Iran Crisis का असर: Morbi Ceramic उद्योग पर लटकेंगे ताले? Gas Supply ठप होने से मचा हड़कंप।

Iran Crisis का असर: Morbi Ceramic उद्योग पर लटकेंगे ताले? Gas Supply ठप होने से मचा हड़कंप।
गुजरात के मोरबी में देश का बड़ा सिरेमिक उद्योग इन दिनों गंभीर संकट की आशंका से गुजर रहा है। उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले कुछ दिनों में यहां की फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच जारी टकराव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने के बाद खाड़ी क्षेत्र से आने वाली गैस और पेट्रोलियम की खेपों पर असर पड़ा है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस मार्गों में से एक माना जाता है।
बता दें कि मोरबी का सिरेमिक उद्योग बड़े पैमाने पर प्राकृतिक गैस और प्रोपेन गैस पर निर्भर करता है। टाइल्स और अन्य सिरेमिक उत्पादों के निर्माण में भट्टियों को जलाने और सुखाने की प्रक्रिया में गैस मुख्य ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती है।
मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (विट्रिफाइड टाइल्स डिवीजन) के अध्यक्ष मनोज अरवडिया ने कहा कि खाड़ी देशों से आने वाली गैस और पेट्रोलियम की आपूर्ति प्रभावित हुई है और कई खेपें होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अटकी हुई हैं। उनके मुताबिक मौजूदा हालात में उद्योग के लिए गैस की नियमित आपूर्ति रुक गई है।
उन्होंने बताया कि प्रोपेन गैस इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के पास केवल तीन से चार दिन का ही स्टॉक बचा है। वहीं गुजरात गैस लिमिटेड की ओर से मिलने वाली सीएनजी की आपूर्ति का अनुमानित भंडार लगभग एक सप्ताह तक चल सकता है।
अरवडिया के अनुसार यदि मौजूदा युद्ध जैसी स्थिति जारी रहती है तो आने वाले एक सप्ताह या दस दिनों के भीतर पूरे मोरबी सिरेमिक उद्योग को कामकाज रोकने की नौबत आ सकती है। उन्होंने इसे उद्योग के सामने खड़ा बड़ा खतरा बताया है।
मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (वॉल टाइल्स डिवीजन) के अध्यक्ष हरेश बोपालिया ने भी इसी तरह की चिंता जताई है। उनके अनुसार प्राकृतिक गैस और प्रोपेन की सप्लाई चेन प्रभावित हो चुकी है, जिसके कारण उद्योग इकाइयों तक समय पर ईंधन पहुंच नहीं पा रहा है।
उन्होंने कहा कि कई कंपनियों के पास प्रोपेन का स्टॉक दो से तीन दिन तक ही चलने की संभावना है, जबकि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति अधिकतम दस दिन तक ही जारी रह सकती है। इसके बाद उद्योग को संचालन बंद करने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि मोरबी में करीब 600 सिरेमिक उत्पादन इकाइयां संचालित हो रही हैं और इनमें बड़ी संख्या में लोग रोजगार से जुड़े हुए हैं। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार यदि गैस आपूर्ति बाधित रहती है तो इन सभी इकाइयों को बंद करना पड़ सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार मोरबी के सिरेमिक उद्योग में सीधे तौर पर दो से तीन लाख मजदूर काम करते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से करीब चार लाख लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। ऐसे में उद्योग बंद होने की स्थिति में मजदूरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
सिरेमिक उद्योग से जुड़े उद्यमी मणिभाई बावरवा ने बताया कि मोरबी की लगभग 80 प्रतिशत इकाइयां प्रोपेन गैस पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि 23 फरवरी को सऊदी अरब के एक बंदरगाह पर हुए हादसे के बाद से ही प्रोपेन की आपूर्ति प्रभावित थी और उद्योग को उम्मीद थी कि 10 मार्च तक स्थिति सुधर जाएगी।
हालांकि अब खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण आपूर्ति लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गई है। उनका कहना है कि अगर गैस आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो उद्योग को तत्काल उत्पादन रोकना पड़ सकता है।
एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मुकेश कुंदरिया ने भी चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष एक या दो सप्ताह तक जारी रहता है तो उद्योग 30 से 45 दिनों तक बंद रह सकता है। वहीं यदि स्थिति चार सप्ताह तक बनी रहती है तो दो महीने तक उत्पादन शुरू करना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब आपूर्ति दोबारा शुरू होगी तो ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की आशंका भी है, जिससे उद्योग इकाइयों के लिए काम जारी रखना और मुश्किल हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *