंट अब इलेक्ट्रिक चूल्हे या इंडक्शन का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बिजली का बिल बढ़ गया है और भोजन के स्वाद पर भी असर पड़ रहा है। 25 होटलों में कोयले पर बन रहा खाना वहीं, 25 से अधिक होटलों ने कोयले पर खाना बनाना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ छोटे होटल जलावन (लकड़ी) का उपयोग कर रहे हैं। इस संकट का सबसे अधिक प्रभाव छोटे ठेले और फास्ट फूड विक्रेताओं पर पड़ा है। वे न तो महंगे इलेक्ट्रिक उपकरण खरीद सकते हैं और न ही नियमित रूप से कोयला या लकड़ी का इंतजाम कर पाते हैं। नतीजतन, कई ठेले बंद हो गए हैं या बहुत सीमित मेन्यू के साथ काम कर रहे हैं।एक स्थानीय होटल संचालक ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, ‘सिलेंडर न मिलने के कारण मजबूरी में इलेक्ट्रिक चूल्हा लगाना पड़ा, लेकिन बिजली कटौती और महंगे बिल से मुश्किलें और बढ़ गई हैं।’ एक अन्य व्यापारी ने ठेले वालों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनका रोजगार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जिला प्रशासन ने दावा किया है कि घरेलू सिलेंडरों की उपलब्धता पर्याप्त है और उनकी होम डिलीवरी सुचारू रूप से चल रही है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत पर अभी कोई राहत नहीं मिली है। कुछ लोगों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा, तो स्थिति और भी खराब हो सकती है। किशनगंज में ईरान-इजराइल युद्ध का असर अब स्थानीय रसोई पर दिखने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज की खाड़ी में एलपीजी आयात बाधित हुआ है, जिससे कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत हो गई है। जिले में 50 से अधिक छोटे-बड़े होटल और रेस्टोरेंट या तो पूरी तरह बंद हो गए हैं या आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। बचे हुए प्रतिष्ठानों में भी खाना बनाने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। कमर्शियल LPG सिलेंडर उपलब्ध नहीं स्थानीय होटल मालिकों के अनुसार, बाजार में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं। यदि वे काला बाजार में मिलते भी हैं, तो उनकी कीमतें बहुत अधिक हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए कई होटलों ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं अपनाई हैं। लगभग 20 से अधिक होटल-रेस्टोरेंट अब इलेक्ट्रिक चूल्हे या इंडक्शन का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बिजली का बिल बढ़ गया है और भोजन के स्वाद पर भी असर पड़ रहा है। 25 होटलों में कोयले पर बन रहा खाना वहीं, 25 से अधिक होटलों ने कोयले पर खाना बनाना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ छोटे होटल जलावन (लकड़ी) का उपयोग कर रहे हैं। इस संकट का सबसे अधिक प्रभाव छोटे ठेले और फास्ट फूड विक्रेताओं पर पड़ा है। वे न तो महंगे इलेक्ट्रिक उपकरण खरीद सकते हैं और न ही नियमित रूप से कोयला या लकड़ी का इंतजाम कर पाते हैं। नतीजतन, कई ठेले बंद हो गए हैं या बहुत सीमित मेन्यू के साथ काम कर रहे हैं।एक स्थानीय होटल संचालक ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, ‘सिलेंडर न मिलने के कारण मजबूरी में इलेक्ट्रिक चूल्हा लगाना पड़ा, लेकिन बिजली कटौती और महंगे बिल से मुश्किलें और बढ़ गई हैं।’ एक अन्य व्यापारी ने ठेले वालों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनका रोजगार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जिला प्रशासन ने दावा किया है कि घरेलू सिलेंडरों की उपलब्धता पर्याप्त है और उनकी होम डिलीवरी सुचारू रूप से चल रही है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत पर अभी कोई राहत नहीं मिली है। कुछ लोगों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा, तो स्थिति और भी खराब हो सकती है।


